Home Sports ज्योति याराजी ने पदक जीतने के बाद किसको दी थी श्रद्धांजलि? कौन हैं उनके मेंटॉर साई गौतम

ज्योति याराजी ने पदक जीतने के बाद किसको दी थी श्रद्धांजलि? कौन हैं उनके मेंटॉर साई गौतम

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ज्योति याराजी ने पदक जीतने के बाद किसको दी थी श्रद्धांजलि? कौन हैं उनके मेंटॉर साई गौतम

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हाइलाइट्स

ज्योति याराजी ने एशियन गेम्स में महिलाओं की हर्डल रेस में सिल्वर मेडल जीता था
ज्योति ने पोडियम पर अपने मेंटॉर को खास अंदाज में श्रद्धांजलि दी थी

ई दिल्ली. भारत के लिए चीन के हांगझोऊ में हुए एशियन गेम्स ऐतिहासिक रहे. पहली बार इन खेलों के इतिहास में भारत ने 100 से अधिक पदक जीते थे. एथलेटिक्स में भारत ने सबसे अधिक 29 पदक जीते थे. इसमें से 6 गोल्ड मेडल थे. एथलेटिक्स में ज्योति याराजी ने भी बड़ी उपलब्धि हासिल की थी. उन्होंने एशियन गेम्स के 100 मीटर बाधा दौड़ में रजत पदक जीता था.

पदक जीतने के बाद जब ज्योति पोडियम पर पहुंचीं थी तो उन्होंने हाथ में अपना बिब पकड़ा हुआ था, जिस पर लिखा था, “ये तुम्हारे लिए है गौतम. हम तुम्हें मिस कर रहे हैं.” दरअसल, ज्योति ने जिस साई गौतम का जिक्र किया था, वो खुद नेशनल लेवल के एथलीट थे और ज्योति के मेंटॉर थे. गौतम की इस साल अगस्त में ही सड़क हादसे में मौत हो गई थी. यही कारण है कि एशियन गेम्स में जब ज्योति ने सिल्वर मेडल जीता तो वो अपने मेंटॉर को याद कर भावुक हो गईं और इस तरह से श्रद्धांजलि दी.

ज्योति ने अपने मेंटॉर को सड़क हादसे में खो दिया था
बता दें कि एशियन गेम्स से पहले गौतम की काकीनाड़ा में एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी. इसलिए ज्योति एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना चाहती थीं. ताकि अपने मेंटॉर को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकें.

मैंने गौतम को श्रद्धांजलि देने के लिए संदेश लिखा था: ज्योति
ज्योति ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, “मैं गौतम के लिए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना चाहती थी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. बिब पर संदेश लिखना, गौतम को श्रद्धांजलि देने का मेरा अपना तरीका था. मैं उन्हें अपना पदक समर्पित करना चाहती थी. वो हमेशा मेरे लिए खड़े रहे. उन्होंने हमेशा मुझे प्रेरित किया और हौसला बढ़ाया.”

‘गौतम ने भी सबसे पहले मेरा टैलेंट पहचाना था’
ज्योति ने गौतम को याद करते हुए कहा, “वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने मुझे बताया कि मुझमें प्रतिभा है. वो मेरे होम टाउन विशाखापट्टनम में किसी रिश्तेदार के यहां आए थे. यहां उन्होंने मुझे मैदान में ट्रेनिंग करते देखा. ये 2015 की बात है. मैंने उस समय शुरुआत ही की थी. उन्होंने तब मुझे बताया था कि टैलेंटेड एथलीट्स के लिए हैदराबाद में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया का हॉस्टल है. गौतम ने भी मुझे हॉस्टल में दाखिला दिलाया और मेंटॉर की तरह हर्डल रेस की बारीकियां भी सिखाईं.”

मैं गौतम का सपना पूरा करने के लिए उतरीं थीं
ज्योति मुंबई में थीं, जब उन्हें गौतम के एक्सीडेंट की खबर मिली थी. वो फौरन काकीनाड़ा पहुंचीं थीं ताकि मुश्किल वक्त में उनके साथ रह सकें. ज्योति ने बताया, “मैं उन्हें (गौतम) देखने गईं थीं. वो 4 दिन अस्पताल में रहे. वो आईसीयू में थे. उनके दिमाग में खून का थक्का जम गया था. वो हिल तक नहीं पा रहे थे. इसके बाद सभी लोगों ने मुझसे कहा था कि मुझे गौतम का सपना पूरा करना चाहिए. मैं इसी इरादे को लेकर एशियन गेम्स में पहुंचीं थी और सिल्वर मेडल जीती.”

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विवाद के बाद ज्योति को सिल्वर मेडल मिला था
बता दें कि एशियन गेम्स में महिलाओं की हर्डल रेस में चीन की एथलीट वू यानी और भारत की ज्योति याराजी को फाइनल राउंड में दौड़ने से रोक दिया गया था. दरअसल, ज्योति को फॉल्स स्टार्ट के लिए अयोग्य घोषित किया गया था जबकि गलती चीन की एथलीट ने की थी. बाद में ज्योति के विरोध के बाद अधिकारियों ने दोनों को प्रतिस्पर्धा की अनुमति दे दी थी.

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इसके बाद ज्योति ने रेस में हिस्सा लिया और 12.91 सेकेंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहीं थी. पहले अयोग्य घोषित की गई चीन की एथलीट ज्‍योति से आगे दूसरे स्थान पर रहीं थीं. लेकिन रेस पूरी होने के बाद भारतीय अधिकारियों ने विरोध जताया, जिसके बाद चीन की एथलीट यानी को अयोग्य घोषित कर दिया और ज्योति के पदक को रजत में अपग्रेड कर दिया गया था.

Tags: Asian Games, Athletics, Sports news

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