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भूपिंदर बब्बल, राज शेखर, मनन भारद्वाज, बी प्राक, जानी, श्रेया घोषाल, विशाल मिश्रा, सोनू निगम और हर्षवर्धन रामेश्वर, ये उन लोगों के नाम हैं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर रिलीज के पांचवें दिन ही ब्लॉकबस्टर घोषित हो चुकी फिल्म ‘एनिमल’ के कुल आठ गानों में से पांच सबसे श्रेष्ठ गानों की रचना की है। हिंदी सिनेमा के संगीत की समीक्षा करने का एक दौर हुआ करता था, और संगीत समीक्षा तब और भी अपने शबाब पर थी जब हिंदी फिल्मों में किसी एक फिल्म का एक गीतकार और एक ही संगीतकार हुआ करता था। फिर, दौर आया संगीत की जगह हुक लाइन तलाशने का, कोई पहले से मौजूद देसी या विदेशी बीट पर लाइनें बिठाने का और ऑटो ट्यूनर से संगीत सितारे बनाने का। संगीत की आत्मा खोती गई और संगीत समीक्षाओं का चलन भी सिमटने लगा। लेकिन, निर्देशक संदीप रेड्डी वंगा ने एक बार फिर हिंदी सिनेमा को ये सिखाया है कि संगीत फिल्म की कहानी के अनुरूप हो, उसकी आत्मा को समझता हो तो वह उसे दर्शकों की रूह तक पहुंचाने का काम बहुत ही सटीक तरीके से कर सकता है। और, फिल्म को उस ऊंचाई तक ले जा सकता है जहां, या तो लोग फिल्म के साथ आएंगे, या उसका विरोध करेंगे, लेकिन उसे अनदेखा तो बिल्कुल नहीं कर पाएंगे। तो आइए जानते हैं, फिल्म ‘एनिमल’ के ऐसे ही पांच गानों के बारे में…
गीत: अर्जन वैली
गायक: भूपिंदर बब्बल
गीतकार: भूपिंदर बब्बल
संगीतकार: भूपिंदर बब्बल
पंजाब की मिट्टी की पहचान है फिल्म ‘एनिमल’ का गीत, ‘अर्जन वैली ने पैर जोड़ के गंडासी मारी..’। पंजाबी लोकगीतों में जग्गा डाकू, जियोना मौर और अर्जन वैली के नाम बहुत सुनाई देते हैं। किसी दंतकथा में अर्जन वैली को हरि सिंह नलवे का बेटा बताया जाता है किसी में उनका परिचय किसी और रूप में आता है। लेकिन, पंजाबी लोक गीत ‘अर्जन वैली’ को भूपिंदर बब्बल ने जिस अंदाज में फिल्म ‘एनिमल’ के लिए गाया है, वह वीर रस का एक अलग ही भाव दर्शको के सामने लेकर फिल्म मे आता है। फिल्म में ये गीत तब बजता है जब रणविजय सिंह (रणबीर कपूर) को मारने के लिए असरार हक (बबलू पृथ्वीराज) लड़ाकों की पूरी फौज लेकर हमला करता है और रणविजय अपने भाइयों को पीछे कर अकेले ही इनका सामना करने उतरता है। पूरा गाना इस लड़ाई के फिल्मांकन में बजता रहता है। गीत के बोल और इसका संगीत दर्शकों में जोश भरते हैं और अगर सिर्फ इससे सुनना भी हो तो इसमें एक अलग ही रोमांच श्रोताओं को महसूस होता है।
गीत: सारी दुनिया जला देंगे
गायक: बी प्राक
गीतकार: जानी
संगीतकार: जानी
फिल्म ‘एनिमल’ के गीत ‘अर्जन वैली’ के बाद जो दूसरा सबसे लोकप्रिय गीत है वह है, ‘सारी दुनिया जला देंगे..’। ये गीत फिल्म में टुकड़ों टुकड़ों में आता है। फिल्म के अलबम में गीत जहां से शुरू होता है, वह अंतरा फिल्म के क्लाइमेक्स में तब आता है जब रणविजय सिंह (रणबीर सिंह) और अबरार हक (बॉबी देओल) में हवाई पट्टी पर द्वंद्व होता है। दोनों अपने अपने साथियों को रुकने को कहते हैं और खुद ही आपस में बिना हथियार भिड़ते हैं। दोनों का खून का रिश्ता है और इस मौके पर जब गीत की ये लाइन बजती है कि, ‘हो बदला नी पाया ये, जिदा इंतजार सी, आज रब्बा वही दिन आया है..’ तो बी प्राक की आवाज दर्शकों के रोंगटे खड़ी कर देती है। इस गाने के दो अंतरे फिल्म में दो और मार्मिक मौकों पर बजते हैं, और तीनों बार इसकी लाइनें दर्शकों पर अलग अलग असर करती हैं। जानी का संगीत और उनके ही लिखे बोल पर गायक बी प्राक ने इस गीत को बहुत ही तान के साथ और सधकर गाया है।
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गायक: श्रेया घोषाल व मनन भारद्वाज
गीतकार: मनन भारद्वाज
संगीतकार: मनन भारद्वाज
फिल्म ‘एनिमल’ के संगीत की जो सबसे बड़ी खासियत है वो ये कि इसके गीतों में गीत के बोलों और गायकों की गायिकी पर खास ध्यान दिया गया है। इसका असर देखने सुनने वालों पर कायम रहे, इसके लिए वाद्य यंत्रों का कम से कम प्रयोग किया गया है। और, ये प्रयोग अपने उत्कर्ष पर पहुंचता है फिल्म के गीत ‘कश्मीर’ में। पता नहीं आपने किसी हिंदी फिल्म में कोई गीत इससे पहले बिना किसी संगीत के सुना है या नहीं लेकिन फिल्म ‘एनिमल’ के इस गीत में एक भी वाद्य यंत्र का प्रयोग ही नहीं है। श्रेया घोषाल जब अपनी मधुर आवाज में गाती हैं, ‘ओढूंगी ऐसे मैं तुझको पिया सर्दी मुझको सतायेगी कैसे, तुझको लगाऊंगी ऐसे गले कोई गुम हो जाता है जैसे’ तो सीधे ‘बंदिनी’ के लिए लिखा गुलजार का गीत ‘मोरा गोरा अंग लइले, मोहे स्याम रंग दइदे’ याद आता है। और, इसके पहले खुद ‘कश्मीर’ के गीतकार और संगीतकार जब गाते हैं, ‘ले तो चलूँ में तुझको वहां पे, लेकिन वहां पर सर्दी बड़ी है, कब मैं लगाऊंगा तुझको गले, खुदा की कसम मुझे जल्दी बड़ी है’, तो इस बात पर भी गौर करने का मन करता है कि आखिर सब अरिजीत से ही गाने गवाने के पीछे क्यों पड़े रहते हैं, दम तो मनन की आवाज में भी कम नहीं हैं। फिल्म ‘एनिमल’ का ये बेहद रूमानी गीत है और अपनी खास संगीत रचना के लिए इसे बरसों बरस याद किया जाएगा।
गायक: विशाल मिश्रा
गीतकार: राज शेखर
संगीतकार: विशाल मिश्रा
‘पहले भी मैं तुमसे मिला हूं, पहली दफा ही मिलके लगा, तूने छुआ जख्मों को मेरे, मरहम मरहम दिल पे लगा.. ’, ये एक और गीत है फिल्म ‘एनिमल’ का, जो फिल्म की कहानी और इसके फिल्मांकन को मजबूत सहारा देता है और कहानी को आगे ले जाने में सहायक होता है। फिल्म ‘एनिमल’ के लिए इसके निर्देशक संदीप रेड्डी वंगा ने गीतों को कहानी में कुछ इस तरह पिरोया है कि दर्शक इनके परदे पर आते ही लू ब्रेक के लिए भागता नहीं है। करीब साढ़े तीन घंटे की फिल्म में इसके गाने दर्शकों को कभी रोमांच देते हैं तो कभी राहत। और, राहत देने वाले गीत लिखने में न राजशेखर का कोई सानी है और न ही इस गीत के संगीतकार विशाल मिश्रा का। विशाल मिश्रा ने ही इसे गाया भी है और भूपिंदर बब्बल, बी प्राक, श्रेया घोषाल और मनन भारद्वाज के गाए गीतों के बीच अपने इस गीत को भी टॉप 5 में ला खड़ा किया है। गीत के बोल और इसके संगीत की रवानी दोनों चित्ताकर्षक बन पड़े हैं।
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