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Russia-Ukraine War: यूक्रेन की युद्ध के बीच बढ़ी अचानक टेंशन, रूस नहीं इस मुल्क ने दिया दर्द

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Russia-Ukraine War: यूक्रेन की युद्ध के बीच बढ़ी अचानक टेंशन, रूस नहीं इस मुल्क ने दिया दर्द

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यूक्रेन युद्ध ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है. दोनों तरफ से जमकर ड्रोन हमले किए गए हैं.  हालाँकि, अब ड्रोन की स्पलाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. दरअसर चीन ने ड्रोन निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. बीबीस की रिपोर्ट के मुताबिक युद्द में इस्तेमाल होने वाले अधिकतर ड्रोन व्यावसायिक रूप से चीन में बनाए गए हैं. लड़ाई में बड़ी संख्या में ड्रोन खत्म हो चुके हैं ऐसे में नई सप्लाई की जरुरत है. लेकिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यूक्रेन और रूस दोनों को चीनी ड्रोन और इसके पार्ट्स की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

लंदन स्थित थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (रूसी) के अनुसार, यूक्रेन को हर महीने लगभग 10,000 ड्रोन का नुकसान हो रहा है. यूक्रेनी सेना को अपनी सप्लाई बहाल करने में मदद करने के लिए दान पैसे का उपयोग करने में कई स्वयंसेवी समूहों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

क्या हैं चीन के लगाए नए प्रतिबंध
चीनी सरकार द्वारा लगाए गए नवीनतम प्रतिबंध 1 सितंबर को लागू हुए. ये प्रतिबंध 4 किलोग्राम से अधिक वजन वाले लंबी दूरी के ड्रोन के साथ-साथ कुछ कैमरों और रेडियो मॉड्यूल जैसे ड्रोन से संबंधित उपकरणों पर भी लागू होते हैं.

ऐसे इक्विपमेंट्स के चीनी उत्पादकों को अब एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा और एंड-यूजर्स सर्टिफिकेट देना होगा. वहीं बीजिंग में सरकार का कहना है कि वाणिज्यिक चीनी ड्रोन का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए. बता दें चीनी सरकार ने यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा नहीं की है.

यूक्रेनी वॉलंटियर्स और सैनिकों का कहना है कि लेटेस्ट चीनी प्रतिबंधों का अब तक ड्रोन की उपलब्धता पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. हालांकि, उनका कहना है कि पार्ट्स की सप्लाई प्रभावित हुई है और उन्हें यह भी डर है कि भविष्य में स्थिति और खराब हो सकती है.

‘भविष्य में हम क्या करेंगे यह स्पष्ट नहीं’
सेना को ड्रोन सप्लाई करने वाले सबसे बड़े यूक्रेनी स्वयंसेवी ग्रुप में से एक, डिग्निटास की चीफ ल्यूबा शिपोविच कहती हैं, ‘अभी के लिए एकमात्र बदलाव यह है कि हम यूरोपीय गोदामों में जो भी स्टॉक बचा है उसे ज्यादा से ज्यादा खरीद रहे हैं लेकिन भविष्य में हम क्या करेंगे यह स्पष्ट नहीं है.’  वह विशेष रूप से थर्मल इमेजिंग कैमरे जैसे पार्ट्स की उपलब्धता को लेकर चिंतित है.

कैस्टस कलिनौस्की रेजिमेंट के एक वरिष्ठ ड्रोन ऑपरेटर का कहना है, ‘असर प्रभाव महसूस किया जा रहा है. चीन द्वारा लाइसेंस जरूरी करने के कारण अब ड्रोन के पार्ट्स तक यूक्रेन की पहुंच सीमित हो गई है, लेकिन हम इस कोशिश में लगे हैहैं कि हमारे ड्रोन पहले की तरह काम करें, इसके लिए हम रास्ते तलाश रहे हैं.

रूसी और यूक्रेनी दोनों सेनाओं के लिए ड्रोन खरीदने वाले वॉलंटियर्स के सामने आने वाली नवीनतम बाधा है.

शिपोविच के अनुसार, यूरोप में वितरकों को उपलब्ध कराए गए चीनी ड्रोन की संख्या में अगस्त और सितंबर 2022 के बीच तेजी से गिरावट आई है.

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक जांच में पाया गया कि चीनी कंपनियों ने हाल के महीनों में यूक्रेनियन को ड्रोन और पार्ट्स की बिक्री में कटौती की है. लेकिन सिर्फ यूक्रेन ही प्रभावित नहीं हो रहा है.

1 सितंबर को लागू हुए चीनी प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए, रूसी अखबार कोमर्सेंट ने कहा, ‘चीनी अधिकारियों द्वारा ड्रोन निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने रूस को उनकी सप्लाई को गंभीर रूप से जटिल बना दिया है और थर्मल इमेजिंग कैमरे जैसे कुछ पार्ट्स की कमी हो गई है.’

सीधी सप्लाई के अभाव में, रूस के खरीदार अक्सर कजाकिस्तान जैसे देशों में चीनी ड्रोन की खरीदारी करते हैं. हालांकि कोमर्सेंट के अनुसार, मध्य एशियाई राज्य ने अपने ड्रोन इंपोर्ट नियमों को कड़ा करके उनके लिए चीजों को और अधिक जटिल बना दिया है.

चीनी प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने के लिए, यूक्रेनी वॉलंटियर्स अन्य देशों में बने विकल्पों की तलाश में व्यस्त हैं. इसके अलावा वे यूक्रेन में भी संभावना तलाश रहे हैं.

ड्रोन खरीदने में मदद करने वाले अनातोली पोलकोवनिकोव का कहना है कि एक यूक्रेनी स्टार्ट-अप ड्रोन मोटर्स का प्रॉडक्शन शुरू करने की तैयारी कर रहा है.  उनका कहना है कि वह भविष्य को लेकर आशावादी हैं. उनके मुताबिक, ‘मुझे नहीं लगता कि इन चीनी प्रतिबंधों का सामान्य स्थिति पर कोई प्रभाव पड़ेगा. मुझे लगता है कि लंबे समय में वे यूक्रेन में प्रॉडक्शन को प्रोत्साहित करेंगे.’

यूक्रेन युद्ध पहली ऐसी जंग है जिसमें ड्रोन का इतने बड़े पैमाने पर और इतनी बड़ी संख्या में उपयोग किया गया है. कीव और मॉस्को इसे इसी तरह बनाए रखने चाहते हैं.  

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