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जाकिर हुसैन का काम और नाम दोनों फिल्मों में खूब शोहरत पा चुका है। वह छोटे से छोटे किरदार में भी जान डाल देने वाले अभिनेता के तौर पर जाने जाते हैं, लेकिन अब भी उनके पास तमाम फोन उन लोगों को भी आते हैं जो दरअसल तबला वादक जाकिर हुसैन को तलाश रहे होते हैं। तब जाकिर हुसैन को कहना ही होता है, ‘जनाब, मैं उस्ताद जाकिर हुसैन नहीं सिर्फ जाकिर हुसैन बोल रहा हूं।’ जाकिर हुसैन का मानना है कि किसी कलाकार को मिलने वाली तारीफ से उसका हौसला बढ़ता है लेकिन अच्छे काम को देखकर कोई तय फीस में इजाफा कर दे, ऐसा कम ही होता है। जाकिर जल्द ही कमल हासन के साथ फिल्म ‘इंडियन 2’ के एक दमदार किरदार में नजर आने वाले हैं, उनसे ‘अमर उजाला’ की एक खास बातचीत।
आपको कब लगा कि अभिनय में करियर बनाना चाहिए?
हम लोग मेरठ के पास एक कस्बा जानी खुर्द है, वहां रहते थे। वहां से दिल्ली आए तो पहली बार टेलीविजन देखा। दिल्ली में पढाई के दौरान ही पहले थियेटर और फिर सिनेमा की तरफ रुझान हो गया। दिल्ली में स्मॉल थियेटर से शुरुआत की और फिर श्री राम सेंटर फॉर परफार्मिंग आर्ट्स में शामिल हो गया। इसके बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में शामिल से स्नातक की उपाधि हासिल की।
और, दिल्ली से मुंबई कैसे आना हुआ और पहला मौका कैसे मिला ?
मैं मुंबई 1997 में आया। मैं समझता हूं कि अगर आप अपने शहर में अच्छा काम कर रहे हैं तो आप की तारीफ दूसरे शहर तक पहुंच ही जाती है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। मुंबई आया तो सबसे पहले डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी के ऑफिस से फोन आया। उस समय वह धारावाहिक ‘एक और महाभारत’ बना रहे थे। इसमें एक छोटा सा किरदार निभाने का मौका मिला। इससे पहले दिल्ली में एक सीरियल ‘फिरदौस’ में मैं काम कर चुका था। ‘एक और महाभारत’ के बाद मुझे सबसे बड़ा मौका रमेश सिप्पी के धारावाहिक ‘गाथा’ में मिला।
फिल्मों में पहला मौका कब और कैसे मिला?
राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘एक हसीना थी’ में छोटा सा संजीव नंदा का किरदार निभाया था जिसे श्रीराम राघवन ने निर्देशित किया था। इस फिल्म में मेरा किरदार राम गोपाल वर्मा को काफी पसंद आया था। उन दिनों मैं सीरियल की शूटिंग में व्यस्त था तभी मेरे एक मित्र ने बताया कि रामू के यहां एक फिल्म बन रही है। मैं राम गोपाल वर्मा से मिला और उन्होंने मुझे ‘सरकार’ में रशीद की भूमिका के लिए फाइनल कर लिया। देखा जाए तो सही मायने में मेरे करियर को सही दिशा देने वाली फिल्म ‘सरकार’ ही है।
श्याम बेनेगल की फिल्म ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो’ में इन्हीं दिनों आपने किया..
इस फिल्म में मैंने शौकत मालिक का छोटा सा किरदार निभाया था। पूरी फिल्म में मेरे दो ही सीन थे लेकिन मेरा काम श्याम बाबू को बहुत पसंद आया। जब मैंने शूटिंग कर ली, तो प्रोडक्शन टीम के लोग मेरे पास आए और बोले कि आप का दूसरा कांट्रेक्ट बनाना पड़ेगा। आपकी परफॉर्मेंस को देखकर आपका मेहनताना बढ़ाया जा रहा है। अच्छे काम के बदले पैसे बढ़ाकर दे दिए जाएं तो बहुत खुशी मिलती है। ऐसा कोई नहीं करता है।
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