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दोपहर 12:52 बजे
( सीन : रिपोर्टर टिकट पाने के बहाने विंडो पर पहुंचा। वहां वही जवाब मिला जो सबको मिल रहा था-ऑफलाइन टिकट नहीं मिल रहे हैं। रिपोर्टर बड़बड़ाते हुए वहां से हटा-इतनी जद्दोजहद कर ली, एक टिकट नहीं मिल पा रहा है। गेट के पास खड़े दो-तीन लोग यह बात सुनते हैँ और पास बुलाते हैं।)
रिपोर्टर : यार खूब परेशान हो लिए कहीं टिकट नहीं मिल पा रहा।
दलाल : भाई टिकट तो हमें भी नहीं मिल रहे। पर, कुछ लोग ब्लैक में बेच रहे हैं। आप चाहो तो…।
रिपोर्टर : कौन है? आप बता सकते हैं क्या?
दलाल : उसने लाल शर्ट पहने दाढ़ी वाले एक युवक की ओर इशारा किया। (इस पर रिपोर्टर लाल शर्ट वाले युवक के पास पहुंचे और टिकट के बारे में पूछा। )
एजेंट : मैं तो खुद बिहार से मैच देखने आया हूं। फिर भी आपको कितने चाहिए। मेरे पास चार (टिकट) हैं। एक टिकट नीचे की पंक्ति का है। दस हजार (वास्तविक कीमत 21 सौ रुपये) में इसे आपको दे सकता हूं। ऊपर की पंक्ति वाले टिकट छह हजार (वास्तविक कीमत डेढ़ हजार) में मिल जाएंगे।
रिपोर्टर : हमें तो दस हजार वाला दे दो। पेमेंट कैसे लोगे?
एजेंट : चाहे कैश दे दो, चाहे ऑनलाइन कर दो।
रिपोर्टर : ओके, मैं ऑनलाइन पेमेंट कर देता हूं। (टिकट ब्लैक करने वाले ने क्यूआर कोड दिया। जिस खाते में पैसे नहीं थे उसे पेमेंट करने का नाटक किया। ट्रांजेक्शन फेल्ड का मैसेज आ गया। मैसेज दिखाते हुए कहा-छह हजार रुपये ही कैश हैं। बाकी कैसे दूं।)
एजेंट : कोई बात नहीं। आप पैसे का इंतजाम कर लीजिए। शाम तक मिल लीजिएगा। टिकट मिल जाएगा। ( इसके बाद वह दूसरे लोगों से संपर्क में जुट गया।)
दोपहर 1: 16 बजे
सीन दो
(सीन : गेट के पास लगी टीशर्ट, टोपियों की दुकानों पर काली टीशर्ट पहने एक युवक खड़ा था। यह युवक काउंटर से मायूस होकर लौटने वालों को बुला रहा था। उनसे टिकट का सौदा कर रहा था)
रिपोर्टर : भाई मुझे भी टिकट दिलवा दो।
एजेंट : कितने चाहिए?
रिपोर्टर : चाहिए तो एक ही।
एजेंट : 12 हजार (वास्तविक कीमत 21 सौ रुपये) दीजिए।
रिपोर्टर : थोड़ा कम में कर दो।
एजेंट : (उसने पीली शर्ट पहने अपने साथी की ओर इशारा करते हुए कहा-सस्ता चाहिए तो शुभम (टिकट ब्लैक करने वाला दूसरा एजेंट) से ले लो।)
रिपोर्टर : शुभम (टिकट ब्लैक करने वाला दूसरा एजेंट) भाई एक टिकट चाहिए।
शुभम : भाई, 14 हजार लूंगा।
रिपोर्टर : काली टीशर्ट वाले भाई साहब तो 12 (हजार) में ही तैयार थे। उन्होंने कहा कि आप सस्ता दोगे।
शुभम : भाई हमें ही महंगा मिला है, तो आपको कैसे सस्ता दे सकता हूं।
रिपोर्टर : आधे घंटे का समय दीजिए। रुपये का इंतजाम कर लूं। ( इस पर वह वहां से चला गया।)
दोपहर 1:40 बजे
(गेट नंबर दो पर ही सफेद टीशर्ट पहने दलाल लोगों को खुलेआम ब्लैक में टिकट बेच रहा था।)
रिपोर्टर : मुझे भी एक टिकट चाहिए।
एजेंट : डेढ़ हजार वाला छह हजार में दूंगा। चाहिए तो बताओ।
रिपोर्टर : यह तो बहुत ज्यादा है।
एजेंट : 20 दिन पहले मैंने खरीदा था। मुझे भी महंगा ही मिला था। इससे कम पर दूंगा तो मुझे कुछ नहीं बचेगा।
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