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सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : Pixabay
विस्तार
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में 30 नवंबर से शुरू होने वाले वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के 28वें दौर में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों, जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल, मीथेन एवं कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए वित्तीय सहायता और अमीर देशों से विकासशील देशों को दिए जाने वाले मुआवजे जैसे मुद्दों पर गहन बातचीत होने की संभावना है।
दुनिया भर में घातक गर्मी, सूखा, जंगल की आग, तूफान और बाढ़ का असर आजीविका और जीवन पर पड़ रहा है। 2021-2022 में वैश्विक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। इसका लगभग 90 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन से आता है। कॉप-28 का आयोजन 30 नवंबर से 12 दिसंबर तक दुबई एक्सपो सिटी में होगा। इस दौरान किंग चार्ल्स तृतीय, पोप फ्रांसिस और लगभग 200 देशों के नेता इन मुद्दों को प्रमुखता से संबोधित करेंगे।
मुआवजे के मुद्दे पर बन सकती है गतिरोध की स्थिति
सम्मेलन में जलवायु संकट में कम योगदान देने के बावजूद जलवायु संकट का खामियाजा भुगतने वाले विकासशील और गरीब देशों को आर्थिक समर्थन के मुद्दे का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। पिछले साल मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित कॉप27 में अमीर देशों ने इस मुद्दे पर हानि और क्षति कोष स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की थी। हालांकि, बैठक के बाद धन आवंटन, लाभार्थियों और प्रशासन पर निर्णय लेने के लिए मुद्दे को एक समिति को सौंप दिया गया था। देशों के बीच मतभेदों के कारण एक अतिरिक्त बैठक भी की गई थी। समझौते के मसौदे को जलवायु वार्ता में अंतिम मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
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