[ad_1]

सीएम गहलोत ने शेयर की थी ये तस्वीर।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान विधानसभा चुनाव के बीच सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की दूरी लगातार कम होती दिख रही है। पहले सचिन पायलट गहलोत के साथ पोस्टर पर दिखाई दिए और अब उनके साथ बैठक करते हुए नजर आए। इस तस्वीर को गहलोत ने खुद सोशल मीडिया पर शेयर किया और लिखा- ‘एक साथ, जीत रहे हैं फिर से’। गहलोत के तस्वीर पोस्ट करते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने तरह-तरह पोस्ट किए।
पढ़ें क्या बोले यूजर्स?
- नकारा निकम्मा के साथ बैठना पड़ा आपको, हाय ये कुर्सी की चाह क्या क्या न कराए।
- निक्कमे के साथ फोटो खिचवा कर पोस्ट करना पड़ रहा है क्या समझा जाए जादू खत्म हो लिया?
- राजस्थान के दिल में पायलट है, गहलोतजी अबकी बार आप भी बड़ा दिल दिखा दो और कुर्सी त्याग दीजिए।
- देर आये दूरसत आये। सचिन पायलट के बिना ये गाड़ी नहीं निकल सकती गहलोजजी। अपने ज़रूर अच्छे काम किए, लेकिन साथ में कमियां भी हैं। उन कमियों की भरपाई पायलट ही कर सकते हैं।
- अच्छा किया जो एक साथ आ गए। सचिन के बिना राजस्थान जितने का सपना, सपना ही रह जाता। सचिन ही राजस्थान के भविष्य हैं, उनके बिना कांग्रेस न के बराबर है। कांग्रेस के सीनियर लीडर को ये भी ये बात समझनी चाहिए और सचिन को मुख्यमंत्री का पद का दावेदार घोषित कर देना चाहिए।
- बादेबंदी की करो तैयारी, सरकार बनने से पहले ही एक छोटी बाडेबंदी दिख रही है।
इससे पहले गहलोत के साथ पोस्टर पर दिखे पायलट
हाल ही में सीएम अशोक गहलोत के साथ सचिन पायलट पोस्टर पर भी नजर आए थे। जिसके बाद से इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। दरअसल, कांग्रेस के सर्वे और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों में प्रदेश का गुर्जर समाज कांग्रेस से दूर जाता दिखाई दे रहा था। गुर्जर समाज के लोग सचिन पायलट को साइडलाइन करने के कारण कांग्रेस से नाराज बताए जा रहे थे। इन खबरों से कांग्रेस को चुनाव में नुकसान हो सकता था, ऐसे में कांग्रेस ने अपनी रणनीति में फैसला करते हुए। गहलोत और पायलट को साथ लाकर खड़ा कर दिया है।

आंबेडकर से पहले सोनिया की तस्वीर देख भड़के
सीएम गहलोत ने जो तस्वीर पोस्ट की, उसमें कमरे की दीवार पर कई तस्वीरें भी लगी हैं। सोशल मीडिया यूजर्स की नरज भी उन तस्वीरों पर पड़ी और वे कमियां खोज लाए। एक यूजर ने कमेंट कर लिखा- ‘आपके लिए बाबा साहेब आंबेडकर पूरे परिवार के बाद आता है। ऊपर दीवार पर लगी तस्वीरें आप लोगों की हकीकत बयां करती हैं। जहां सब कुछ एक परिवार ही है। दलित आदिवासी जिनके दम पर दशकों तक सत्ता भोगी हैं, कम से कम उनका सम्मान तो करना सीखो’। चुनाव के बीच क्यों बदल रहे पोस्टर्स? एक क्लिक पर पढ़ें पूरी खबर
[ad_2]
Source link