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Pakistan Election: ‘8 फरवरी को चुनाव से पहले राष्ट्रपति अल्वी के फैसले अनुचित’, निर्वाचन आयोग की सख्त टिप्पणी

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Pakistan Election: ‘8 फरवरी को चुनाव से पहले राष्ट्रपति अल्वी के फैसले अनुचित’, निर्वाचन आयोग की सख्त टिप्पणी

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Pakistan Election Feb 8 EC Pulls President Arif Alvi moves inappropriate

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी (फाइल)
– फोटो : social media

विस्तार


पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने 8 फरवरी के चुनाव से पहले बहुत सख्त टिप्पणी की है। आयोग ने अनुचित कदम उठाने के लिए राष्ट्रपति अल्वी की आलोचना की है। चुनाव आयोग की टिप्पणी इसलिए भी अहम है क्योंकि राष्ट्रपति बनने से पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक सदस्य रहे अल्वी ने चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी को भी समान अवसर देने की वकालत कर रहे हैं।

खबरों के मुताबिक अल्वी ने बीते दिनों पाकिस्तान में चुनाव को लेकर एक सवाल पर कहा, जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी- पीटीआई को भी समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, अगले आम चुनावों में समान अवसर की मांग को लेकर उठाई गई चिंताएं गलत नहीं हैं। इसे इमरान खान की पार्टी का समर्थन करना माना गया। बता दें कि अल्वी 2018 में राष्ट्रपति बने थे।

बता दें कि राजनीतिक और आर्थिक दोनों तरह की अस्थिरता का सामना कर रहे पाकिस्तान में अगले साल 8 फरवरी को चुनाव कराए जाने हैं। इसी बीच आयोग की आलोचना के घेरे में आ चुके अल्वी पहले भी विवादों में रहे हैं। राजनीतिक मुद्दों को लेकर अल्वी पर अक्सर जेल में बंद प्रधानमंत्री की पार्टी का पक्ष लेने का आरोप लगाता है।

फिलहाल देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार उल हक काकर हैं। एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में लिखे एक पत्र में, अल्वी ने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति संविधान के तहत राज्य के प्रमुख के रूप में गणतंत्र की एकता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए, नागरिकों के अधिकार के मामले में प्रधानमंत्री और सभी संस्थानों की रक्षा के लिए कर्तव्य से बंधे हैं। 

अल्वी ने कहा, इसी कारण से वह पीटीआई के आरोपों वाला पत्र भेज रहे थे। ज्ञात राजनीतिक संबद्धता वाले व्यक्तियों के जबरन गायब होने के बढ़ते मामलों के संबंध में मीडिया में भी बहस हुई थी। राष्ट्रपति ने अंतरिम प्रधानमंत्री काकर से इन मुद्दों पर गौर करने को भी कहा।

बयानों के बीच पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) ने राष्ट्रपति के कदम पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया। निर्वाचन आयोग ने कहा, ”एक उच्च अधिकारी आगामी चुनाव की पारदर्शिता को संदिग्ध बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह व्यवहार उचित नहीं है।” आयोग ने भरोसा दिलाया कि चुनाव कार्यक्रम निर्धारित हैं। चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हों, यह सुनिश्चित किया जाएगा।

कार्यवाहक सूचना मंत्री मुर्तजा सोलांगी ने भी पीटीआई पार्टी की लाइन की वकालत करने के लिए अल्वी को फटकार लगाई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर एक पोस्ट में कहा, आगामी आम चुनाव के संबंध में राष्ट्रपति के बयान उनकी संवैधानिक भूमिका के विपरीत प्रतीत होते हैं। सोलांगी अंतरिम सरकार के प्रवक्ता भी हैं। 

सोलांगी ने अल्वी से संवैधानिक संस्थानों, विशेष रूप से ईसीपी को बिना किसी हस्तक्षेप के अपने कर्तव्यों का पालन करने की अनुमति देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “पूरा देश चाहता है कि राष्ट्रपति महासंघ के प्रतीक के रूप में अपनी भूमिका निभाएं और ऐसी धारणा न बनाएं कि लोग उन्हें किसी पार्टी के प्रवक्ता के रूप में देखें।”

इस बीच, पीटीआई ने आरोप लगाया कि ईसीपी ने जब से अगले आम चुनाव की तारीख घोषित की है, पार्टी के खिलाफ “राज्य के अत्याचार” तेज हो गए हैं। पार्टी ने दावा किया कि कुछ राज्य संस्थान (ECP) नेताओं के बयानों पर अंकुश लगा रहे हैंष “बयानों के लिए पीटीआई नेताओं के अपहरण” का सिलसिला अभी भी जारी है।

पीटीआई ने बार-बार आरोप लगाया है कि उसके प्रमुख इमरान खान को राजनीति से प्रेरित आरोपों पर जेल में रखा गया है ताकि वह आम चुनाव नहीं लड़ सकें। क्रिकेटर से नेता बने 71 वर्षीय इमरान खान को पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद से देश भर में लगभग 150 मामलों का सामना करना पड़ रहा है।

निर्वाचन आयोग के बयान के बाद ईसीपी ने कहा, “[पीटीआई] के केंद्रीय अतिरिक्त महासचिव अली नवाज अवान के जबरन गायब होने पर ईसीपी और कार्यवाहक सरकार दोनों मौन हैं। इनकी निष्क्रियता अराजकता का सबसे खराब उदाहरण है।” पीटीआई ने ईसीपी और कार्यवाहक सरकार पर अपने संवैधानिक कर्तव्य को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, अल्वी संविधान से “विचलित” होने के राज्य के एजेंडे में “प्रमुख सूत्रधार” हैं।

पीटीआई के अनुसार, ईसीपी और अंतरिम व्यवस्था को अपने संवेदनशील कर्तव्यों का एहसास होना चाहिए। “लोकतंत्र के खिलाफ साजिशों का हिस्सा” बनने के बजाय, इसके अस्तित्व और सुरक्षा के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

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