Home Breaking News मिस्टर पंजाब हारा पर जीत गया मिस्टर इंडिया, पिता ने दी मेरे सपनों को उड़ान

मिस्टर पंजाब हारा पर जीत गया मिस्टर इंडिया, पिता ने दी मेरे सपनों को उड़ान

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मिस्टर पंजाब हारा पर जीत गया मिस्टर इंडिया, पिता ने दी मेरे सपनों को उड़ान

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कास्टिंग डायरेक्टर से एक्टर बने अभिनेता परमवीर सिंह  चीमा का मानना है कि कास्टिंग के दौरान उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखी। इसलिए उन्होंने कास्टिंग एजेंसी ज्वाइन की। यह अलग बात है कि कास्टिंग से आए कलाकारों को आसानी से काम मिल जाता है, लेकिन उन्हें भी कास्टिंग की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अभिनेता परमवीर सिंह चीमा को पहली बार वेब सीरीज ‘चमक’ में लीड भूमिका निभाने का मौका मिला है। परमवीर सिंह चीमा से अमर उजाला की खास बातचीत।




कास्टिंग डायरेक्टर बनने के बाद एक्टर बनने की राह कितनी आसान हो जाती है 

मुझे तो ऐसा नहीं लगता कि कास्टिंग डायरेक्टर बनने के बाद एक्टर बनने की राह आसान हो जाती है। यह अलग बात की है कि कास्टिंग के दौरान आपकी पहचान निर्माता-निर्देशकों से हो जाती है। लेकिन पहचान से सिर्फ आपको ऐसे ही रोल मिलेंगे जिससे दर्शक आप को नहीं पहचानेंगे। अच्छे किरदार के लिए आपको भी कास्टिंग प्रक्रिया से गुजरना ही पड़ता है। मैंने देखा है कि बहुत सारे एक्टर कास्टिंग एजेंसी इस लिए ज्वाइन कर लेते हैं कि उन्हें इस बात की उम्मीद होती है कि उन्हें एक्टर के तौर पर काम मिलने लगेगा, लोगों में यह बहुत बड़ा भ्रम है। काम सिर्फ आपकी प्रतिभा पर ही मिलता है।


आपके अभिनय सफर की शुरूआत कैसे हुई?

मुझे सबसे पहले जी टीवी के शो ‘कलीरे’ में काम करने का मौका मिला, लेकिन मुझे टीवी पर काम करने में कोई भी दिलचस्पी नहीं थी क्योंकि टीवी पर आपकी सोशल लाइफ खत्म हो जाती है। मैंने सोच लिया कि मुझे फिल्में ही करनी है। मैंने बहुत सारे ऑडिशन दिए, लेकिन मुझे काम नहीं मिला। फिर मैंने कास्टिंग ज्वाइन कर ली। करीब डेढ़ साल तक मैंने कास्टिंग डायरेक्टर  कवीश सिन्हा के साथ काम किया। इस दौरान मैंने ‘रॉकेट बॉयज’, ‘सत्यमेव जयते 2’, ‘मुंबई डायरीज’ आदिकास्टिंग की। कास्टिंग के दौरान मुझे पता चला कि मेरे अंदर क्या कमियां हैं? 


आपने तो वकालत की पढ़ाई भी की थी?

मैं जालंधर का रहने वाला हूं। जब लॉकडाउन के दौरान वापस घर चला गया तो मुंबई आने के बारे में नहीं सोच पा रहा था। मुंबई में पिछली बार मैंने बहुत सारे ऑडिशन दिए लेकिन काम नहीं मिला। पिता जी का मन रखने के लिए मैंने वकालत की पढाई की थी, मन में ख्याल आया कि वकालत की प्रैक्टिस शुरू कर दूं।  तभी मुकेश छाबड़ा की टीम से वेब सीरीज ‘टब्बर’ के लिए कॉल आया। सोचा इसके लिए भी एक बार ऑडिशन दे ही देता हूं। पापा कहने लगे कि सब कुछ छोड़कर क्यों आ गया? पैसे मैं दे रहा हूं।  मुंबई आया और ‘टब्बर’ के लिए फाइनल हो गया। मुकेश छाबड़ा ने कहा कि तुमने अच्छा काम किया है आगे और भी अच्छा काम मिलेगा। फिर उन्होंने ‘चमक’ में कास्टिंग की। 


मतलब घर परिवार का आपको पूरा सहयोग मिला?

बिल्कुल, मेरे पिता पिता सर्वजीत सिंह चीमा किसान हैं। जालंधर से 25 किलोमीटर दूर करतारपुर एक जगह है वहां पर हमारी खेती है। पिता जी ने भी वकालत की पढाई की है, लेकिन उन्होंने कभी वकालत की प्रैक्टिक्स नहीं की। पापा की ही इच्छा थी कि पहले वकालत की पढाई पूरी कर लूं, उसके बाद वह कभी नहीं पूछेंगे कि जीवन में क्या कर रहा हूं। मेरी सगी मां की मृत्यु बचपन में हो गई थी, मेरी दूसरी मां मुझे हरपीत कौर सगे बेटे से भी बढ़कर प्यार करती हैं।  


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