Home Breaking News Amit Shah: छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अमित शाह बिहार क्यों पहुंच गए? लालू-नीतीश के गणित ने उलझाया

Amit Shah: छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अमित शाह बिहार क्यों पहुंच गए? लालू-नीतीश के गणित ने उलझाया

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Amit Shah: छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अमित शाह बिहार क्यों पहुंच गए? लालू-नीतीश के गणित ने उलझाया

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Why did Amit Shah reach Bihar on last day of election campaign in Chhattisgarh Lalu-Nitish complicated

गृह मंत्री अमित शाह
– फोटो : पीआरओ



विस्तार


छत्तीसगढ़ में सात नवंबर को पहले चरण के लिए मतदान होगा। इन सीटों के लिए रविवार शाम पांच बजे चुनाव प्रचार थम गया है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दल अपनी पूरी शक्ति लगा देते हैं जिससे वे ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को अपने पक्ष में कर सकें। लेकिन भाजपा के शीर्ष नेता अमित शाह ऐसे दिन किसी चुनावी राज्य में नहीं, बल्कि बिहार पहुंचे और नीतीश–लालू गठबंधन पर जमकर हमला बोला। पिछले 50 दिनों में यह उनकी दूसरी बिहार यात्रा थी। भाजपा नेता ने ऐसे अहम मौके पर बिहार में होना क्यों तय किया? 

इसका बड़ा कारण नीतीश-लालू सरकार का जातिगत सर्वे वाला दांव है जिसके बूते महागठबंधन और इंडिया गठबंधन को उम्मीद है कि वह भाजपा का विजय रथ रोकने में कामयाब रहेगी। खुद भाजपा का इस मुद्दे पर बेहद संवेदनशीलता से जवाब देना भी यह बताता है कि भाजपा को भी इस मुद्दे से नुकसान होने’ की आशंका है। यही कारण है कि वह इस मुद्दे का विरोध नहीं कर पा रही। उलटे अमित शाह ने भी साफ़ कह दिया है कि भाजपा जातिगत जनगणना के विरोध में नहीं है, बल्कि वह इन मुद्दों पर राजनीति नहीं करती। 

सभी सीटों पर जीत का लक्ष्य 

लेकिन इस मुद्दे की गंभीरता ही है कि भाजपा के इस दूसरे सबसे बड़े स्टार प्रचारक ने बिहार के हर कोने की यात्रा कर ली है। आज की मुजफ्फरपुर की यात्रा से भी उन्होंने तिरहुत और चंपारण क्षेत्र की आठ लोकसभा सीटों को साधने की कोशिश की है। यह भी ध्यान देने की बात है कि यह क्षेत्र पिछड़ी जातियों में आने वाले निषाद-मल्लाह बहुल है। इस वर्ग को साधने की कोशिश में ही अमित शाह ने कहा कि यदि नीतीश कुमार पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध हैं तो उन्हें घोषणा करनी चाहिए कि अगला मुख्यमंत्री पिछड़ी जाती से ही होगा। लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि वे पिछड़ी जातियों का विकास नहीं करना चाहते, बल्कि वे केवल जाती के नाम पर राजनीति करते हैं।     






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