Home World Nandini Das: मुगल बादशाह जहांगीर और भारत में इंग्लैंड के पहले राजदूत थॉमस रो की कहानी, इंग्लैंड ने किया सलाम

Nandini Das: मुगल बादशाह जहांगीर और भारत में इंग्लैंड के पहले राजदूत थॉमस रो की कहानी, इंग्लैंड ने किया सलाम

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Nandini Das: मुगल बादशाह जहांगीर और भारत में इंग्लैंड के पहले राजदूत थॉमस रो की कहानी, इंग्लैंड ने किया सलाम

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British Empire: भारत में जन्मी लेखिका नंदिनी दास को ब्रिटिश अकादमी बुक प्राइज 2023 पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है. नंदिनी को यह पुरस्कार उनकी पुस्तक ‘कोर्टिंग इंडिया: इंग्लैंड, मुगल इंडिया एंड द ओरिजिन्स ऑफ एम्पायर’ को लेकर ग्लोबल कल्चरल अंडरस्टैंडिंग के लिए लिए दिया गया है. यह एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गैर-गल्प पुरस्कार है, जिसमें इनाम के तौर पर 25,000 पाउंड की राशि दी जाती है. 

बता दें कि 49 वर्षीय नंदिता दास ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं. उनकी किताब में ‘मुगल दरबारों में इंग्लैंड के पहले राजनयिक अभियान के माध्यम से बताई गई ब्रिटेन और भारत की सच्ची मूल कहानी’ को बताया गया है. 

लेखिका नंदिनी दास के अनुसार, यह किताब उस आधार पर है, जिस पर ब्रिटेन की खुद की उन्नत नौसेना राष्ट्र के रूप में दृष्टिकोण को शताब्दियों तक स्थापित किया जाता है. 1570 में पोप पियस वी द्वारा ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम का अवमानना हुआ था, जिससे अंग्रेजों को कैथोलिक यूरोप के साथ व्यापार करने में समस्या हो रही थी और वे नए बाजारों की खोज में बेहद उत्सुक थे. ऐसे में थॉमस रो 1615 में मुगल बादशाह जहांगीर के दरबार में अंग्रेजी राजदूत के रूप में कार्य करना शुरू करते हैं. 

नंदिता दास ने 17वीं शताब्दी में भारत में इंग्लैंड के पहले राजदूत सर थॉमस रो के आगमन की कहानी के माध्यम से साम्राज्य की उत्पत्ति पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की कोशिश की है. नंदिता दास की इस उपलब्धि पर 
जूरी प्रमुख प्रोफेसर चार्ल्स ट्रिप ने कहा कि ‘भारत और ब्रिटेन की राजनीतिक हस्तियों, अधिकारियों और व्यापारियों के समकालीन स्त्रोतों का उपयोग कर, उन्होंने कहानी को एक अद्वितीय तात्कालिकता दी है, जो इस दौरान हुई शुरुआती गलतफहमियों को जीवंत कर देती है.’

बता दें कि ब्रिटेन स्थित लेखिका का नाम मंगलवार शाम को लंदन में ब्रिटिश अकादमी के एक समारोह में विजेता के रूप में घोषित किया गया. ब्रिटिश अकादमी बुक पुरस्कार की स्थापना वर्ष 2013 में गैर-गल्प साहित्य के क्षेत्र में सर्वोत्तम कार्य को पुरस्कृत करने के लिए की गई थी और इसे पूर्व में नायेफ अल-रोडेन पुरस्कार के नाम से जाना जाता था.

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