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India Italy Ties: विदेश मंत्री बोले, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इटली और यूरोपीय संघ की ‘अधिक रुचि’ स्वागत योग्य

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India Italy Ties: विदेश मंत्री बोले, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इटली और यूरोपीय संघ की ‘अधिक रुचि’ स्वागत योग्य

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EAM Jaishankar Italy EU Greater Interest in Indo-Pacific region stabilising factor

विदेश मंत्री जयशंकर
– फोटो : ANI



विस्तार


इटली दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में इटली और यूरोपीय संघ की ‘अधिक रुचि’ का स्वागत किया। उन्होंने शुक्रवार को रेखांकित किया कि दुनिया के हर कोने में रुचि लेना वैश्विक दुनिया में महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्री ने इटली दौरे के दौरान सीनेट के विदेश मामलों और रक्षा आयोग के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। उन्होंने देश की विदेश नीति का जिक्र करते हुए बताया कि भारत आज दुनिया को कैसे देखता है।

भारत और इटली के बीच अहम समझौते

विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने इतालवी समकक्ष एंटोनियो तजानी के साथ बैठक की। इसके बाद श्रमिकों, छात्रों और पेशेवरों की निर्बाध आवाजाही को सक्षम करने के लिए भारत और इटली के बीच गतिशीलता और प्रवासन साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर पोस्ट किया, आज शाम एंटोनियो ताजानी के साथ एक व्यापक और सार्थक बैठक की। उन्होंने लिखा, “हमारी रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के बारे में बातचीत हुई। इस बात पर सहमति हुई कि कृषि-तकनीक, नवाचार, अंतरिक्ष, रक्षा और डिजिटल डोमेन में संभावनाएं टटोली जानी चाहिए।” उन्होंने कहा, “हमारी बातचीत के अंत में गतिशीलता और प्रवासन साझेदारी समझौते और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किए गए।”

जयशंकर इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष पर भी बोले

इटली की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे जयशंकर ने कहा, “हम बहुत स्पष्ट रूप से देख रहे हैं कि आने वाला समय बहुत कठिन है। आने वाला समय बहुत अशांत है।” बता दें कि पिछले साढ़े चार साल में विदेश मंत्री के रूप में जयशंकर चौथी बार इटली पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि भारत मध्य पूर्व (इस्राइल और हमास का युद्ध) में उभरती स्थिति को बढ़ती चिंता के साथ देख रहा है। जयशंकर ने कहा, “जाहिर है, हम सभी को यह सुनिश्चित करने में रुचि होगी कि कोई तनाव न बढ़े। लेकिन यह निश्चित रूप से चिंता का विषय है।”

वैश्विकरण के दौर में दुनिया के हर कोने में रुचि लेना जरूरी

विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक रोम में अपने संबोधन के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “मुझे लगता है कि एक वैश्वीकृत दुनिया में, यह महत्वपूर्ण है कि हम सभी अपनी सर्वोत्तम क्षमता के अनुसार दुनिया के सभी कोनों में रुचि लें। हमारे लिए, यह भी हमारे सहयोग का एक नया पहलू बनकर उभरा है।”

रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभाव पर जयशंकर ने कहा कि इस संघर्ष ने दुनिया के हर हिस्से को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि वे यूरोप के बारे में जानते हैं, क्योंकि संघर्ष आपके दरवाजे पर है। एक नजरिए से देखा जाए तो रूस और यूक्रेन का इलाका कई मायनों में यूरोप का सबसे अधिक प्रभावित हिस्सा है। विदेश मंत्री के मुताबिक आज ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक से जुड़ी समस्याएं सीधे तौर पर यूक्रेन संघर्ष के बाद हो रहे घटनाक्रम से जुड़ी हैं। मुद्रास्फीति भी रूस और यूक्रेन के संघर्ष से प्रभावित है।

विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि भारत और इटली दोनों नियम-आधारित व्यवस्था पर भरोसा करते हैं। जयशंकर ने कहा कि जब बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की बात आती है, बहुपक्षीय संस्थानों में सहयोग की बात आती है, तो “बहुत कुछ है जो हमें अलग करने के बजाय एक साथ लाता है।” उन्होंने कहा, इटली ने भारत की तरफ से प्रस्तावित इंडो-पैसिफिक महासागर पहल (Indo-Pacific Oceans Initiative or IPOI) के “छठे स्तंभ का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी स्वीकार की है। जयशंकर ने बताया कि इस स्तंभ का मकसद विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ अकादमिक आदान-प्रदान है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इंडो-पैसिफिक महासागर पहल का लक्ष्य सुरक्षित और स्थिर समुद्री क्षेत्र बनाना है। IPOI पहल के तहत, फोकस क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने, समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग करने और आपदा की रोकथाम और प्रबंधन में इच्छुक राज्यों के बीच साझेदारी का प्रयास भी प्रस्तावित है। व्यापार के मुद्दे पर, जयशंकर ने कहा कि 2021 से, भारत कई समझौतों पर बातचीत कर रहा है, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण यूरोपीय संघ के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है। 

यूरोपीय संदर्भ में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, जब हम भारत से देखते हैं कि आज हमारे प्रमुख भागीदार कौन हैं, तो निश्चित रूप से यूरोपीय संघ और यूरोपीय संघ के सदस्य देश राजनीतिक, प्रौद्योगिकी सहयोग में सबसे आगे होंगे।” उन्होंने कहा कि जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर, “हममें से कुछ लोगों ने भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) पर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। हम इटली को वहां देखकर बहुत खुश हैं।”

जयशंकर के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद का मुकाबला या समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसी बड़ी वैश्विक चुनौतियों से निपटना वैश्विक स्तर पर प्रभावी ढंग से तभी होगा जब यूरोपीय संघ और भारत जैसे देश मिलकर मिलकर काम करने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा, इटली यूरोपीय संघ में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। लगभग 750 इतालवी कंपनियों ने भारत में 6.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का विदेशी निवेश किया। इटली में 150 भारतीय कंपनियां हैं। विदेश मंत्री के मुताबिक इटली में भारत के 5,000 से अधिक छात्र हैं। भारत में रहने वाले प्रवासियों की संख्या लगभग 1,80,000 है।

मलेशिया के मंत्री को जयशंकर का न्योता, 6-7 नवंबर को दौरा

विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के निमंत्रण पर मलेशिया के विदेश मंत्री डॉ. जाम्ब्री अब्दुल कादिर भारत दौरा करेंगे। छठी भारत-मलेशिया संयुक्त आयोग की बैठक की सह-अध्यक्षता करने के लिए कादिर 06-07 नवंबर, 2023 को भारत की आधिकारिक यात्रा करेंगे। संयुक्त आयोग की बैठक 07 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी।



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