Home Breaking News प्राण प्रतिष्ठा समारोह: पुणे में तैयार हो रहे हैं सोने के धागों से बने वस्त्र, कन्नौज के इत्र से महकेगा मंदिर

प्राण प्रतिष्ठा समारोह: पुणे में तैयार हो रहे हैं सोने के धागों से बने वस्त्र, कन्नौज के इत्र से महकेगा मंदिर

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प्राण प्रतिष्ठा समारोह: पुणे में तैयार हो रहे हैं सोने के धागों से बने वस्त्र, कन्नौज के इत्र से महकेगा मंदिर

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Ramlala Pran Pratishtha: Clothes made of gold threads are being prepared in Pune

राम मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है।
– फोटो : अमर उजाला

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22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए तैयारियां अंतिम दौर में हैं। कार्यक्रम को भव्यतम बनाने की कोशिशें हो रही हैं। मूर्तियों के साथ-साथ मंदिर परिसर को अलौकिक रूप देने की तैयारी है। प्राण प्रतिष्ठा समारोह में रामलला के ठाठ-बाट निराले होंगे। जब 22 जनवरी को रामलला की नए मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होगी तो रामलला की अद्भुत छवि भक्तों को आकर्षित करती नजर आएगी। सोने का मुकुट व सोने के वस्त्र धारण कर रामलला सोने के सिंहासन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। भगवान रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सोने, चांदी व नवरत्नों से सज्जित वस्त्र धारण करेंगे।

रामलला का पोशाक स्वर्ण यानी सोने के धागों से पुणे में तैयार किया जा रहा है। यह पोशाक 22 दिसंबर तक तैयार कर अयोध्या भेजी जाएगी। राममंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि बताते हैं कि पूरे देश में भगवान रामलला के लिए अनेक लोग सुंदर वस्त्र तैयार कर रहे हैं। गुजरात के साथ-साथ कई अन्य जगहों पर इन वस्त्रों को तैयार किया जा रहा है। गोविंद देव गिरि ने कहा कि पुणे में सोने के धागे से रामलला के वस्त्र बन रहे हैं। ऐसे करीब 20 से अधिक वस्त्र तैयार हो रहे हैं, प्राण प्रतिष्ठा के दौरान जो भी वस्त्र सबसे अच्छा लगेगा वही रामलला धारण करेंगे। उन्हें सोने का मुकुट धारण कराया जाएगा। सोने, चांदी व नवरत्नों से जड़ित माला भी शोभा बढ़ाएंगी।

कन्नौज के इत्र से महकेगा मंदिर परिसर

प्राण प्रतिष्ठा समारोह में कन्नौज के इत्र से राम जन्मभूमि परिसर महकेगा। आगरा में युमना किनारे स्थित प्राचीन मथुराधीश मंदिर की ओर से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कन्नौज का इत्र व वृंदावन से विशेष नक्काशी युक्त पोशाक भेंट की जाएगी। मथुराधीश मंदिर के महंत जगुल श्रोतिय कुछ समय पहले जब रामलला के दर्शन को अयोध्या आए थे तो वह ठाकुर जी के लिए वस्त्र व इत्र ट्रस्ट को दिए थे। इत्र की खुशबू से मंदिर प्रांगण महकने लगा तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इत्र के बारे में जानकारी प्राप्त की। उसी समय कन्नौज का इत्र व वृंदावन से विशेष वस्त्र मंगाए जाने का निर्णय हो गया था।

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