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आप को कब लगा कि पाक कला में करियर बनाना चाहिए?
बचपन से ही मेरा झुकाव कुकिंग की तरह रहा है। जब दादी मां खाना बनाती थी, तो मैं उनकी मदद करता था, मुझे बहुत मजा आता था। लेकिन उस समय ऐसा पता नहीं था कि इस प्रोफेशन में करियर बनाया जा सकता है। मुझे किचन में बस हाथ बंटाना अच्छा लगता था। जब स्कूल जाना शुरू हुआ तो मेरी मां मेरे लिए टिफिन तैयार करती थी। उनकी मदद करता था।
स्कूल में कभी आपने दोस्तों के साथ टिफिन शेयर किया?
हमेशा। जब मम्मी किचन में मेरे लिए टिफिन तैयार करती थी, तो मैं भी कभी कभार कुछ अपनी फेवरेट चीजें बना लेता था जिसे मेरे स्कूल के दोस्त बहुत पसंद करते थे। अपने बनाए खाने की तारीफ सुनकर बहुत खुशी होती थी। जब कॉलेज जाना शुरू हुआ तब भी अपने हाथ से खुद ही टिफिन बनाकर ले जाता था। और, तारीफों का सिलसिला वहां भी जारी रहा तो मुझे लगा कि कुकिंग में कुछ करना चाहिए।
फिर, प्रोफेशनल तौर पर कुकिंग की शुरुआत कैसे हुई?
मैं मंगलोर का रहने वाला हूं। सबसे पहले मैंने वहां जूस की दुकान खोली। जूस के साथ कुछ न कुछ खाने का आइटम भी बनाता था। मेरे पिता अब्दुल कादिर पहले फर्नीचर का काम करते थे, लेकिन उनके पैर में थोड़ी तकलीफ हुई तो नौकरी छूट गई। अब जूस की दुकान पर बैठ हैं। मेरी मम्मी सना गृहिणी हैं और मुझसे बड़ी दो बहनों की शादी हो गई है।
मास्टरशेफ इंडिया में मौका कैसे मिला?
मेरा सपना था मास्टरशेफ इंडिया में आने का, लेकिन मुझे पता नहीं था कि कैसे ऑडिशन देना है। हो भी पाएगा कि नहीं हो पाएगा। काफी समय से इसमें भाग लेने की कोशिश कर रहा था। मास्टरशेफ इंडिया सीजन सात के 40 प्रतिभागियों में से मैं भी था। लेकिन थोड़े से अंतर से चूक गया। मेरे घरवाले कहने लगे कि कहीं जाकर कोई नौकरी कर लो। मेरे जीजा सऊदी अरब में जॉब करते हैं, उन्होंने मुझे वहां जॉब करने के लिए बुलाया। लेकिन मैंने सबसे से कहा कि मुझे एक और मौका दो, मैं जीतकर आऊंगा।
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