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पूर्व सीएम वसुंधरा राजे (फाइल फोटो)
– फोटो : अमर उजाला
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राजस्थान के भावी मुख्यमंत्री को लेकर प्रभारी अरुण सिंह का कहना है कि भाजपा संसदीय बोर्ड का निर्णय सभी को मानना होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने भी राजस्थान के मुख्यमंत्री को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अभी किसी का नाम तय नहीं हुआ है। इसके समानांतर योगी बाबा बालकनाथ रेस में अपना नाम सुनकर फूले नहीं समा रहे हैं। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने तो उन्हें बधाई तक दे दी। वहीं भाजपा की इस रेस से बेखबर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजनीतिक भविष्य को लेकर दम ठोंकने का कोई अवसर नहीं गंवाना नहीं चाहती।
वसुंधरा के करीबी विधायक कालीचरण सराफ ने बड़ा दावा किया है। वह वसुंधरा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में 70 विधायकों का दावा कर रहे हैं। यह दावा करने वाले कालीचरण कोई अकेले नहीं हैं। वसुंधरा के करीबी और जीतकर आए चार विधायकों ने अमर उजाला को भिन्न भिन्न संख्या गिनाई। एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जीतकर आने वाले 42 विधायक महारानी के साथ हैं। वसुंधरा के करीबी एक और नेता का दावा है कि 32 विधायक वसुंधरा का साथ देंगे। इनमें अधिकांश उनके रात्रिभोज में शामिल हुए थे। सतीश पूनिया के विरोधी भाजपा नेता ने यह संख्या 36 बताई है। सुरेश रावत, बहादुर कोली, गोपीचंद मीणासमाराम की भी पहली पसंद वसुंधरा ही हैं।
क्या इस बार चूकेंगी महारानी वसुंधरा राजे?
जयपुर में वसुंधरा की तारीफ करने वाले भाजपा नेताओं की कमी नहीं है। एक नेता जी कहते हैं कि 7 सांसदों ने चुनाव लड़ा था। तीन चुनाव हार गए। इन्हें तो केन्द्र ने ही मैदान में उतारा था। वह कहते हैं कि पूरे चुनाव में वसुंधरा ने 60 जनसभाएं की। भाजपा के तमाम बागी नेताओं के खिलाफ कोई जनसभा और प्रचार नहीं किया। वह कहते हैं कि नतीजों की समीक्षा कीजिएगा तो कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सही बात यह है कि वसुंधरा के मुकाबले भाजपा के पास राजस्थान में कोई लोकप्रिय नेता नहीं है। माना जा रहा है कि इसे वसुंधरा राजे भी बखूबी समझती हैं।
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