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– फोटो : Amar Ujala
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आईटीबीपी के हेड कांस्टेबल के बलिदान से गांव अवताल काटला में शोक की लहर है। वीरवार को छत्तीसगढ़ में चुनाव ड्यूटी के दौरान आईईडी विस्फोट में सांबा की सीमावर्ती पंचायत के निवासी जोगिंदर कुमार (45) पुत्र दलीप सिंह गंभीर घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घर पर शव का इंताजर कर रहीं जोगिंदर की पत्नी और मां का रो-रोकर बुरा हाल था। बेटे की तस्वीर को सीने से लगाकर मां उसे याद कर रही थी।
बलिदान हेड कांस्टेबल की पत्नी रेखा देवी ने बताया कि उसकी घटना से कुछ देर पहले पति के साथ वीडियो कॉल पर बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि मैं जल्द ही छुट्टी लेकर घर आउंगा। इतना कहते ही ड्यूटी पर जाने की बात कहकर फोन काट दिया और बोले कि ड्यूटी से लौटते ही शाम को फोन करुंगा, पर क्या पता था कि मैं उनको आखिरी बार देख रही हूं और बात कर रही हूं। इतना कहते ही रेखा की आंखें भीग गईं। खुद को संभालते हुए रेखा ने बताया कि अभी 23 अक्तूबर को वे छुटटी काटकर गए थे।
रेखा ने बताया कि जब शाम तक पति का फोन नहीं आया तो उन्होंने कॉल की लेकिन आगे से किसी ने मोबाइल फोन की कॉल रिसीव नहीं की। दोबारा फोन किया तो बताया कि आईईडी धमाके में जोगिंदर घायल हो गए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जब टीवी पर समाचार देखा तो उन्हें उनके बलिदान का पता चला। इसके बाद यूनिट से भी फोन कर सूचित किया गया। बलिदान हेड कांस्टेबल का नौ वर्षीय बेटा भी है। घर पर भीड़ और सबको रोता देख बेटा स्तब्ध है।
मासूम अभी पिता की मौत से बेखबर है। जोगिंदर के बलिदान की सूचना के बाद सैकड़ों लोग घर पर पहुंच गए। सभी उनके माता-पिता सहित पत्नी को ढांढस बंधा रहे थे। सरपंच सोमनाथ ने बताया कि शाम छह बजे तक पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने की उम्मीद है। थाना प्रभारी भी शहीद के घर परिजनों को हौसला देने के लिए पहुंचे थे।
पूरा परिवार देश सेवा में, सुरक्षाबलों की भर्ती में प्रथम रहा था जोगिंदर
जवान के पिता दिलीप सिंह (सेवानिवृत्त सैनिक) ने कहा कि वह बेटे के निधन से दुखी हैं, लेकिन साथ गर्व है कि उसने देश की सेवा में अपना जीवन लगा दिया।बताया कि जोगिंदर कुमार सभी भाइयों की तरह देश सेवा करने के लिए सेना में शामिल होने को लेकर बहुत उत्साहित रहे। मैंने उन्हें चयनित होने के लिए कड़ी मेहनत करते देखा है। उसने लोकतंत्र को कायम रखने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। नक्सलवाद कोई नई बात नहीं है और कई दशकों से चल रहा है। सरकार को समस्या का स्थायी समाधान ढूंढना चाहिए।
उनके बड़े भाई जगदीश राज ने कहा कि हर किसी को जोगिंदर के सर्वोच्च बलिदान पर गर्व है, लेकिन उन्होंने नक्सलवाद की लगातार बनी समस्या पर सवाल भी उठाया। कहा हम बलिदान देने के लिए तैयार हैं लेकिन ज्यादा दुख तब होता है जब आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी में जान गंवानी पड़ती है। भाई को कहीं दूसरी जगह से ड्यूटी पर लगाया था। वह वहां की चुनौतियों के बारे में जानता तक नहीं था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक नक्सल समस्या से प्रभावी ढंग से निपटा नहीं जा सका है।
भाई के प्रयासों को याद करते हुए जगदीश राज ने कहा कि जोगिंदर ने अपने चयन के दौरान पहला स्थान हासिल किया था और दो दशक से अधिक समय तक देश की सेवा की। आईटीबीपी ने एक्स पर पोस्ट कर श्रद्धांजलि दी। लिखा-आईटीबीपी के महानिदेशक और अन्य सभी रैंक बहादुर को सलाम करते हैं। गौरतलब है कि जोगिंदर सुरक्षाकर्मियों के परिवार से थे। उनके पिता और बड़े भाई सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि दो छोटे भाई-बहन आईटीबीपी में सेवारत हैं।
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