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अभिनेता रणबीर कपूर की फिल्म ‘एनिमल’ की इन दिनों खूब चर्चा है। इसे रणबीर कपूर के करियर की अब तक की बेस्ट परफॉर्मेंस माना जा रहा है। कमाई के मामले में वह अपने करियर की सबसे बड़ी फिल्म इसे बना ही चुके हैं। रणबीर कपूर मानते हैं कि उन्हें जो भी सफलता मिली है इसके पीछे उनके दादा राज कपूर प्रेरणा स्रोत रहे हैं। 14 दिसंबर 1924 को पेशावर में जन्मे भारतीय सिनेमा के पहले शो मैन कहे जाने वाले राज कपूर अगर आज जिंदा होते तो आज अपना 99 वां जन्मदिन मना रहे होते। रणबीर कपूर अपने दादाजी का जिक्र चलने पर अक्सर बहुत दिलचस्प बातें करते रहे हैं, आइए जानते हैं अब तक जूनियर आरके ने सीनियरमोस्ट आरके के बारे में क्या क्या कहा..
एक्टिंग नहीं बल्कि डायरेक्शन का फैन
रणबीर कपूर अपने दादा राज कपूर की एक्टिंग से ज्यादा उनके डायरेक्शन के बहुत बड़े फैन हैं। वह कहते हैं, ‘मैं अपने दादा राज कपूर के एक्टिंग से ज्यादा उनके डायरेक्शन का बहुत बड़ा फैन हूं। उनके निर्देशन में बनी फिल्में ‘श्री 420’, ‘आवारा’, ‘जिस देश में गंगा बहती है’ और ‘प्रेम रोग’ जैसी फिल्में मुझे बहुत पसंद हैं। इन फिल्मों को देखकर समझ में आया कि डायरेक्शन किस तरह का होता है। इन फिल्मों का प्रभाव मेरे जीवन पर बहुत ही रहा है।’
राज कपूर का पोता होने पर गर्व
रणबीर कपूर मानते है कि कपूर खानदान से होने की वजह से उन्हें फिल्मों में आसानी से ब्रेक मिल गया। वह कहते हैं, ‘मुझे गर्व है कि मैं राज कपूर का पोता हूं। इसे मैं एक जिम्मेदारी के तौर पर लेता हूं। दादा जी ने हमारे खानदान के लिए जो किया और उनके कारण दुनिया में हमें जो महत्व मिला, इसके लिए मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा। कपूर खानदान से होने की वजह से मुझे फिल्मों में आसानी से ब्रेक मिल गया जबकि दूसरों को थोड़ी मुश्किल जरूर होती है।’
दादाजी को उनकी फिल्मों से जाना
रणबीर कपूर छह साल के थे जब राज कपूर का निधन हो गया। वह कहते हैं, ‘दादा जी से जुड़ी यादें सिर्फ इतनी है जब वह हमें बुलाते थे तो चॉकलेट देते थे। और, यह शर्त रखते थे कि जो सबसे अच्छा एक्टिंग करेगा उसे ज्यादा चॉकलेट मिलेगा। इसके अलावा उनसे जुड़ी बचपन की कुछ खास यादें नहीं। जो भी उनके बारे में सुना वह मम्मी पापा सुना और उनकी फिल्में देखकर जीवन और सिनेमा के बारे में बहुत कुछ सीखा है।’
दादाजी की बायोपिक मुश्किल होगी
राज कपूर की बायोपिक के बारे में अक्सर चर्चा होती रहती है। रणबीर कपूर कहते हैं, ‘दादा जी की बायोपिक थोड़ी मुश्किल होगी, क्योंकि उनकी बहुत कंट्रोवर्सियल लाइफ रही है। हमें उनकी कहानी को पूरी ईमानदारी से रखनी होगी, हम उसे प्रोपेगैंडा फिल्म नहीं बना सकते हैं। मेरी बड़ी इच्छा है कि मैं उनकी बायोपिक बनाऊं।’
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