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War in Gaza: गाजा में युद्धविराम और इजरायल के साथ कैदियों की अदला-बदली पर बातचीत के लिए हमास चीफ इस्माइल हानियेह बुधवार को मिस्र का दौरा करने वाले हैं. न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक फिलिस्तीनी इस्लामी ग्रुप हमास के एक करीबी सूत्र ने यह जानकारी दी है.
सूत्र ने मंगलवार को बताया कि कतर स्थित हनियेह मिस्र में ‘उच्च स्तरीय’ हमास प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. उन्हें मिस्र के खुफिया प्रमुख अब्बास कामेल और अन्य के साथ बातचीत करनी है.
युद्ध को रोकने पर होगी चर्चा
सूत्र के मुताबिक, ‘कैदियों की रिहाई के लिए एक समझौता तैयार करने के लिए युद्ध को रोकने (और) गाजा पट्टी पर लगाए गए घेराबंदी को समाप्त करने पर चर्चा होगी.‘
बता दें पिछले महीने एक सप्ताह के संघर्ष विराम समझौते के तहत, इजरायली जेलों में बंद 240 फिलिस्तीनियों के बदले में 80 इजरायली बंधकों को मुक्त कर दिया गया था. इस समझौते में कतर ने मिस्र और संयुक्त राज्य अमेरिका के समर्थन से दोनों पक्षों के बीच बातचीत में मदद की थी.
ये बिंदु भी चर्चा में शामिल होंगे
हमास के सूत्र के अनुसार, मिस्र में बातचीत ‘मानवीय सहायता की डिलीवरी, गाजा पट्टी से इजरायली सेना की वापसी और विस्थापित लोगों की उत्तर में उनके शहरों और गांवों में वापसी’ पर केंद्रित होगी.
नवंबर की शुरुआत में यात्रा के बाद, 7 अक्टूबर को युद्ध शुरू होने के बाद से हनियेह की मिस्र यात्रा उनकी दूसरी यात्रा होगी.
मोसाद चीफ ने की कतर के पीएम से मुलाकात
वहीं अमेरिकी न्यूज प्लेटफॉर्म एक्सियोस ने सोमवार को बताया कि इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया ने बंधकों को मुक्त कराने के लिए संभावित नए सौदे पर चर्चा करने के लिए यूरोप में कतर के प्रधान मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी और सीआईए निदेशक बिल बर्न्स से मुलाकात की.
मंगलवार को, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने ‘हमारे बंधकों को मुक्त करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए मोसाद के प्रमुख को दो बार यूरोप भेजा था.’ उन्होंने एक बयान में कहा, ‘मैं इस विषय पर कोई कसर नहीं छोड़ूंगा और हमारा कर्तव्य उन सभी को वापस लाना है.’ मंगलवार को बंधक परिवारों से मुलाकात करते हुए नेतन्याहू ने कहा, ‘उन्हें बचाना सर्वोच्च कार्य है.’
बता दें गाजा में इजरायली बलों द्वारा गलती से तीन बंदियों की गोली मारकर हत्या कर दिए जाने के बाद बंधकों के परिवारों में गुस्सा, डर और युद्धविराम की मांग तेज हो गई है.
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