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कुमाऊं में अंधेरे में छात्रों का भविष्य: सरकारी स्कूलों में नहीं हैं शिक्षक, 744 प्रधानाचार्य पद भी खाली

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कुमाऊं में अंधेरे में छात्रों का भविष्य: सरकारी स्कूलों में नहीं हैं शिक्षक, 744 प्रधानाचार्य पद भी खाली

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4695 posts of teachers in government schools of Kumaon are vacant

कुमाऊं के सरकारी स्कूल।
– फोटो : अमर उजाला



विस्तार


उत्तराखंड गठन से पहले उत्तर प्रदेश के जमाने में बेशक नए स्कूल न खुले हों, लेकिन स्कूल बंद भी नहीं हुए। इसके उलट राज्य बनने के 23 साल बाद की तस्वीर सरकारी शिक्षा के हिसाब से बेहतर नहीं कही जाएगी। कुमाऊं में जो 511 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं उसकी वजह छात्र संख्या शून्य होना या इन विद्यालयों में 10 से कम छात्रों का होना।

सवाल ये है कि हम इन स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या क्यों नहीं बढ़ा पाए। शिक्षा विभाग के आंकड़ों से स्पष्ट है कि सिर्फ और सिर्फ संसाधनों का अभाव ही सरकारी शिक्षा के स्तर को नीचे ले गया है। स्कूलों में न शिक्षक हैं न प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य और ना ही ढंग के स्कूल भवन। कई जगह तो जर्जर स्कूलों में बच्चे जान जोखिम में डालकर अपना भविष्य गढ़ने के लिए मजबूर हैं।

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल और इंटर कॉलेज में शिक्षकों के 4685 तो प्रधानाध्यापकों व प्रधानाचार्यों के 744 पद रिक्त हैं। उच्च शिक्षा का भी यही हाल है। जगह-जगह नए महाविद्यालय तो खोल दिए गए, लेकिन उनमें सभी विषय नहीं हैं। जहां विषय हैं भी तो वहां प्राध्यापकों का अभाव है। कई महाविद्यालय तो किराये के भवनों में चल रहे हैं। कुछ महाविद्यालय ऐसे भी हैं जिनके अपने भवन बन चुके हैं, लेकिन सड़क के अभाव में वे वहां शिफ्ट नहीं हो पा रहे हैं।

 

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