Home Breaking News Telangana election: तेलंगाना की लड़ाई में 18, 12 और 13 वाला दांव, मोदी के इस भरोसे से क्या बदल जाएगी बाजी?

Telangana election: तेलंगाना की लड़ाई में 18, 12 और 13 वाला दांव, मोदी के इस भरोसे से क्या बदल जाएगी बाजी?

0
Telangana election: तेलंगाना की लड़ाई में 18, 12 और 13 वाला दांव, मोदी के इस भरोसे से क्या बदल जाएगी बाजी?

[ad_1]

Telangana election: the path to power is decided by the votes of Dalits, tribals as well as Muslims

Telangana election
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार


तेलंगाना में 30 नवंबर को चुनाव होने हैं। लेकिन इन चुनावों से पहले सियासी दशा और दिशा को बदलने वाले समीकरणों को साधने की सभी राजनीतिक चालें चली जा रही हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तेलंगाना में दलित, आदिवासी के साथ-साथ मुसलमानों के वोट से सत्ता का रास्ता तय किया जाता है। बीते दो चुनावों में तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर के हिस्से इन तीनों प्रमुख समुदाय के मिले वोट से सत्ता की गद्दी हासिल हुई थी। यही वजह है कि कांग्रेस ने दलित, आदिवासी और मुसलमानों पर एक साथ सियासी दांव आजमाने शुरू किए हैं। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने दलितों और आदिवासियों के सहारे राज्य में सत्ता पाने की अपनी जुगत लगाई है।

तेलंगाना की सियासत में दलित आदिवासी और मुस्लिम समुदाय का प्रमुख योगदान होता है। इन तीनों समुदायों के 43 फ़ीसदी वोट तय करते हैं कि तेलंगाना में सरकार किसकी बनेगी। आंकड़ों के मुताबिक तेलंगाना में 18 फ़ीसदी दलित और 12 फीसदी आदिवासी समुदाय के साथ-साथ 13 फीसदी मुस्लिम मतदाता शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार पीएस रेड्डी कहते हैं कि बीते दो चुनाव में तो इन तीनों प्रमुख समुदायों पर केसीआर का ही बड़ा हक बना था। नतीजतन वह 2014 और 2018 में तेलंगाना की सत्ता में काबिज हुए। इस बार फिर सभी राजनीतिक दल इन्हीं सियासी समीकरणों के माध्यम से जातीयता के आधार पर तेलंगाना में सत्ता पाने का रास्ता तैयार कर रहे हैं।

सियासी जानकारों का कहना है कि 2014 के विधानसभा चुनावों में 19 आरक्षित सीटों में केसीआर की पार्टी बीआरएस को 16 सीटें हासिल हुई थीं। इसी तरह 2018 के चुनाव में भी आरक्षित सीटों में केसीआर की पार्टी बीआरएस की हिस्सेदारी तकरीबन बराबर ही रही थी। राजनीतिक विश्लेषक रेड्डी कहते हैं कि 2014 और 2018 के चुनाव में केसीआर ने 18 फ़ीसदी दलित, 12 फ़ीसदी आदिवासी और 13 फ़ीसदी मुसलमानों के वोट बैंक से 2014 की बनी सरकार की नीतियों के चलते वोट बैंक में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की। अब दो चुनावों के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को तेलंगाना में सत्ता पाने का वह नुस्खा पता चल गया है, जिसके आधार पर केसीआर राज्य में सत्ता पाते आए हैं। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी दलित और आदिवासियों की योजनाओं को आगे कर और कांग्रेस दलित, आदिवासी और मुसलमान की योजनाओं के सहारे तेलंगाना की सियासत में बड़ा दांव लगा रही है।






[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here