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Jordan Resolution in UN General Assembly: इजरायल-हमास के बीच चल रही जंग में मुस्लिम मुल्कों की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पास किया है. जॉर्डन के प्रस्ताव पर यूएन जनरल असेंबली में 120 देशों ने अपना समर्थन दिया, जबकि 14 देश इसके विरोध में रहे. वहीं 45 देशों ने मतदान से दूरी बनाई. वहीं इजरायल ने इस प्रस्ताव का मखौल उड़ाते हुए कहा कि उसमें हमास और बंधक बनाए गए इजरायली नागरिकों का कोई जिक्र ही नहीं है. ऐसे में इस प्रस्ताव के पास होने का कोई मतलब नहीं बनता है.
इन देशों में विरोध में दिया वोट
यूएन जनरल असेंबली (UN General Assembly) में अडॉप्ट किए गए इस रिजॉल्यूशन में गाजा में आम नागरिकों की सुरक्षा और जंग के दौरान मानवीय-कानूनी बाध्यताएं पूरी करने की बात कही गई है. इस प्रस्ताव के फेवर में सारे मुस्लिम मुल्क एकजुट रहे. वहीं जिन देशों ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोट डाले, उनमें अमेरिका, इजरायल, ऑस्ट्रिया, क्रोशिया, चेचिया, फिजी, ग्वाटेमाला, हंगरी, मार्शल आईलैंड, माइक्रोनेशिया, नोउरु, पापुआ न्यू गिनी, पराग्वे और टोंगा के नाम शामिल हैं. इस प्रकार प्रस्ताव 120-14 के अंतर से पास हो गया.
‘आप आतंकियों के फेवर में क्यों खड़े हो’
वहीं प्रस्ताव पास होने के बाद इजरायल (Israel Hamas War) जमकर यूएन पर बरसा. यूएन में इजरायल के स्थाई प्रतिनिधि गिलाड एर्डन ने कहा, ‘आप निर्दोषों को मारने वाले हत्यारों के फेवर में क्यों खड़े हो. आप आतंकियों को क्यों बचा रहे हो. यहां पर क्या हो रहा है.’ इजरायली राजदूत ने अपनी खुली नाराजगी जताते हुए कहा, यह यूएन (UN General Assembly) और समूचे मानव इतिहास के लिए काला दिन है.’
‘आत्मरक्षा करना इजरायल का अधिकार’
इजरायली राजदूत ने साफ कहा कि गाजा में शांति तब तक स्थापित नहीं हो सकती, जब तक वहां से हमास को साफ नहीं कर दिया जाता. इसके लिए गाजा में जमीन के नीचे बने सुरंगों के जाल को बर्बाद करना होगा. इजरायल इस काम को करके रहेगा. अपनी आत्मरक्षा करना उसका अधिकार है और यह उसे किसी भी हालत में नहीं छोड़ने वाला.
भारत ने अपनाया ये रुख
वहीं जॉर्डन के प्रस्ताव पर भारत ने अपनी नीति के अनुसार शांत और संतुलित प्रतिक्रिया व्यक्त की. यूएन में भारत की डिप्टी-परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव योजना पटेल ने कहा, सभी पक्षों के लिए यह जरूरी है कि वे जिम्मेदारी भरे व्यवहार का परिचय दें. हम उम्मीद करते हैं कि यह असेंबली आतंक और हिंसा के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश भेजेगी.
रिजॉल्यूशन का क्या होगा असर?
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक यूएन जनरल असेंबली (UN General Assembly) का रिजॉल्यूशन एक सलाह की तरह होता है. उसे लागू करवाने की बाध्यकारी वैधानिक शक्ति असेंबली के पास नहीं होती है. चार्टर के मुताबिक यह शक्ति केवल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दी गई है. UNSC में पारित प्रस्तावों को मानना सभी सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होता है, जिसे लागू न करने पर दोषी राष्ट्र के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. ऐसे में इजरायल पर इस प्रस्ताव का शायद ही कोई असर पड़ेगा.
क्या रुक जाएगा इजरायल का अभियान?
इजरायल (Israel Hamas War) ने इसका संकेत भी दे दिया है. उसकी थल सेना ने टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों के जरिए गाजा में ग्राउंड ऑपरेशन तेज कर दिया है. हालांकि अभी फुल स्केल जमीनी युद्ध शुरू नहीं किया गया है लेकिन चिह्नित ठिकानों पर स्पेशल रेड करके हमास के आतंकियों की कमर तोड़ी जा रही है. उत्तर गाजा में इजरायली सेना के टैंक और फाइटर जेट लगातार हमास के ठिकाों को निशाना बना रहे हैं. वहीं इजरायली सेना के मुख्य प्रवक्ता ने बताया कि गाजा के ऑपरेशन वाले इलाकों में आतंकियों के कम्युनिकेशन को ठप करने के लिए इंटरनेट और मोबाइल फोन सर्विस को पूरी तरह काट दिया गया है.
(एजेंसी भाषा)
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