Home World जनता भूखी पर मौज कर रहे मादुरो, तानाशाह किम जोंग से कम खतरनाक नहीं वेनेजुएला के राष्ट्रपति

जनता भूखी पर मौज कर रहे मादुरो, तानाशाह किम जोंग से कम खतरनाक नहीं वेनेजुएला के राष्ट्रपति

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जनता भूखी पर मौज कर रहे मादुरो, तानाशाह किम जोंग से कम खतरनाक नहीं वेनेजुएला के राष्ट्रपति

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Venezuela Annex Guyana: अगर आप दुनिया के नक्शे को घुमाकर दक्षिण अमेरिका महाद्वीप पर नजर डालेंगे तो सबसे ऊपर वेनेजुएला दिखाई देगा. उसके एक तरफ कोलंबिया, इक्वाडोर है तो दूसरी तरफ पूर्व में गुयाना और सूरीनाम हैं. वेनेजुएला को भारत के लोग मुख्य रूप से तेल उत्पादक देश और पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज से जानते पहचानते हैं. शावेज ऐसे नेता हुए जिन्हें देश ही नहीं, दुनिया में सम्मान मिला लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ऐसे नहीं हैं. उनके खिलाफ अक्सर विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि इस देश में गरीबी, पानी और बिजली की किल्लत के कारण लाखों की संख्या में पलायन हो रहा है. लोग मादुरो की नीतियों से खुश नहीं हैं. जनता भूख से मर रही है लेकिन मादुरो बेफिक्र हैं यही वजह है कि उन्हें वेनेजुएला का ‘किम जोंग उन’ कहा जाता है. आजकल मादुरो अपने एक फैसले से चर्चा में हैं और क्षेत्र में जंग छिड़ने के आसार बन गए हैं. उन्होंने ऐसे क्षेत्र में तेल निकालने का अभियान शुरू करने की घोषणा की है जिसको लेकर पड़ोसी देश गुयाना से विवाद है. आगे बढ़ने से पहले जान लीजिए कि गुयाना में करीब 30 फीसदी हिंदू आबादी रहती है.

 

मादुरो का एक फैसला और… 

मादुरो ने सरकारी कंपनियों को फौरन गुयाना के एस्सेकिबो क्षेत्र में तेल, गैस और अन्य खनिजों को निकालने का मिशन शुरू करने का निर्देश दिया है. यह फैसला हाल में हुए एक जनमत संग्रह के बाद लिया गया जिसमें मादुरो की जीत की बात कही गई है. रेफरेंडम में ग्रीस से भी बड़े तेल समृद्ध क्षेत्र की संप्रभुता को लेकर सवाल किया गया था. इस जनमत संग्रह पर काफी विवाद हुआ लेकिन वेनेजुएला अब इस क्षेत्र पर अपना दावा कर रहा है. कहा जा रहा है कि 95 फीसदी लोगों ने ‘हां’ में वोट किया है. मादुरो अब लाइसेंस देकर वहां सरकारी कंपनी की शाखा स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. 

वेनेजुएला vs गुयाना, कौन है पावरफुल

जिस क्षेत्र पर वेनेजुएला के राष्ट्रपति दावा कर रहे हैं, उसकी सीमाओं को लेकर काफी समय से विवाद है. गुयाना कहता है कि 1899 में सीमाएं तय हो गई थीं. उसने वेनेजुएला के फैसले की निंदा की है. हालांकि दोनों देशों की सेनाओं की तुलना नहीं की जा सकती है. वेनेजुएला के पास ज्यादा मजबूत आर्मी है. हां, उसके आर्थिक संकट के कारण सेना की क्षमता कमजोर जरूर हुई है. इसकी बानगी ऐसे जान लीजिए कि उसके पास मौजूद रूस में बने सुखोई एसयू-30 लड़ाकू विमान केवल 50 प्रतिशत चालू हालत में हैं. फिर भी गुयाना से उसकी स्थिति मजबूत है.

कभी बस चलाते थे मादुरो

2024 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और मादुरो को लग रहा है कि विपक्ष की स्थिति मजबूत है. ऐसे में एक्सपर्ट मान रहे हैं कि वह अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए ताबड़तोड़ फैसले ले रहे हैं. कम लोगों को पता होगा कि मादुरो राजनीति में आने से पहले बस ड्राइवर हुआ करते थे. मीडियम क्लास परिवार में जन्मे मादुरो ने बिना ग्रेजुएशन किए स्कूल छोड़ दिया और बस चलाने लगे. पहले यूनियन नेता बने और जल्द ही शावेज के धाकड़ सपोर्टर के तौर पर पहचान बनाई. शावेज के विदेश मंत्री बनने से पहले वह असेंबली के स्पीकर थे. मौत से पहले शावेज ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था.

500 चाहिए, मिलता है केवल 5

2013 के बाद देश गरीबी के दलदल में फंसता गया लेकिन उन्होंने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया. प्राइवेट सेक्टर की कमर टूटी और अर्थव्यवस्था चौपट होने लगी. जल्द ही महंगाई आसमान छूने लगी। बीबीसी की एक रिपोर्ट बताती है कि वेनेजुएला में खाने-पीने की चीजें खरीदने के लिए एक आम परिवार की कमाई 500 डॉलर होनी चाहिए लेकिन न्यूनतम वेतन केवल 5 डॉलर प्रति महीने है. इस तरह से मादुरो की छवि एक तानाशाह की बन गई है. 

लैटिन अमेरिकी मीडिया में मादुरो को ‘वेनेजुएला का किम जोंग उन’ कहा जाता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि लोग दूध, दवा, टॉयलट पेपर के लिए लाइन में लगे रहते हैं लेकिन सरकार को कोई फिक्र नहीं है. जनता ने जब भूख और भोजन की शिकायत करनी शुरू की तो मादुरो ने साफ कह दिया कि वे अपने खाली पेट की शिकायत उनसे न करें. जो भी नेता या अफसर खिलाफ बोलता है उसे सजा दे दी जाती है. 

वेनेजुएला की हालत ऐसे समझ लीजिए कि 2006 में तीन बेडरूम का अपार्टमेंट राजधानी में जिस भी रेट में खरीदा गया हो उसकी कीमत 2019 तक एक डॉलर से भी कम हो गई थी. अगर आप इसे बेच भी दिए तो उस पैसे से वेनेजुएला में टॉयलट पेपर नहीं मिलता. हाल के वर्षों में यूएन ने कई बार कहा कि दवाओं की कमी से वेनेजुएला के लोग मर रहे हैं. पांच साल पहले तक 20 लाख लोग देश छोड़कर खाना, दवा और पैसे के लिए पलायन कर चुके थे। फिर देश का मुखिया पड़ोसी से भिड़ना चाहता है.  

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