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MP News: IAS अरविंद जोशी की मौत के दो साल बाद आया आईटीएटी का फैसला, आयकर विभाग का असेसमेंट खारिज

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MP News: IAS अरविंद जोशी की मौत के दो साल बाद आया आईटीएटी का फैसला, आयकर विभाग का असेसमेंट खारिज

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MP News: Two years after IAS Arvind Joshi's death, ITAT dismisses IT disproportionate assets case

अरविंद जोशी (फाइल फोटो)
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार


इनकम टैक्स छापे में 350 करोड़ की बेनामी संपत्ति मिलने के बाद बर्खास्त किए गए रिटायर्ड IAS अरविंद जोशी के मौत के दो साल बाद आयकर अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने उनके खिलाफ आयकर विभाग के असेसमेंट को खारिज कर दिया है। यह फैसला ITAT ने सुनाया तो सात नवंबर को था, लेकिन रविवार को ही फैसले की कॉपी वेबसाइट पर अपलोड की गई है। 

1979 बैच के आईएएस अफसर अरविंद जोशी और उनकी आईएएस पत्नी टीनू जोशी के भोपाल स्थित आवास पर आयकर विभाग ने फरवरी 2010 में छापा मारा था। यहां से आयकर विभाग को बेहिसाब संपत्ति मिली थी। इसका आकलन करीब 350 करोड़ रुपये किया गया था। इस मामले में सरकार ने दोनों आईएएस अधिकारी को निलंबित कर उसकी जांच पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच से कराई थी। इस मामले में अरविंद जोशी की अप्रवासी भारतीय बहनों को भी आरोपी बनाया गया था। कुछ अन्य लोग भी आरोपी थे। आयकर विभाग की जांच में आय के मुकाबले उनकी संपत्ति 3150% अधिक थी। आयकर विभाग के असेसमेंट को अरविंद जोशी ने ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी। इस मामले की सुनवाई चल रही थी, उसी दौरान चार मार्च 2022 को 68 वर्ष की उम्र में अरविंद जोशी की मौत हो गई। इसके 10 माह बाद उनकी मां की भी मौत हो गई। 2021 में मामले में आरोपी उनकी बहन आशा जोशी की भी मौत हो गई। इस समय इस मामले में आरोपी उनके पिता 98 वर्षीय एचएम जोशी और पत्नी टीनू जोशी ही हैं, जो कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। 

आयकर विभाग ने 25 स्थगन लिए 

ट्रिब्यूनल ने आयकर विभाग पर भी नाराजगी जताई, जिसने इस मामले की सुनवाई के दौरान 25 बार स्थगन लिए। यह दुर्लभ मामला है, जहां ट्रिब्यूनल ने जोशी के पक्ष में एकतरफा आदेश सुनाया है। साथ ही आयकर विभाग के अधिकारियों और वकीलों की बार-बार अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। 

अब क्या होगा? 

लोकायुक्त और प्रवर्तन निदेशालय ने आईएएस जोशी दंपती के खिलाफ आयकर विभाग के असेसमेंट के आधार पर ही कार्यवाही की थी। अब जब आयकर विभाग का असेसमेंट ही खारिज हो गया है तो पूरी कार्यवाही अवैध दस्तावेजों पर आधारित हो गई है। ट्रिब्यूनल के आदेश के दूरगामी परिणाम होंगे क्योंकि लोकायुक्त और ईडी का इस मामले में पलड़ा कमजोर हुआ है। जो भी कानूनी कार्रवाई टीनू जोशी के खिलाफ हुई है, वह भी सवालों के घेरे में आ गई है।  

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