Home World Israel Hamas War: UN महासचिव की किस नसीहत से भड़क गया इजरायल? मांग लिया पद से इस्तीफा

Israel Hamas War: UN महासचिव की किस नसीहत से भड़क गया इजरायल? मांग लिया पद से इस्तीफा

0
Israel Hamas War: UN महासचिव की किस नसीहत से भड़क गया इजरायल? मांग लिया पद से इस्तीफा

[ad_1]

Israel attacks UN Secretary General Antonio Guterres: इजरायल, हमास से बदले की आग में जल रहा है और गाजा, इजरायल के हमलों की आग में सुलग रहा है. ये आग रोजाना गाजा के सैकड़ों लोगों की जान ले रही है, लेकिन इजरायल किसी की सुनने को तैयार नहीं है. उसका सिर्फ एक ही मकसद है हमास का संपूर्ण विनाश. अपने इस मकसद के लिए इजरायल किसी भी हद से गुजर जाने के लिए तैयार है. इस वक्त इजरायल को ना किसी के मानवाधिकारों की फिक्र है. जो भी गाजा पर इजरायल के हमलों पर सवाल उठा रहा है, इजरायल उसकी बोलती बंद कर रहा है. अब इजरायल के इस क्रोध का शिकार बना है संयुक्त राष्ट्र और उसके महासचिव एंटोनियो गुटेरेस.

इजरायल ने यूएन चीफ को क्यों सुनाई खरी-खरी?

संयुक्त राष्ट्र की 24 अक्टूबर को सुरक्षा परिषद की बैठक हुई. बैठक में शामिल देशों के प्रतिनिधियों ने इजरायल-हमास युद्ध पर अपना-अपना Stand Clear किया. अमेरिका ने गाजा पर इजरायल के हमलों का समर्थन किया. ईरान, जॉर्डन, मिस्र ने इजरायल के हमलों की निंदा की लेकिन संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक ऐसी बात बोल दी जो इजरायल को बुरी तरह चुभ गई. इजरायल के विदेश मंत्री और राजदूत ने भरी सभा में हंगामा मचा दिया. पहले संयुक्त राष्ट्र को खूब खरी-खोटी सुनाई और फिर सीधे UN महासचिव का इस्तीफा ही मांग लिया.

तो आखिर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने ऐसा क्या कह दिया जिससे इजरायल नाराज हो गया और संयुक्त राष्ट्र को बहुत बुरा सुना दिया. इन सारे सवालों के जवाब आपको हमारी इस रिपोर्ट में मिलेंगे. 

गुटेरेस के इस बयान से भड़का इजरायल

गुटेरेस ने हमास के हमले को ही जस्टिफाई करने वाला बयान दे दिया. कह दिया है कि हमास ने इजरायल पर जो हमला किया, वो अचानक नहीं हुआ. गुटेरेस ने बिना नाम लिए इजरायल को ही हमास के हमले का जिम्मेदार बता दिया.  इजरायल पर हमास के आतंकवादी हमले की निंदा करने में हिचकिचाहट महसूस करने वाले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इजरायल को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का पाठ पढ़ाया. तो इजरायल ने भी दो टूक शब्दों में बता दिया कि इजरायल, अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहा है और ये जंग तब तक नहीं रुकेगी. जब तक इजरायल, हमास का अस्तित्व नहीं मिटा देगा.

गुटेरेस के इस बयान का मतलब समझिए. इसके जरिए वे कहना चाह रहे थे कि गाजा पट्टी में इजरायल पिछले 56 वर्षों से अत्याचार कर रहा है. गाजा पट्टी में जो भुखमरी, जो गरीबी है, वो सब इजरायल की वजह से है. 

दरअसल संयुक्त राष्ट्र महासचिव को शायद पता ही नहीं है कि वर्ष 2005 से ही गाजा पट्टी, इजरायल के नियंत्रण से पूरी तरह बाहर है. गाजा पट्टी में हमास की सरकार चलती है. जिसे पूरी दुनिया से हर साल करोड़ों डॉलर्स की मदद मिलती है. जिसका इस्तेमाल हमास, इजरायल पर हमले करने के लिए करता है.  बैठक में मौजूद इजरायल के विदेश मंत्री एली कोहेन ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस के मनगढ़ंत आरोपों की खड़े खड़े ही हवा निकाल दी. 

हमास के खिलाफ क्यों नहीं बोलते गुटेरेस?

कहते हैं कि अन्याय के खिलाफ चुप रहना भी अन्याय का साथ देना होता है . इजरायल-हमास युद्ध में संयुक्त राष्ट्र महासचिव भी यही कर रहे हैं. गुटेरेस को गाजा में इजरायल के हमलों में मारे जा रहे लोग तो दिख रहे हैं लेकिन इजरायल पर हमास के हमले में मारे गए लोग क्यों नहीं दिख रहे. संयुक्त राष्ट्र को गाजा के लोगों की इतनी ही ज्यादा फिक्र है तो वो हमास को क्यों नहीं कहता कि वो इजरायल के बंधकों को छोड़ दे. अगर संयुक्त राष्ट्र इतना भी नहीं कर सकता तो उसके होने का क्या मतलब है? यही बात कहते हुए संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत ने गुटेरेस का इस्तीफा मांग लिया. 

