Home Breaking News Noida: भागवत बोले- बदलने होंगे अंग्रेजों के बनाए कानून, भारत आधारित हो तंत्र; समृद्ध लोग गरीबों की करें मदद

Noida: भागवत बोले- बदलने होंगे अंग्रेजों के बनाए कानून, भारत आधारित हो तंत्र; समृद्ध लोग गरीबों की करें मदद

0
Noida: भागवत बोले- बदलने होंगे अंग्रेजों के बनाए कानून, भारत आधारित हो तंत्र; समृद्ध लोग गरीबों की करें मदद

[ad_1]

RSS chief Mohan Bhagwat said that laws made by British will have to be changed noida

आरएसस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि अंग्रेजों के बनाए गए कानून को बदलना होगा। इस दिशा में प्रयास चल रहा है। अंग्रेजों के तंत्र में बहुत सारी गड़बड़ियां हैं। तंत्र को भारत के आधार पर रचने की आवश्यकता है। आरएसएस प्रमुख रविवार को शारदा विश्वविद्यालय में ‘स्व आधारित भारत’ विषय पर आयोजित प्रबुद्ध नागरिक समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बाह्य व आंतरिक सुरक्षा सहित कई अन्य ज्वलंत मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। संपत्ति के न्याय वितरण पर जोर देते हुए कहा कि समृद्ध लोग गरीबों की मदद करें।

युवाओं को अवसर देना चाहिए

डॉ. भागवत ने कहा कि सबको अवसर देने वाला तंत्र होना चाहिए। समाज की व्यवस्था को अपने अनुसार बनाना होगा। उत्पादन का न्यायिक वितरण होना चाहिए। युवाओं को अवसर देना चाहिए। तकनीकी का उपयोग मानवीय हित में होना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बोलते हुए कहा कि तकनीक मानवीय होनी चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं है। हमें रोजगार को मारने वाली तकनीक नहीं चाहिए, जो उपयोग हो उसे लेंगे। बाहर से जो लेंगे उसे देश के अनुकूल बनाकर लेंगे।

अपने मूल को पहचानने की जरूरत 

उन्होंने कहा कि स्व आधारित भारत पर विचार करने के लिए सबको आगे आना चाहिए। हमें अपने मूल को पहचानने की जरूरत है। भारत की अपनी प्रकृति है। विश्व में जो अच्छा है उसे लेना है, अंधानुकरण नहीं करना है। जब हम अपने बल पर काम करते हैं तो हमारी प्रतिष्ठा बढ़ती है। कहा कि स्व पुरुषार्थ, प्रगति की दिशा दिखाता है। भारत का बड़ा होना दुनिया को प्रतीत हो रहा है। दुनिया को मालूम हुआ कि एक काढ़े ने लोगों को कोरोना से जान बचाया। 

राष्ट्र बनते हैं बनाए नहीं जाते 

मोहन भागवत ने कहा कि भारत के आयुर्वेद को हेय दृष्टि से देखते थे। भारत की उन्नति की प्रतीक्षा सारी दुनिया कर रही है। राष्ट्र बनते हैं बनाए नहीं जाते हैं। बनाए हुए राष्ट्र मिट जाते हैं। इतिहास का जब जन्म हुआ तो हमें एक राष्ट्र के रूप में देखा गया, उस समय भी अनेकता, विविधता व कई सम्प्रदाय थे। इस अवसर पर विभाग संचालक मधुसूदन दादू, सूर्य प्रकाश टोंक, शारदा विवि के चांसलर पीके गुप्ता, वाइस चांसलर वाईके गुप्ता सहित मेरठ प्रांत के प्रबुद्ध वर्ग मौजूद रहे।

सद्भावना ही सभी समस्याओं का इलाज

डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि विश्व में अधिक से अधिक दोस्त बनाने चाहिए, जो देश हमारा सहयोग नहीं करते मुसीबत आने पर हम उनकी भी मदद करते हैं। सद्भावना ही सभी समस्याओं का इलाज है। प्रबुद्ध लोग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार ही सबकुछ नहींं कर सकती। भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी नेताओं के साथ आमजन की भी की है। 

पूजा नहीं कर्तव्य ही धर्म है

भौतिक और भौगोलिक विकास दोनों जरूरी है। भारत का प्रयोजन अक्षय है। सबको जोड़ने वाला है। पूजा नहीं कर्तव्य ही धर्म है। संविधान सभा में डॉ. आंबेडकर ने जो कहा सामाजिक समरसता में ही आता है। आज दुनिया में जो चल रहा है वह अपनापन नहीं है। सारे विश्व की अशांति का कारण स्वार्थ है। लेकिन भारत का मूल परोपकार है। भारत को स्व के आधार पर ही खड़ा होना होगा।

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here