[ad_1]

लोडेड ट्रक
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नेशनल हाईवे पर ओवरलोडेड वाहनों की समस्या को उजागर करते हुए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) (एमओआरटीएच) से एक्सल-आधारित फीस कलेक्शन के बजाय वाहनों के वजन के आधार पर टोल वसूलने के विकल्प पर विचार करने के लिए कहा गया है। राज्यसभा सदस्य वी विजयसाई रेड्डी की अध्यक्षता वाली एक संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि ऑटोमैटिक चालान/जुर्माना जारी करने के लिए वेट-इन-मोशन प्रणाली के कार्यान्वयन से भारी वाहन मालिकों के साथ भ्रष्ट अधिकारियों की संभावित मिलीभगत खत्म हो जाएगी। इसके साथ हीओवरलोडिंग की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
समिति ने कहा, “समिति की सिफारिश है कि मंत्रालय एक्सल-आधारित टोल संग्रह के बजाय वाहनों के वजन के आधार पर टोल वसूलने के प्रावधानों में सुधार की संभावनाओं का पता लगाए।” मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि उसने सिफारिश पर ध्यान दिया है।
समिति ने यह भी “दृढ़ता से सिफारिश” की है कि मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवरलोडेड वाहनों की समस्या को कम करने के लिए तुरंत उपाय करे। मंत्रालय को लंबे समय से बंद पड़े वजन मापने वाले उपकरणों को भी ठीक करने के लिए कहा गया।
पिछले हफ्ते पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि “निर्धारित सीमा का पालन न करने वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।”
MoRTH को संबंधित मंत्रालयों और राज्य विभागों के साथ तालमेल बैठाने के लिए भी कहा गया था। ताकि ट्रक मालिकों के अलावा, माल भेजने वाले (कंसाइनर) और माल हासिल करने वाले (कंसाइनी) पर भी जुर्माने का प्रावधान लागू किया जा सके।
समिति ने आगे कहा, “समिति को लगता है कि ऐसा करने से स्रोत से ही अतिरिक्त भार लादने से रोका जा सकेगा और राष्ट्रीय राजमार्गों को नुकसान से बचाया जा सकेगा। साथ ही साथ सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा।”
[ad_2]
Source link