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Subrata Roy Death: सेबी के पास पड़े सहारा के पैसों पर सरकार ले सकती है बड़ा फैसला, रिपोर्ट्स में ये दावा

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Subrata Roy Death: सेबी के पास पड़े सहारा के पैसों पर सरकार ले सकती है बड़ा फैसला, रिपोर्ट्स में ये दावा

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Subrata Roy death: Govt looks to transfer unclaimed funds of Sahara-Sebi refund account

सहारा प्रमुख दिवंगत सुब्रत राय।
– फोटो : सोशल मीडिया

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सरकार कथित तौर पर सहारा-सेबी रिफंड खाते में  पड़े बिना दावे की राशि को सरकार की संचित निधि में स्थानांतरित करने की वैधता पर विचार कर रही है। हालांकि इसमें उन निवेशकों के लिए प्रावधान किए की उम्मीद है जो भविष्य में दावे करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस फैसले पर समूह के संस्थापक सुब्रत रॉय के पिछले सप्ताह निधन के बाद विचार किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सहारा रिफंड खाता बनने के बाद पिछले 11 वर्षों में गिने-चुने ही दावेदार ही सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि निवेशकों को धन लौटाने के लिए इस राशि को एक अलग खाते के साथ भारत की संचित निधि में बदलने का विकल्प तलाशा जाएगा। यदि दिए गए ब्योरे के सत्यापन के बाद सेबी सभी या किसी भी ग्राहक के ठिकाने का पता लगाने में असमर्थ रहता है तो ऐसे अंशधारकों से एकत्र की गई राशि को सरकार को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। 

सहारा की राशि का उपयोग लोक कल्याण कार्यक्रमों में होने की उम्मीद

रिपोर्ट में कहा गया है कि धन का उपयोग गरीबों की मदद के लिए चल रहे कार्यक्रमों या लोक कल्याण के लिए किए जाने की उम्मीद है। 31 मार्च तक समूह से वसूली गई और सरकारी बैंकों में जमा की गई कुल राशि 25,163 करोड़ रुपये थी, जबकि 48,326 खातों से जुड़े 17,526 आवेदनों के बदले 138 करोड़ रुपये का भुगतान निवेशकों को किया जा चुका है।

दूसरी ओर, वास्तविक जमाकर्ताओं के वैध बकाये के भुगतान के लिए सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार को 5,000 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए थे। जिसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने रिफंड प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए सहारा के जमाकर्ताओं के लिए एक समर्पित पोर्टल लॉन्च किया था।

सुब्रत रॉय भारत के सबसे बड़े नामों में से एक थे। सहारा एक समय भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम का प्रायोजक था और एक समय इसकी संपत्ति में न्यूयॉर्क का प्लाजा होटल और लंदन का ग्रोसवेनर हाउस शामिल था। वह पूर्व फोर्स इंडिया फॉर्मूला वन टीम के सह-मालिक भी थे।

2010 में शुरू हुई सहारा समूह की परेशानी

सहारा समूह की परेशानी 2010 में शुरू हुई जब सेबी ने सहारा की दो इकाइयों से इक्विटी बाजार से धन नहीं जुटाने या जनता को कोई प्रतिभूति जारी नहीं करने के निर्देश दिए। रॉय को बाद में 2014 में गिरफ्तार किया गया था, जब वह अवमानना मामले में अदालत में पेश नहीं हुए। यह माना  उनकी कंपनियों द्वारा निवेशकों को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं लौटाने के मामले से जुड़ा था।

सहारा को निवेशकों को आगे रिफंड के लिए सेबी के पास अनुमानित 24,000 करोड़ रुपये जमा कराने को कहा गया था। समूह ने कहा था कि उन्होंने 95 प्रतिशत निवेशकों को सीधे रिफंड कर दिया है और सेबी की ओर से 24000 करोड़ लौटाने का फरमान ‘दोहरे भुगतान’ जैसा है।

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