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– फोटो : Social Media
विस्तार
भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, विकास, हिंदुत्व और धर्मांतरण जैसे मुद्दों से शुरू छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव का प्रचार आखिरी दौर में कांग्रेस के ‘भरोसे के घोषणापत्र’ और भाजपा की ‘मोदी की गारंटी’ पर आ टिका है। कांग्रेस की कर्जमाफी योजना को छोड़ दें तो दोनों दलों का घोषणापत्र वोट बटोरने वाला और जवाबी ही है। दोनों के केंद्र में गांव, किसान और महिलाएं हैं। शहरी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार और विकास जैसे मुद्दों के साथ चेहरा भी चुनावी रुख तय करता नजर आ रहा है। कांग्रेस को उम्मीद है कि कर्जमाफी योजना से उसने अपनी राह आसान कर ली है। लेकिन, पिछले चुनाव में किए गए सभी वादों पर खरा उतरने की विफलता भी उसके पीछे पड़ी है। भाजपा इसे मुद्दा बनाकर गांव-गांव पहुंच रही है। किसान कर्जमाफी के मुद्दे की काट के लिए भाजपा ने भ्रष्टाचार पर कांग्रेस की घेरेबंदी की कोशिश की है, लेकिन इसका असर शहरों तक ही सीमित नजर आ रहा। कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ग्रामीणों का जवाब यही होता है कि हमें इससे क्या लेनादेना। जो हमारे बारे में अच्छा सोचेगा, हम भी उसी की बात करेंगे। राज्य के चुनावी माहौल पर नीरज तिवारी की रिपोर्ट…
हिंदुत्व…साजा में आम आदमी ने मंत्री को घेरा
बेमेतरा जिले की साजा सीट पर भाजपा ने हिंदुत्व का कार्ड खेलकर मंत्री रविंद्र चौबे काे घेर दिया है। सात बार से विधायक चौबे के सामने भाजपा ने बिरनपुर गांव निवासी आम आदमी ईश्वर साहू को उतारा है। गत 8 अप्रैल को सामुदायिक हिंसा में ईश्वर के बेटे भुनेश्वर की हत्या कर दी गई थी। ईश्वर के पक्ष में हिंदू मतदाताओं की लामबंदी की काट कांग्रेस नहीं तलाश पाई है। ईश्वर नामांकन में हजारों लोग शामिल हुए और 25 लाख रुपये से ज्यादा का चंदा भी जुटा था।
खास बातें
- 70 सीटें…958 कुल उम्मीदवार, 1.63 करोड़ मतदाता
- 81.41 लाख पुरुष व 81.72 लाख महिलाएं हैं। 684 ट्रांसजेंडर भी
मातृ वंदन-गृहलक्ष्मी
‘मोदी की गारंटी’में शादीशुदा महिलाओं को मातृ वंदन योजना में सालाना 12 हजार रु. की सहायता के जवाब में सीएम बघेल ने छत्तीसगढ़ गृहलक्ष्मी योजना में महिलाओं को सालाना 15 हजार देने का एलान कर दिया।
पूरे प्रदेश में मुद्दा बनाने की थी कोशिश
भाजपा ने भुनेश्वर हत्याकांड को तूल देते हुए मुद्दा बनाने की कोशिश की थी पर सफल नहीं हो पाई। साजा के आसपास की सीटों पर भी इसका जोर नहीं दिखता। विश्लेषकों का मानना है कि लोगों की प्राथमिकता जीवनस्तर सुधारना है, जिसके लिए वे संघर्षरत हैं।
- चुनाव में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं व औद्याेगिक प्रदूषण से निपटने के साथ युवाओं को रोजगार पर खास बहस दलों के बीच नहीं हो सकी।
जातिगत समीकरण : साजा क्षेत्र में ढाई लाख मतदाता हैं। इनमें लोधी और साहू समाज को मिलाकर 65 फीसदी से अधिक अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता हैं। अनुसूचित जाति और आदिवासी मतदाता 25 फीसदी हैं।
दूसरे चरण के रण में सीएम समेत कई दिग्गज
- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पाटन सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने उनके ही भतीजे सांसद विजय बघेल को मैदान में उतारा है। जेसीसीजे से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।
- विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत सक्ती सीट से चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने भाजपा से खिलावन साहू हैं। कांग्रेस के लौटने पर मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने की चर्चाओं में महंत का नाम भी शामिल है।
- जनजातीय मामलों की केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह भरतपुर सोनहत से मैदान में हैं। भाजपा में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित न होने से समर्थक उन्हें इस पद का मजबूत दावेदार मान रहे हैं।
- अंबिकापुर से उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के सामने भाजपा ने उनके ही करीबी रहे राजेश अग्रवाल पर दांव खेला है।
- प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव लोरमी से लड़ रहे हैं। चर्चा है कि भाजपा सत्ता में आई तो मुख्यमंत्री ओबीसी होगा, जिसमें अरुण का नाम भी जोड़ा जा रहा है। कांग्रेस से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष थानेश्वर साहू मैदान में हैं।
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