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कुरुक्षेत्र: निरंतरता बनाम बदलाव की लड़ाई हैं ये चुनाव; मोदी बनाम कांग्रेस के स्थानीय क्षत्रपों में है मुकाबला

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कुरुक्षेत्र: निरंतरता बनाम बदलाव की लड़ाई हैं ये चुनाव; मोदी बनाम कांग्रेस के स्थानीय क्षत्रपों में है मुकाबला

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Kurukshetra: These elections are battle of continuity and change modi vs gehlot bhupesh and kamal nath

Assembly Elections 2023
– फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

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उत्तर भारत के तीन प्रमुख राज्यों मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ राजस्थान में विधानसभा चुनावों का शोर थम चुका है। वादों का दौर बीत चुका है और अब दलों के अपने अपने दावे हैं।तीन दिसंबर को इन चुनावों के नतीजे आ जाएंगे और तय हो जाएगा कि अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनावों में सत्ता पक्ष और विपक्ष में कौन ज्यादा जोश और हौसले से मैदान में उतरेगा। लेकिन इन विधानसभा चुनावों में दोनों तरफ से जो सियासी माहौलबंदी हुई है उसने साफ कर दिया है कि लोकसभा चुनावों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इससे भी ज्यादा घमासान होगा जितना कि इन चुनावों में हुआ है। इन चुनावों में मुख्य रूप से मुकाबला परिवर्तन और निरंतरता के नारों के बीच हुआ। जहां मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने परिवर्तन का नारा देकर चुनाव लड़ा तो छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा ने परिवर्तन की बात की। जबकि मध्य प्रदेश में भाजपा ने निरंतरता को मुद्दा बनाया तो छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस ने निरंतरता के लिए वोट मांगे।

इन विधानसभा चुनावों के प्रचार में मूर्खों के सरदार से लेकर पनौती जैसे विशेषणों ने न सिर्फ भाषा की मर्यादा तो तार तार कर दिया बल्कि राजनीतिक विरोध किस हद तक शत्रुता में बदल चुका है यह भी बता दिया। छत्तीसगढ़ में महादेव एप के कथित घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर लगने वाले आरोपों और मध्य प्रदेश में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे के करोड़ों रुपए के लेन देने के कथित वीडियो ने राजनीतिक भ्रष्टाचार को भी प्रचार के केंद्र में ला दिया। राजस्थान में कन्हैयालाल हत्याकांड के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने हिंदुत्व के ध्रुवीकरण का अपना चिर परिचित दांव चला तो चारो राज्यों में लगातार जातीय जनगणना और पिछड़ों दलितों आदिवासियों की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जातीय ध्रुवीकरण का नया दांव आजमाने की पूरी कोशिश की है।

मध्य प्रदेश जहां 2018 में कांग्रेस ने थोड़े अंतर से जीत कर अपनी सरकार बनाई थी, लेकिन 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक विधायकों के साथ दलबदल के बाद भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार बनाने से यहां चुनाव का मुख्य मुद्दा भाजपा और शिवराज सरकार के 18 साल बनाम कमलनाथ और कांग्रेस के डेढ़ साल के शासन और दलबदल करके सरकार छीनने का बन गया। अपने लंबे शासनकाल को लेकर पार्टी और जनता में संभावित सत्ता विरोधी रुझान को कमजोर करने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहना योजना के जरिए पात्र महिलाओं के खाते में बारह सौ रुपए प्रतिमाह देने का मजबूत दांव चला। जिसकी काट के लिए कांग्रेस योजना की राशि बढ़ाकर 15 सौ रुपए करने की घोषणा की।पूरा चुनाव लाड़ली बहना योजना बनाम कांग्रेस की गारंटियों के बीच लड़ा गया। जहां कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में परिवर्तन का नारा दिया तो भाजपा ने निरंतरता को अपना मुद्दा बनाया।






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