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1980 में बनी भाजपा हमेशा से ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 के हटाने के पक्ष में रही है। यही कारण है दशकों से पार्टी आम चुनावों में इस मुद्दे को शामिल करती आई है। अनुच्छेद-370 पर पार्टी के रुख का पहला सबूत उसके 1984 के घोषणापत्र में मिलता है। 1989 में भाजपा ने अनुच्छेद-370 को खत्म करने का अपना वादा दोहराया, जब आतंक की वजह से कश्मीर अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा था।
1991 में अगले आम चुनाव हुए और वह ऐसा वक्त था जब कश्मीर घाटी से हिंदुओं का पलायन हो चुका था। 1991 के चुनाव भाजपा के घोषणापत्र में अनुच्छेद-370 पर अपना रुख दोहराने के अलावा, घाटी से पाकिस्तानी तत्वों को बाहर निकालने का वादा किया गया था।
पार्टी के 1996 के चुनाव घोषणापत्र में कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर काफी व्यापक दृष्टिकोण था। भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए पहली बार 1996 में सत्ता में आया लेकिन बहुमत से दूर रहने के कारण अटल बिहारी वाजपेयी सरकार 13 दिनों में गिर गई।
भाजपा ने 1999 के अपने घोषणापत्र में अनुच्छेद-370 पर कोई जिक्र नहीं किया था। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के पांच वर्षों के बाद 2004 के लोकसभा चुनावों में अनुच्छेद-370 फिर से पार्टी के विजन दस्तावेज से गायब था।
2009 के बाद से अनुच्छेद-370 एक बार फिर भाजपा के विजन डॉक्यूमेंट में आ गया। भाजपा ने 2009 और 2014 में अपने घोषणापत्र में इस अनुच्छेद को निरस्त करने की वकालत की। 2009 में भाजपा के घोषणा पत्र में 12 बार ‘कश्मीर’ का उल्लेख किया गया। इसमें अनुच्छेद-370 को रद्द करने, पीओके शरणार्थियों को अधिकार प्रदान करने, कश्मीरी पंडितों को फिर से बसाने, आतंकवाद से निपटने आदि की बात कही गई।
अनुच्छेद-370 को लेकर घोषणापत्र में कहा गया, ‘अनुच्छेद-370 जम्मू-कश्मीर के लोगों के राष्ट्रीय मुख्यधारा के साथ पूर्ण एकीकरण के लिए एक मनोवैज्ञानिक बाधा उत्पन्न करता है। भाजपा इस अनुच्छेद को निरस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।’
2014 में भाजपा राज्य पर अपने रुख पर कायम रही। इसने कहा, ‘भाजपा अनुच्छेद-370 पर अपना रुख दोहराती है और सभी हितधारकों के साथ इस पर चर्चा करेगी और इस अनुच्छेद को निरस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।’
2019 में भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में छह बार ‘कश्मीर’ का उल्लेख किया। 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी के घोषणापत्र में कहा गया, ‘हम जनसंघ के समय से अनुच्छेद-370 को निरस्त करने तक अपने रुख को दोहराते हैं।’
भाजपा ने वादा किया, वे जब 2019 में दूसरी बार सत्ता में आये तो वादे को पूरा किया। 5 अगस्त 2019 को नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द कर दिया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया।
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