युद्ध कभी एकतरफा नहीं होता और ना ही युद्ध को खत्म करने की जिम्मेदारी एक पक्ष की होती है. लेकिन इजरायल का Concept एकदम क्लियर है. वो हमास के हमले का बदला लेगा और पूरा लेगा. हमास ने उसे छेड़ा है और अब इजरायल हमास को छोड़ेगा नहीं. फिर चाहे कोई उसके साथ हो, या ना हो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है.

इजरायल ने चुना दूसरा विकल्प

इजरायल के हमलों में गाजा के नागरिक मारे जा रहे हैं, जिसे जायज नहीं ठहराया जा सकता. लेकिन हमास ने जिस क्रूरता और बर्बरता के साथ इजरायल में आतंकी हमला किया. उसके बाद इजरायल के पास दो ही विकल्प थे. पहला, वो इस आतंकी हमले को सहन करके चुप रहता और दूसरा, हमले का ऐसा जवाब देता कि हमास दोबारा ऐसा हमला करने की हिम्मत ही ना जुटा पाता. 

इजरायल ने इसमें से दूसरा विकल्प चुना है और अब वो हमास को खत्म कर देने की लड़ाई में जिस हद तक पहुंच चुका है. वहां से वापस लौटने का कोई विकल्प ही नहीं बचा है. इजरायल अच्छी तरह जानता है कि अगर आज उसने गाजा के बारे में सोचकर रहम दिखाया तो कल दोबारा हमास, इजरायल में लोगों का कत्लेआम मचाएगा और इजरायल किसी भी कीमत पर दोबारा ऐसा नहीं होने देना चाहेगा. 

जेलेंस्की भी दिखा चुके हैं आइना

इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र को आईना दिखा दिया है, जो गाजा पर हमलों के लिए इजरायल को दोषी ठहरा रहा है लेकिन इजरायल पर हुए आतंकवादी हमले के दोषी हमास के लिए Soft Corner दिखा रहा है. वैसे ये कोई पहली बार नहीं हुआ है. रूस-यूक्रेन जंग में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र संघ में झूठे लोग बैठते हैं, जो कुछ देशों के गलत काम को सही ठहराने का काम करता है. 

अब इजरायल-हमास जंग में भी संयुक्त राष्ट्र, हमास के गलत काम को सही ठहराने और इजरायल के हमलों को गलत बताने में जुटा है. इतिहास गवाह है कि अपनी इसी सोच के चलते, संयुक्त राष्ट्र संघ आज तक किसी भी जंग को नहीं रोक पाया है. कुछ उदाहरण आपको बताते हैं. 

रूस-यूक्रेन जंग

संयुक्त राष्ट्र संघ में युद्ध रोकने और रूस पर एक्शन लेने के लिए कई बार प्रस्ताव आए लेकिन दोनों देशों के बीच अब भी जंग जारी है.

वियतनाम-अमेरिका युद्ध

ये युद्ध संयुक्त राष्ट्र के गठन के दस साल बाद, वर्ष 1955 में शुरु हुआ. दस साल चले युद्ध में वियतनाम के 20 लाख आम नागरिक मारे गए लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ, अमेरिका को वियतनाम पर हमले करने से नहीं रोक पाया.

इराक-ईरान युद्ध

वर्ष 1980 में शुरु हुआ ये युद्ध आठ सालों तक चला, जिसमें 10 लाख लोग मारे गए. दुनिया के दो देशों के बीच ये पहला युद्ध था जिसमें रसायनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ लेकिन इस युद्ध को रोकने में भी संयुक्त राष्ट्र संघ पूरी तरह नाकाम रहा.

भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे कश्मीर विवाद में भी संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका संदेह के घेरे में रहती है. वर्ष 2021 में संयुक्त राष्ट्र संघ में एक संबोधन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका और मंशा पर सवाल उठाया था और संयुक्त राष्ट्र संघ की विफलता के लिए उसकी वीटो पॉलिसी को जिम्मेदार बताया था.

संयुक्त राष्ट्र की विफलता का जिम्मेदार कौन?

अभी अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस को संयुक्त राष्ट्र संघ में वीटो पावर हासिल है. यही पांच देश, संयुक्त राष्ट्र संघ में अपना दबदबा रखते हैं. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ की विफलता की एक वजह कमजोर नेतृत्व भी है, जो सही वक्त पर फैसले नहीं ले पाता है. 

जानकार मानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र संघ अब एक दिशाहीन संगठन बन चुका है . पहले रूस-यूक्रेन युद्ध और अब इजरायल-हमास युद्ध, सवाल पूछा जा रहा है कि जिस संगठन की स्थापना ही दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए हुई थी, वो संगठन..जब किसी युद्ध या विवाद को सुलझा ही नहीं पाता तो उसके होने का मतलब क्या है .

.

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here