Home Breaking News CRPF: प्रमोशन में पिछड़े जवानों-अफसरों को शांत करने के लिए 38 नई बटालियनों का प्रस्ताव, क्या MHA देगा मंजूरी?

CRPF: प्रमोशन में पिछड़े जवानों-अफसरों को शांत करने के लिए 38 नई बटालियनों का प्रस्ताव, क्या MHA देगा मंजूरी?

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CRPF: प्रमोशन में पिछड़े जवानों-अफसरों को शांत करने के लिए 38 नई बटालियनों का प्रस्ताव, क्या MHA देगा मंजूरी?

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CRPF: Proposal of 38 new battalions to pacify the soldiers and officers lagging behind in promotion

CRPF
– फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt

विस्तार


देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल ‘सीआरपीएफ’ के जवान और अफसर, पदोन्नति के मोर्चे पर पिछड़ रहे हैं। रिस्ट्रक्चर प्लान बनता है और बिगड़ जाता है। सीआरपीएफ हेडक्वार्टर से फाइल निकलकर केंद्रीय गृह मंत्रालय में पहुंचती है। कई दफा वहां से बिना मंजूरी के फाइल वापस लौट आती है। अब दोबारा से ऐसी चर्चा जोरों पर है कि सीआरपीएफ में 38 नई बटालियन खड़ी करने का प्रस्ताव चल रहा है। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो पदोन्नति को लेकर जवानों और कैडर अफसरों में जो गुस्सा है, वह आंशिक तौर पर शांत हो सकता है। नई बटालियन कैसे खड़ी होंगी, इसका तरीका सुझाया गया है। सीआरपीएफ की कुल 246 बटालियनों से से 228 बटालियनों से ‘गोल्फ कंपनी’ को अलग कर लिया जाए। इससे लगभग 228 कंपनी निकल जाएंगी। मतलब, 38 नई बटालियन खड़ी होंगी। तकरीबन सभी रैंकों में पदोन्नति के अवसर मिलेंगे। हालांकि इसका एक बड़ा नुकसान भी है। गोल्फ कंपनी, जिसे ट्रेनिंग कंपनी के नाम से भी जाना जाता है, वह चक्र टूट जाएगा। जब रोटेशनल ट्रेनिंग नहीं होगी, तो बल के जवान खुद को अपडेट कैसे रख सकेंगे। सिविल पुलिस और अर्धसैनिक बल में क्या फर्क रह जाएगा। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्रालय इस प्रपोजल को मंजूरी देगा, इसके आसार कम ही नजर आ रहे हैं।

तो फिर सात नए ग्रुप सेंटर बनाने होंगे

बल के एक अधिकारी के मुताबिक, ऐसे प्रपोजल पहले भी बन चुके हैं। अभी तक वे धरातल पर नहीं उतर सके। अब फिर से उसी प्रपोजल की बात हो रही है। दरअसल, इस प्रपोजल के पीछे दो मुख्य बाते हैं। एक तो यह है कि इसके लिए नई भर्ती नहीं की जाती। थोड़ा बहुत खर्च बच जाता है। हालांकि भवन, गोला बारूद, वाहन और दूसरे कई कार्यों पर खर्च करना ही पड़ता है। यहां पर अगर 38 बटालियनों की बात है, तो उसके लिए लगभग सात नए ग्रुप सेंटर बनाने होंगे। दो तीन सेक्टर भी बनेंगे। संभव है एक एडीजी का पद भी बन जाए। कई कमांडेंट डीआईजी बन जाएंगे। एक ही समय पर 38 कैडर अफसरों को कमांडेंट की पदोन्नति मिल जाएगी। सेकंड इन कमांड और डिप्टी कमांडेंट को भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। इसी तरह से दूसरे रैंकों तक भी पदोन्नति पहुंचेगी।

इसलिए बनाई गई थी गोल्फ कंपनी

अधिकारी के मुताबिक, सीआरपीएफ में गोल्फ कंपनी यानी ट्रेनिंग कंपनी बहुत अहम होती है। अगर एक बटालियन में आठ कंपनी हैं, तो उनमें से एक कंपनी गोल्फ कंपनी रहती है। इसमें ट्रेनिंग का भाव रहता है। यानी सभी कंपनियों से जवान यहां आकर ट्रेनिंग करते रहते हैं। इसे ट्रेनिंग की रोटेशनल प्रक्रिया भी कहा जाता है। अब 38 नई बटालियन खड़ी करने की बात हो रही है, तो इसका मतलब सभी गोल्फ कंपनी को खत्म कर दिया जाएगा। उन्हें मिलाकर ही 38 बटालियनें बनेंगी। बल में ट्रेनिंग का अहम रोल है। नियमित ट्रेनिंग प्रक्रिया ही बल के जवानों को अर्धसैनिक बनाती है। इससे जवानों में ऊर्जा का संचार होता रहता है। वे एक्टिव रहते हैं। नए हथियार, समसामयिक चुनौतियां और सिक्योरिटी मामले में हर तरह से अपडेट रहना, ये सब बातें गोल्फ कंपनी में रहती हैं। अब यदि गोल्फ कंपनी खत्म होती है, तो उसका बल पर विपरित असर पड़ सकता है। हालांकि मौजूदा समय में बल की गोल्फ कंपनी को ट्रेनिंग का समय कम ही मिल पाता है। ड्यूटी इतनी ज्यादा रहती है कि उन्हें बहुत कम अंतराल पर एक जगह से दूसरी जगह भेज दिया जाता है। अगर इस प्रपोजल को मंजूरी मिलती है, तो बल मुख्यालय और गृह मंत्रालय को ट्रेनिंग कंपनी बाबत कोई नई व्यवस्था तैयार करनी पड़ेगी।

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