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BSF Raising Day: 730 दिन में पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर नहीं बचेगा कोई छिद्र, बॉर्डर होंगे सौ फीसदी सुरक्षित

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BSF Raising Day: 730 दिन में पाकिस्तान-बांग्लादेश सीमा पर नहीं बचेगा कोई छिद्र, बॉर्डर होंगे सौ फीसदी सुरक्षित

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BSF Raising Day: In next two years, Pakistan and Bangladesh border will be completely secured by fencing

BSF Raising Day
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar

विस्तार


पिछले 10 वर्षों में सीमाओं पर लगभग 560 किलोमीटर बाड़ लगाकर घुसपैठ और स्मगलिंग पर लगाम कसने का काम किया गया है। अगले दो साल में पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह से बाड़ लगाकर सुरक्षित कर लिया जाएगा। सीमा पर 1100 किलोमीटर क्षेत्र में फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं। 542 नए बॉर्डर आउटपोस्ट और 510 ऑब्जरवेशन पोस्ट टावर बनाए गए हैं। पहली बार हरामी नाला क्षेत्र में ऑब्जरवेशन टावर बनाए गए हैं। 637 आउटपोस्ट पर बिजली और लगभग 500 स्थानों पर पानी कनेक्शन दिए गए हैं। इसके अलावा 472 जगह पर सोलर प्लांट लगाकर सीमा की सुरक्षा करने वाले जवानों की सहूलियत को सुनिश्चित किया गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को झारखंड के हजारीबाग में सीमा सुरक्षा बल के 59वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए यह बात कही है।

शाह ने सीमा सुरक्षा बल की वार्षिक पत्रिका ‘बॉर्डरमैन’ का भी विमोचन किया। शाह ने कहा, जीवनपर्यंत कर्तव्य बीएसएफ का सिर्फ घोषवाक्य नहीं है, बल्कि आज तक 1900 से अधिक सीमा प्रहरियों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देकर इस वाक्य को चरितार्थ भी किया है। लाखों सीमा प्रहरियों ने अपने जीवन का स्वर्णिम काल कठिनतम परिस्थितियों में परिवार से दूर रहकर बिताया है। देश की सीमाओं की सुरक्षा की प्रथम पंक्ति के रूप में बीएसएफ ने जिस तरह से देश की दुर्गम सीमाओं की सुरक्षा की है, उससे पूरा देश सीमा सुरक्षा बल के इन वीर जवानों पर गर्व करता है। जम्मू-कश्मीर के बर्फीले इलाके, पूर्वोत्तर के पहाड़, गुजरात और राजस्थान के रेगिस्तान हों, गुजरात का दलदली इलाका हो या फिर सुंदरवन और झारखंड के घने जंगल हों, बीएसएफ ने हमेशा मुस्तैद रहते हुए दुश्मन के नापाक इरादों को विफल किया है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, केंद्र सरकार की नीतियों ने सीमा प्रहरियों के काम के बोझ़ को बहुत कम किया है। पिछले 5 वर्षों में बीएसएफ ने 30 हजार किलोग्राम से ज्यादा नारकोटिक्स पकड़ने का काम किया है। नारकोटिक्स न केवल देश की भावी पीढ़ी को खोखला करता है, बल्कि इससे उत्पन्न पैसा आतंकवाद का वित्त पोषण भी करता है। बॉर्डर पर बने इस ट्रेड लिंक के जरिए हथियारों की आवाजाही भी होती है। इन तीनों कारणों से ये बहुत ज़रूरी है कि पूरी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नारकोटिक्स के व्यापार के प्रति हमारी कठोर, जीरो टॉलरेंस वाली और संवेदनशील नीति हो। बीएसएफ ने ये काम बहुत अच्छे तरीके से किया है। बीएसएफ ने 2500 से ज्यादा हथियार पकड़े हैं। एंटी ड्रोन टेक्नोलॉजी के साथ बीएसएफ ने बहुत अच्छे प्रयोग किए हैं। सीमा सुरक्षा बल ने अब तक 90 से ज्यादा विदेशी ड्रोन मार गिराए हैं। बीएसएफ ने अपनी ड्रोन और साइबर फॉरेंसिक लैब स्थापित कर आरएंडडी के क्षेत्र में भी बहुत अच्छा काम किया है। केंद्र सरकार ने एरिया डोमिनेशन के लिए फील्ड फॉर्मेशन के साथ 100 ड्रोन उपलब्ध कराए हैं। अब वह दिन दूर नहीं है, जब देश वामपंथी उग्रवाद से पूर्णतया मुक्त हो जाएगा। विगत 10 वर्षों में केंद्र सरकार ने सातत्यपूर्ण प्रयास किया है। इसके चलते वामपंथी घटनाओं में 52 फीसदी और मृत्यु की घटनाओं में 70 फीसदी की कमी आई है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिले 96 से घटकर 45 रह गए हैं। अंतिम प्रहार करने के लिए सीआरपीएफ, बीएसएफ और आईटीबीपी तैयार है।






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