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Artificial intelligence (AI): क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मानव सभ्यता के अस्तित्व को वाकई खतरे में डाल सकता है? ये सवाल इसलिए क्योंकि ब्रिटेन (UK) में आयोजित दुनिया के पहले वैश्विक AI सुरक्षा शिखर सम्मेलन में दिग्गज हस्तियों ने महामंथन किया. जहां AI की संहारक क्षमता से मानवता को बचाने के लिए बड़े फैसले लिए गए हैं. AI को लेकर सुरक्षा शिखर सम्मेलन के पहले दिन 28 देशों और यूरोपियन यूनियन ने बैलेचले घोषणापत्र (Bletchley Declaration) पर दस्तखत किए.
‘अगली पीढ़ी और मानवता को बचाना है’: ऋषि सुनक
घोषणापत्र के मुताबिक इससे जुड़ा कोई टेस्ट सेंटर ब्रिटेन में नहीं होगा. सभी देश AI सिक्योरिटी रिसर्च पर एक साथ काम करने के लिए सहमत हुए. इस बहुत तखास आयोजन में अमेरिका (US) और ब्रिटेन (UK) नए नियमों को विकसित करने में अग्रणी बनने के लिए कंपटीशन करते नजर आए. इस समिट को संबोधित करते हुए ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक ने कहा, ‘हमारे बच्चों और पोते-पोतियों के भविष्य के लिए AI जैसी तकनीकी प्रगति से अधिक परिवर्तनकारी कुछ भी नहीं होगा. इसके साथ ही हम सभी पर ये सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी है कि AI सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से विकसित हो, और इस प्रॉसेस में इससे पैदा होने वाले खतरों को पहले से पहचान लिया जाए.’
हथियारों की होड़ में नहीं माने क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर मानेंगे?
दरअसल तकनीक को लेकर लंबे समय से दुनिया के सभी देशों के बीच होड़ मची है. चीन और अमेरिका के अलावा चीन और यूरोपीय देशों के बीच प्रतिद्वंदिता छिपी नहीं है. इसी तरह से अमेरिका और रूस की अदावत भी जग जाहिर है. दुनिया कई धड़ों में बंटी है. एटम बम हो या केमिकल वेपंस या फिर जैविक हथियार इस समिट में शामिल हुए अधिकांश बड़े देश ऐसे विनाशकारी हथियार बनाने की होड़ में दशकों से एक दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ में विनाशलीला रच रहे हैं. कोरोना को भी चीन का बॉयो वेपन कहा गया था. ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या वाकई ये देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को पूरी मानवता के लिए खतरा मानते हुए एक मंच पर आकर जो कुछ कह रहे हैं, उस पर खरे उतर सकेंगे.
टेक जाइंट्स की राय
इस समिट में टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों ने भी शिरकत की. इस दौरान टेस्ला के CEO और ‘X के मालिक एलन मस्क ने कहा, ‘AI मानव सभ्यता के अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है. हालांकि इस बात की संभावना ना के बराबर है कि AI हम सभी को मार डालेगा. मुझे लगता है कि यह धीमा चल रहा है, कुछ मौके भी हैं. लेकिन, यह मानव सभ्यता की नाजुकता से भी जुड़ा है. अगर आप इतिहास का अध्ययन करेंगे तो आपको पता चलेगा कि हर सभ्यता का एक तरह का जीवनकाल होता है.’ इसी तरह सोशल मीडिया कंपनी के प्रमुख निक क्लेग ने कहा, ‘AI से जुड़ी मौजूदा समस्याओं के समाधान के लिए जितना जरूरी हो, उतना समय निवेश करते हुए इस दिशा में काम किया जाएगा. AI जनित कंटेट की पारदर्शिता और उसकी क्षमता पर काम करेंगें.’
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