[ad_1]

Nari Shakti
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
इस समय चल रहे पांच विधानसभा चुनावों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा को घेरने के लिए विपक्ष ने ओबीसी आरक्षण का दांव चलने का प्लान बनाया है। विपक्ष के इस प्लान को ध्वस्त करने के लिए भाजपा ने महिला मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई है। पार्टी का मानना है कि यदि महिलाओं को छूने वाले मुद्दे उनके सामने रखे जाएं, तो महिला मतदाता जातिगत-धर्मगत सोच से ऊपर उठकर वोट देती हैं। पार्टी इसके पहले भी तीन तलाक, प्रधानमंत्री आवास योजना और राशन योजनाओं के सहारे महिलाओं को अपने साथ सफलतापूर्वक जोड़ चुकी है। अब इसी सोच को ज्यादा मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी है।
भाजपा की समस्या
भाजपा की असली परेशानी यह है कि राहुल गांधी ने जातिगत आंकड़ों को नौकरियों से जोड़ना शुरू कर दिया है। वे बार-बार जातिगत संख्या के आधार पर सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी की बात उठा रहे हैं। विपक्ष के कई दल इसके लिए आरक्षण की ऊपरी सीमा को तोड़ने की बात भी कर रहे हैं। सरकारी नौकरियों के प्रति लोगों के आकर्षण को देखते हुए यह दांव बहुत कारगर साबित हो सकता है। विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा सहित उन राज्यों में जहां गरीबी-पिछड़ापन ज्यादा है, और सरकारी नौकरी लोगों की आजीविका के एक बड़े साधन के तौर पर देखी जाती है, वहां यह मुद्दा पिछड़े-दलित जाति के लोगों को विशेष तौर पर आकर्षित कर सकता है।
भाजपा ने इन राज्यों में विकास योजनाओं, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों के सहारे अच्छी पैठ बनाई है। उसका यह समीकरण इतना कारगर रहा है कि जातिगत राजनीति करने वाले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों का परंपरागत वोट बैंक भी टूट गया है और भाजपा को इस वोट बैंक में सेंध लगाने में सफलता मिली है। लेकिन भाजपा की चिंता है कि जातिगत आंकड़ों के सहारे पूरा मामला एक बार फिर नब्बे के उस दौर की ओर लौट सकता है जहां मंडलवादी राजनीति ने उसकी बढ़ती राहों को रोक लिया था।
[ad_2]
Source link