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योग और ध्यान क्यों कर रहे थे आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स, क्या था खानपान

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हाइलाइट्स

आस्ट्रेलियाई दुनिया की पहली ऐसी क्रिकेट टीम है जिसने खेल में मानसिक मजबूती के पहलू पर सबसे पहले ध्यान दिया
टीम कुछ मिनटों के लिए रोज योग और ध्यान भी करती है, बेशक ये कुछ मिनटों का ही है

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम अगर किसी बड़ी प्रतियोगिता के फाइनल में पहुंचती है तो किसी भी तरह से और किसी भी हालत में जीत का वरण कर ही लेती है. वर्ल्ड कप में छठी बार उनका चैंपियन बनना यही जाहिर करता है. कहा जाता है कि आस्ट्रेलियाई टीम की सफलता के पीछे बड़ी भूमिका मानसिक दृढ़ता की होती है. ये भी जानते हैं कि आखिर पिछले कुछ समय से ये ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम योग और ध्यान का भी सहारा क्यों लेने लगी थी.

संयोग की बात ये है कि आस्ट्रेलिया की टीम ने सेमीफाइनल और फाइनल में उन टीमों को हराया, जिनसे वो पहले लीग मैचों में हारे थे.आस्ट्रेलिया टीम के बारे में कहते हैं कि वो जितना मैच मैदान पर खेलती है, उतना ही मैदान से बाहर भी और दिमाग में भी.

13 वर्ल्ड कप में 08 बार फाइनल में 
अगर ये सब नहीं होता तो ऑस्ट्रेलिया ने 06 वर्ल्ड कप फाइनल मैच नहीं जीते होते. अब तक 13 वर्ल्ड कप हो चुके हैं. आस्ट्रेलिया की टीम 08 बार फाइनल में पहुंची. 1975 और 1996 में वह फाइनल में पहुंचकर जरूर हारी. 1975 के पहले वर्ल्ड कप के फाइनल में वेस्टइंडीज की ताकतवर टीम ने उन्हें शिकस्त दी तो 1996 में श्रीलंका ने मैच पलटा.

चार टीमों की क्षमता एक जैसी तो आस्ट्रेलिया कैसे अलग 
मौजूदा वर्ल्ड क्रिकेट में कम से कम चार टीमें ऐसी हैं, जिनकी क्षमताएं एक जैसी मानी जाती हैं, जिसमें आस्ट्रेलिया, भारत, न्यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका शामिल हैं लेकिन आस्ट्रेलियाई टीम इन सबमें सबसे अलग इसलिए होता है क्योंकि वो मानसिक जीवटता के चलते मौकों को बखूबी भुनाना और हर बाजी को अपने पक्ष में ले जाने की क्षमता ज्यादा रखती है.

कौन सी बातें मानसिक दृढ़ता देती हैं
आस्ट्रेलिया टीम ने क्रिकेट में मनोवैज्ञानिक की सेवाएं लेने का काम सबसे पहले शुरू किया. क्योंकि वो ये मानते थे कि जब हम मैदान पर खेल खेलते हैं तो असल खेल दिमाग में ज्यादा चल रहा होता है, जो हमारी मानसिक मजबूती का हर पल इम्तिहान लेता है. कुछ बातें आस्ट्रेलियाई टीम को खास मानसिक दृढ़ता देती हैं-
आत्मविश्वास – वे जानते हैं कि आत्मविश्वास उन्हें बहुत दूर तक ले जा सकता है
कभी समर्पण नहीं करना – उनमें कभी हार नहीं मानने की प्रवृत्ति होती है
सकारात्मक दृष्टिकोण – वे जीतने के लिए खेलते हैं, सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं.
मानसिक बुनावट – वे मानसिक दृढ़ता, लचीलेपन और महत्वपूर्ण मौकों खुद को संतुलित बनाए रखने की ट्रेनिंग लेते हैं.

योग और ध्यान क्यों कर रहे थे
कुछ और बातें हैं जो टीम की मानसिक दृढ़ता में योगदान देती हैं, रोज की दिनचर्या में योग और ध्यान को जगह, जो कुछ साल पहले से वो करने लगे हैं. कुछ समय पहले ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम का 7 मिनट का सुबह का योगा स्ट्रेच वीडियो आया था, जो शायद यूट्यूब पर भी देखने को मिल जाए. योगा उन्हें उनकी मूल शक्ति, लचीलेपन और समग्र एथलेटिज्मि को बेहतर बनाने में मदद करता है. चोटों में भी मदद कर सकता है.
हाल के दिनों में उनके बैटिंग कोच ने उन्हें 05 से 10 मिनट ध्यान या सांस लेने की एक्सरसाइज भी सिखाईं. इससे मदद मिलती है. अगर क्रिकेट की बात करें तो ध्यान कुछ बातों में जरूर मदद करता है. मसलन
– मन को एकाग्र करें
– तनावपूर्ण विचारों से पीछे हटें
– प्रदर्शन को लेकर आशंकाओं से निपटें
– गेंद की टाइमिंग का आकलन करें
– उसी के अनुसार रन लें
– सुनिश्चित करें कि रन आउट नहीं हों

खानपान का भी है मैन्युअल
कुल मिलाकर उनकी दिनचर्या ऐसी होती है जो उन्हें मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत बनाती है. उनके खाने का भी मैन्युअल है, जिसका वो पालन करते हैं. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी पोषक तत्वों से भरपूर आहार खाते हैं. उनके डायट मैन्युअल के अनुसार वो ये सब खाते हैं.
– साबुत अनाज, फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद, लीन प्रोटीन, शाकाहारी विकल्प, जटिल कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें, स्वस्थ वसा देने वाले खाद्य पदार्थ, विटामिन और खनिज से भरपूर खानपान.
– पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों में चिकन, मछली, दाल, क्विनोआ, शकरकंद, मेवे और बीज भी शामिल हैं. वो क्रिएटिन को भी लेते हैं.

Tags: Australia Cricket Team, Cricket world cup, Yoga

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