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खरना का दिन
– फोटो : अमर उजाला
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शनिवार 18 नवंबर को शाम करीब सात बजे से रात करीब साढ़े आठ बजे तक अपेक्षाकृत ज्यादा शांति रहेगी। जहां भी छठ होता है, वहां जरूर। वजह है खरना पूजा और इसमें ‘शांति’ की जरूरत। खरना पूजा के लिए समय कोई पंडित नहीं बताते। सूर्यास्त होने के बाद तैयारी शुरू हो चुकी है। व्रती के नहाने और बाकी तैयारियों के हिसाब से शाम सात बजे से साढ़े आठ बजे के बीच ज्यादातर घरों में खरना पूजा होगी।
आवाज से भंग होता है ध्यान, और इससे…
खरना पूजा जिन घरों में होता है, उसमें भी बहुत सारे लोग यह नहीं जानते कि इस पूजा में ‘शांति’ कितनी जरूरी शर्त है। आज सूर्यदेव की बहन छठी मइया की पूजा होती है। ज्योतिषविद् और कर्मकांड विशेषज्ञ पंडित अरुण कुमार मिश्रा बताते हैं कि छठी मइया देवी भगवती के नौ रूपों में एक देवी कात्यायनी हैं। खरना में छठी मइया के रूप में इनकी ही पूजा होती है। गरीब हो या अमीर, हर व्रती लगभग एक ही तरीके से और संसाधन के साथ यह पूजा करता है। व्रती स्त्री हों या पुरुष, दोनों पर एक ही विधान लागू होता है। नए कपड़े में व्रती पूजा करने के लिए जब कमरा बंद करें तो इतनी शांति होनी चाहिए कि उनके कान में कोई आवाज नहीं जाए। पूजा करने के साथ ही व्रती आज पहली और एकमात्र बार भोजन-जल ग्रहण करते हैं। व्रती की कान तक अगर कोई आवाज पहुंच गई तो ध्यान भंग हो जाता है और खाना-पानी बंद कर गेट खोल दिया जाता है। अगर आवाज नहीं आए तो व्रती क्षमतानुसार भोजन-पानी ग्रहण कर स्वयं दरवाजा खोलते हैं और इसके बाद घर के बाकी सदस्य छठी मइया के साथ व्रती का आशीर्वाद लेते हैं।
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