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रोहित भट्ट/ अल्मोड़ा. विमेंस प्रीमियर लीग (Women’s Premier League 2024) के दूसरे सीजन के लिए शनिवार को मुंबई में नीलामी हुई. भारतीय महिला क्रिकेट टीम की गेंदबाज एकता बिष्ट (Ekta Bisht) को रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) ने 60 लाख रुपये में खरीदा. एकता का बेस प्राइस 30 लाख रुपये था. WPL के पहले सीजन में उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला था. पिछले सीजन में भी उनका बेस प्राइस 30 लाख रुपये था. ऑक्शन के बाद उन्होंने RCB का हिस्सा बनने पर खुशी जताई. एकता ने ‘लोकल 18’ से बातचीत में कहा कि उन्होंने लगातार जो डोमेस्टिक और लीग मैच में प्रदर्शन किया है, इसी आधार पर आरसीबी ने उनपर भरोसा जताया है. वह इस भरोसे पर खरा उतरेंगी और अपनी टीम के लिए 100 प्रतिशत देंगी.
एकता बिष्ट उत्तराखंड के अल्मोड़ा के खजांची मोहल्ले की रहने वाली हैं. वह एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता का नाम कुंदन सिंह बिष्ट और माता का नाम तारा बिष्ट है. कुंदन सिंह पूर्व सैनिक हैं. सेवानिवृत्त होने के बाद वह अल्मोड़ा आए और उन्होंने 1988 में यहां चाय की एक दुकान खोली. एकता अपने परिवार में सबसे छोटी हैं. उनके दो बड़े भाई-बहन हैं. उन्होंने 6 साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू किया था.
श्रीलंका के खिलाफ हैट्रिक
एकता बिष्ट भारत की पहली ऐसी महिला गेंदबाज हैं, जिन्होंने 2012 में श्रीलंका के खिलाफ टी-20 मुकाबले में हैट्रिक ली थी. इसके अलावा उन्होंने अपनी फिरकी से पाकिस्तान के खिलाफ दो बार 5 विकेट भी लिए हैं. इतना ही नहीं, एकता की गेंदबाजी के मुरीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) भी हैं. एकता जब भी अल्मोड़ा में होती हैं, तो वह अक्सर स्टेडियम में प्रैक्टिस करती हुई दिख जाती हैं. वह युवा खिलाड़ियों को भी गेंदबाजी की टिप्स देकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं.
भाई ने टूर्नामेंट में बनाया कैप्टन
अपने करियर के बारे में बात करते हुए एकता बिष्ट ने कहा कि अभी तक का उनका पूरा सफर काफी अच्छा रहा. काफी लोग मिले, जिन्होंने उनकी मदद की. यह लोगों का आशीर्वाद है. अल्मोडा में एक ही ग्राउंड था और यह मल्टीपर्पर्स था. कहीं भी विकट लगा लो, उस टाइम नहीं लगता है कि स्ट्रगल है, लेकिन जब पहली बार मौका मिला, तब असली संघर्ष शुरू हुआ. एकता ने आगे बताया कि उनके लड़के दोस्त थे और उन्हें वो सारे खेल पसंद थे, जो लड़के खेलते हैं. उनका भाई क्रिकेट खेलता था. उसके साथ उन्होंने शुरुआत की. अल्मोड़ा में घर के सामने एक ग्राउंड था और वहां लोग प्लास्टिक की बॉल से खेलते थे. वे लोग उन्हें नहीं खिलाते थे, तो उनके भाई ने खुद ही टूर्नामेंट आयोजित करवाया और उन्हें कैप्टन बनाया. उसका योगदान काफी है. फिर एकेडमी में उनके कोच सर लियाकत अली का काफी रोल रहा है. उन्हीं की वजह से वह आज इस मुकाम तक पहुंची हैं.
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FIRST PUBLISHED : December 9, 2023, 16:53 IST
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