Home World निशाने पर मोदी विरोधियों का प्रॉपगेंडा! अमेरिका में चल रहा एक गुप्त ऑपरेशन

निशाने पर मोदी विरोधियों का प्रॉपगेंडा! अमेरिका में चल रहा एक गुप्त ऑपरेशन

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निशाने पर मोदी विरोधियों का प्रॉपगेंडा! अमेरिका में चल रहा एक गुप्त ऑपरेशन

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अमेरिका में चल रहे एक गुप्त भारतीय ऑपरेशन का खुलासा हुआ है. चौंकिए नहीं. यह एक ऐसा संगठन है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या कहें कि भारत सरकार के आलोचकों को टारगेट कर रहा है. जी हां, ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2020 से डिसइन्फो लैब (Disinfo Lab) नाम का एक ऑर्गनाइजेशन एक्टिव है, जो मोदी के आलोचकों के व्यक्तिगत संबंधों और फंडिंग के सोर्स का खुलासा कर रहा है. इसके लिए उसने लंबे दस्तावेज और सोशल मीडिया पोस्ट किए हैं. डिसइन्फो लैब के पास तथ्य आधारित रिसर्च टीम है जो अमेरिकी सरकार से जुड़े लोगों, रिसर्चरों, मानवाधिकार समूहों और भारतीय अमेरिकी एक्टिविस्टों के अपुष्ट दावों की पोल खोल रही है. यह भारत को बदनाम करने की वैश्विक इस्लामिक समूहों और अरबपति जॉर्ज सोरेस जैसे लोगों के एक तरह के षड्यंत्र को बेनकाब करने की पहल है.  

कौन चला रहा ऑपरेशन?

हर एक मामले में लगाए गए आरोप भारत में सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं क्योंकि मोदी समर्थक प्रभावशाली लोग इस ग्रुप के तथ्य आधारित निष्कर्षों का इस्तेमाल कर अपनी बात को सही साबित करते हैं. भारतीय अधिकारियों ने इसकी रिपोर्ट का टीवी पर भी जिक्र किया है और कैपिटल हिल में भी पेश किया गया है. काफी पहुंच के बावजूद, डिसइन्फो लैब अपनी संबद्धता या कहें कि कनेक्शन का खुलासा नहीं करती है. संगठन ने अपनी वेबसाइट पर खुद को एक ‘अलग लीगल एंटिटी’ के रूप में पेश किया है जो पूरी तरह से निष्पक्ष रिसर्च को सामने रखना चाहती है. 

इस संगठन के पीछे किसका माइंड

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक वास्तव में डिसइन्फो लैब की स्थापना एक भारतीय खुफिया अधिकारी ने की है. यह लैब विदेश में रहने वाले उन आलोचकों पर शोध करती है जो अकारण मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश करते हैं. सरल शब्दों में कहें तो यह संगठन सच्चाई को उजागर कर साजिश को बेनकाब कर रहा है. संगठन में काम करने वाले या इसकी कार्यप्रणाली से परिचित तीन लोगों से बात कर यह रिपोर्ट तैयार की गई है.  इनका दावा है कि इस संगठन का उद्देश्य भारत विरोधी गलत सूचनाओं को उजागर करना है. 

इस संगठन की शोध सामग्री को दक्षिणपंथी और हिंदू राष्ट्रवादी सबसे ज्यादा शेयर करते हैं. इस रिपोर्ट की पहुंच वैश्विक है क्योंकि इसे कई हाई-प्रोफाइल लोग भी सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं. पहले ट्विटर और अब एक्स पर इसे शेयर किया जाता है. अमेरिकी अखबार ने एक्स पर डिसइन्फो लैब की करीब एक लाख रीपोस्ट का विश्लेषण कर पाया कि भाजपा के मौजूदा और पूर्व पदाधिकारी, पूर्व अधिकारी, सेना और खुफिया विभाग से जुड़े पूर्व अधिकारी और एक कैबिनेट मंत्री ने भी इसे शेयर किया था. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने लोगों को डिसइन्फो लैब के इंटेलिजेंस कनेक्शन के बारे में पता है. फिर भी इनके रीट्वीट लैब को एक अथॉरिटी का दर्जा मिल जाता है. इसके टारगेट में शामिल कुछ लोगों का कहना है कि इससे विदेश में मौजूद लोगों को डराने की लैब की पावर बढ़ जाती है. (फोटो- lexica AI)

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