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MHA: BSF
– फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht
विस्तार
केंद्र सरकार में बतौर प्रतिनियुक्ति पर आने वाले ‘आईपीएस’ अफसरों का तय कोटा भर नहीं पा रहा है। खासतौर पर, केंद्रीय जांच एजेंसियों/अर्धसैनिक बलों में आईपीएस अफसरों के अनेक पद रिक्त पड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल ‘बीएसएफ’ में आईपीएस के लिए निर्धारित डीआईजी की 15 वैकेंसी को कैडर अफसरों की तरफ शिफ्ट कर दिया है। यानी बीएसएफ में अब आईपीएस के लिए तय 15 डीआईजी के पदों पर कैडर अधिकारी तैनात होंगे। उम्मीद है कि कमांडेंट को डीआईजी बनने का अवसर मिलेगा। गृह मंत्रालय ने यहां पर ये स्पष्ट कर दिया है कि जैसे ही बीएसएफ में आईपीएस/डीआईजी आएंगे, कैडर अधिकारियों से वह पद तुरंत वापस ले लिया जाएगा। मतलब, अगर किसी कमांडेंट को डीआईजी लगाया गया है, तो आईपीएस के आते ही वह दोबारा से नीचे वाले पायदान पर आ जाएगा।
डीओपीटी ने कहा, कोई स्थायी समाधान तलाशा जाए
वैकेंसी ईयर 2024 के तहत बीएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 15 पदों को कैडर अफसरों के माध्यम से भरने के लिए डीओपीटी के पास 5 सितंबर को एक प्रपोजल भेजा गया था। 14 दिसंबर को जारी आदेश में डीओपीटी ने आईपीएस के लिए तय पदों को अस्थायी तौर पर कैडर अफसरों से भरने की इजाजत दे दी है। यानी डीओपीटी ने ‘नो ऑब्जेक्शन’ पत्र जारी कर दिया। उसमें कहा गया कि आईपीएस डीआईजी के 15 पदों को अस्थायी तौर पर कैडर अफसरों से भरा जाए। यह भी कहा गया है कि जिस भी वक्त आईपीएस ज्वाइन करेंगे, वह पद तुरंत प्रभाव से खाली समझा जाए। मतलब, कैडर अफसर को अविलंब वह पद छोड़ना होगा। आईजी ‘पर्स’ बीएसएफ, को डीओपीटी ने यह भी कहा है कि इस तरह के पदों को भरने के लिए कोई स्थायी समाधान तलाशा जाए। वैकेंसी ईयर 2025 में आईपीएस डीआईजी के 15 पदों को नियमानुसार ही भरा जाए। यानी, वे पद अगर आईपीएस के लिए निर्धारित हैं, तो वहां पर आईपीसी डीआईजी ही ज्वाइन करे।
प्रतिनियुक्ति के लिए बदले गए थे नियम
लंबे समय से विशेषकर आईपीएस डीआईजी/एसपी, केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आने का मन नहीं बना पा रहे थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक कमेटी ने सुझाव दिया था कि इन अधिकारियों के लिए पैनल प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाए। इसके पूरा होने में काफी समय लगता है। सरकार के इस कदम का मकसद, केंद्र में डीआईजी-रैंक के अधिकारियों की भारी कमी को दूर करना था। कैबिनेट की नियुक्ति समिति के पास यह प्रस्ताव कई बार भेजा गया था। गत वर्ष 10 फरवरी को इसे कमेटी की मंजूरी मिल गई थी। केंद्र सरकार का मानना था कि डीआईजी-रैंक के अधिकारियों के लिए पैनल सिस्टम को खत्म करने से अब प्रतिनियुक्ति पर अधिक आईपीएस केंद्र में आ सकेंगे। मनोनयन प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक साल लग जाता था। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह भी कहा था कि जो भी आईपीएस एसपी या डीआईजी, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं आएंगे, उन्हें बाकी सेवा के दौरान केंद्रीय नियुक्ति से प्रतिबंधित किया जा सकता है। इससे पहले केंद्र ने ‘अखिल भारतीय सेवा’ नियमों में संशोधन भी किया था। उसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार, आईएएस व आईपीएस अधिकारी को राज्य की अनुमति या बिना अनुमति के भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुला सकती है।
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