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क्रिकेट वर्ल्डकप की गहमागहमी में इसका सजीव प्रसारण करने वाले ओटीटी डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर ही एक फिल्म रिलीज हुई ‘अपूर्वा’। फिल्म की हीरोइन तारा सुतारिया होने की वजह से अधिकतर लोगों ने इसके टीजर, ट्रेलर, प्रचार आदि पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन, फिल्म रिलीज हुई और जैसे जैसे इसके बारे में लोगों को पता चला ये फिल्म बीते हफ्ते की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली फिल्मों में शुमार होने में कामयाब रही। इस फिल्म के निर्देशक निखिल नागेश भट हाल फिलहाल में अपनी उस फिल्म ‘किल’ को लेकर ज्यादा चर्चा में रहे हैं, जो करण जौहर की कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस और ऑस्कर विनर गुनीत मोंगा की कंपनी सिख्या एंटरटेनमेंट की पहली एक्शन फिल्म मानी जा रही है और जिसका प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ। निखिल नागेश भट से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल की एक खास मुलाकात…
आपके सरनेम से भ्रम होता है कि आप जम्मू कश्मीर या गुजरात से हैं?
वैसे तो ये नाम भट्ट नहीं बल्कि भट ही है और मैं कुल से कोंकणस्थ ब्राह्मण हूं। परवरिश मेरी बिहार में हुई। सिंधिया राजघराने की मदद के लिए मराठों का जाना तो आपको याद ही होगा। वहां महाराष्ट्र से लड़ने गए तमाम मराठा परिवार फिर वहीं उत्तर भारत में ही बस गए। हमारा परिवार बिहारशरीफ में बसा। दादा मेरे वहां के नामी वकील रहे। पिताजी ने भी वकालत की। एक चाचा हमारे जज बने।
और बड़ा भाई भी शायद वकील है, फिर वकीलों के परिवार में ये फिल्ममेकर कैसे..?
ये भी दिलचस्प कहानी है। कोशिश तो मैंने भी की थी वकील बनने की। हालांकि, उससे पहले घरवालों के दबाव में मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं भी दी। फिर साइंस से मोह टूटा तो कॉमर्स से स्नातक किया। एलएलबी भी दो साल पढ़ा लेकिन उसमें मन नहीं लगा तो मॉस कॉम में दाखिला ले लिया। नोएडा में जी न्यूज की इंटर्नशिप के दौरान तत्कालीन संपादक विनोद कापड़ी ने मुझे फिक्शन की तरफ जाने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, उसे बाद मैंने एक दो इंटर्नशिप दिल्ली में और कीं लेकिन जब मैं मुंबई आया और एमटीवी से जुड़ा तो मुझे समझ आया कि मुझे जाना कहां है।
और, आपकी शुरुआत हुई अनुराग कश्यप की फिल्म ‘ब्लैक फ्राइडे’ से?
जी नहीं। उन दिनों में मिडडे में काम करता था और वहीं मुझे अंडरवर्ल्ड पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने का मौका मिला। उसमें एक हिस्सा बबलू श्रीवास्तव के ऊपर भी था। हिंदी मेरी अच्छी थी तो मैंने इसकी पटकथा लिखी थी और बात निर्देशन की आई तो मुझसे कहा गया कि लिख लिया है तो बना भी लो। ‘ब्लैक फ्राइडे’ के निर्माता ही मेरे मिडडे में बॉस थे। इस फिल्म से मेरे जुड़ने तक ये फिल्म बन चुकी थी। मैंने और मेरे मित्र देबोलय ने इस फिल्म के ट्रेलर काटे थे और इसकी पैकेजिंग में मदद की थी।
मतलब कि अनुराग कश्यप स्कूल ऑफ फिल्ममेकिंग से आपका नाता रहा नहीं..?
जी यही कह सकते हैं। मैं गाहे बेगाहे उनसे मिलता रहा हूं लेकिन उनके साथ काम कभी नहीं किया। अभी हाल ही में जब हम लोग ‘किल’ के प्रीमियर से लौटे तो उनका फोन आया और उन्होंने ये फिल्म देखने की इच्छा जताई तब उनसे मिला।
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