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खबरों के खिलाड़ी।
– फोटो : अमर उजाला
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मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में क्षत्रपों की चर्चा हो रही है। भाजपा के क्षेत्रीय क्षत्रपों की चुनावों में कितनी भूमिका है, इस पर अलग-अलग मत हैं। कांग्रेस जहां इन्हीं क्षत्रपों के भरोसे है, वहीं भाजपा के मामले में यह माना जा रहा है कि वह प्रधानमंत्री के चेहरे के ही सहारे है। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए ‘खबरों के खिलाड़ी’ की इस कड़ी में विनोद अग्निहोत्री, राहुल महाजन, प्रेम कुमार, संजय चौगांवकर और संजय राणा मौजूद थे। पढ़िए इस चर्चा के अंश…
तीन मुख्य राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की बात करें तो वहां भाजपा-कांग्रेस का नेतृत्व किस स्थिति में नजर आ रहा है?
राहुल महाजन: पहले ऐसा लग रहा था कि शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे को दरकिनार किया जा रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। भाजपा नेताओं के भाषणों में जातीय जनगणना का प्रभाव दिखाई देता है। राजस्थान में दिए जाने वाले भाषणों में उदयपुर की घटना का जिक्र किया जाता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई और मुद्दा हावी नहीं है, तो वहां महादेव एप घोटाले का मुद्दा उठा दिया गया है।
प्रेम कुमार: राजस्थान में कांग्रेस के पास चेहरा है, लेकिन अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खटपट रही है। उधर, भाजपा में कहा जा रहा है कि वसुंधरा राजे को फिर से दरकिनार किया जा रहा है। या तो भाजपा उन्हें टिकट ही न देती। भाजपा ने उन्हें और उनके समर्थकों को टिकट दिया। सांसद बालकनाथ अब उन्हें भावी मुख्यमंत्री बता रहे हैं। भाजपा ही भ्रम में नजर आती है। अगर वसुंधरा भावी सीएम हैं तो वे प्रधानमंत्री के साथ मंच पर क्यों नहीं दिखतीं। राजस्थान दोनों दलों के लिए ‘बागीस्तान’ हो गया है।
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