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Hanif Mohammad Birth: 21 दिसंबर 1934 यानी आज ही के दिन भारत में एक ऐसा क्रिकेटर जन्मा था, जिसने पाकिस्तान के लिए खेलते हुए वर्ल्ड क्रिकेट में डंका बजा दिया. उन्हें ‘लिटिल मास्टर’ नाम से जाना गया. लिटिल मास्टर से आपने जहन में सचिन तेंदुलकर का नाम आ रहा होगा, लेकिन उनसे भी पहले एक बल्लेबाज ऐसा था, जिन्हें ‘लिटिल मास्टर’ का टैग मिला. यहां बात हो रही है पाकिस्तान के दिग्गज टेस्ट बल्लेबाज हनीफ मोहम्मद की. हनीफ पाकिस्तानी क्रिकेट की शान थे. 17 सालों तक पाकिस्तान के लिए खेलने वाले हनीफ ने क्रिकेट में वो दर्जा पाया जो आज तक शायद ही कोई पाकिस्तानी को मिला हो. वह अपनी बल्लेबाजी से कुछ ऐसे कमाल कर गए जो क्रिकेट में भूले नहीं भुलाए जा सकते. उनके मैदान से जुड़े कई किस्से ऐसे हैं, जिनपर विश्वास करना असंभव सा लगता है. इस पाकिस्तानी क्रिकेटर का नाम ‘ओरिजिनल लिटिल मास्टर’ क्यों पड़ा आइए जानते हैं…
ऐसा रहा करियर
हनीफ ने पाकिस्तान के लिए 55 टेस्ट खेले, जिसमें पाकिस्तान का पहला टेस्ट भी शामिल है. हनीफ बल्लेबाजी करते हुए अपनी बेहतरीन डिफेंसिव तकनीक के प्रसिद्ध थे. उन्होंने 43.98 की औसत से 3915 रन बनाए. उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 337 रन था, जो पाकिस्तान के लिए खेलते हुए वेस्ट इंडीज के खिलाफ 1958 में बनाया था. यह उस समय की सबसे लंबी फर्स्ट क्लास पारी भी थी. उन्होंने 970 मिनट तक क्रीज पर डटे रहकर बल्लेबाजी की थी. हनीफ कद में जितने छोटे थे, बैटिंग करने में उतने ही बड़े. उन्हें असली लिटिल मास्टर कहा जाता है. हनीफ ने साल 1952 में भारत के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था. वहीं, आखिरी मैच 1969 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला.
भारत में लिया था जन्म
गौरतलब है कि हनीफ भारत में पैदा हुए थे. दरअसल, ब्रिटिश राज में उनका जन्म हुआ था, जब बंटवारा हुआ तो वह पाकिस्तान में मौजूद गुजरात में जा पहुंचे. कराची स्थित एक मंदिर में उनके पूरे परिवार ने शरण ली. तब किसे पता था कि ऐसी परिस्थितयों से निकल एक बच्चा वर्ल्ड क्रिकेट में ऐसा भूचाल लाएगा. हनीफ को उनकी महान पारियों के लिए क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में गिना गया.
लंबी पारी खेलने के शौकीन थे हनीफ
उनके आंकड़े देखकर अगर यह कहा जाए कि हनीफ बड़ी-बड़ी पारियां खेलने के शौकीन थे तो गलत नहीं होगा. दाएं हाथ के बल्लेबाज हनीफ को इन्हीं पारियों के लिए याद किया जाता है. साल 1958 में वेस्टइंडीज के खिलाफ हनीफ की 337 रन की पारी को कौन ही भूल पाएगा. इस टेस्ट मैच में हनीफ ने करीब 16 घंटे(970 मिनट) बैटिंग की थी. याद दिला दें कि इस मैच की पहली पारी में पाकिस्तान 106 रन पर सिमट गया था. फॉलोऑन बचाते हुए हनीफ ने वेस्टइंडीज गेंदबाजों की खूब पिटाई की. उन्होंने 337 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर पाकिस्तान को हार से बचाया. यह उनके टेस्ट करियर का हाईएस्ट स्कोर भी रहा. हनीफ ने 12 शतक और 15 अर्धशतक भी लगाए थे.
फर्स्ट क्लास करियर में बनाए 499 रन
उनके बल्ले से एक और बड़ी पारी जो निकली जो हमेशा याद रखी जाएगी, वो थी फर्स्ट क्लास करियर में 1958 में खेली है 499 रन की पारी. 1958 में फर्स्ट क्लास मैच के दौरान बहावलपुर के खिलाफ उन्होंने यह पारी खेली. हनीफ महज एक रन से 500 रन बनाने से चूक गए और आखिरी ओवर में 499 रन पर रनआउट हो गए. हनीफ ने उस समय महान डॉन ब्रैडमैन के हाइएस्ट इंडिविजुअल स्कोर 452 रन को पीछे छोड़ दिया था. बता दें कि उनमें एक एक्स्ट्रा टैलेंट यह था कि वह विकेटकीपर होने के अलावा दाएं और बाएं दोनों हाथों से गेंदबाजी भी कर सकते थे.
इसलिए कहा गया ‘लिटिल मास्टर’
मोहम्मद हनीफ को ‘लिटिल मास्टर’ इसलिए कहा गया, क्योंकि वह अपने समय में महानतम टेस्ट बल्लेबाजों में से एक रहे. कद में छोटे रहने वाले हनीफ ने क्रिकेट में कई बड़ी ऊंचाइयां छुई थीं. फर्स्ट क्लास करियर में उनके नाम 17 हजार से ज्यादा रन हैं. उनकी बल्लेबाजी के कद को देखते हुए उन्हें लिटिल मास्टर कहा गया. हालांकि, हनीफ मोहम्मद ने सुनील गावस्कर को असली लिटिल मास्टर बताया था. उन्होंने 2013 में कहा था, ‘वास्तव में, गावस्कर लिटिल मास्टर नंबर 1 हैं, मैं दूसरे स्थान पर हूं.’ बता दें कि हनीफ को 1968 में ‘विज्डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर’ घोषित किया गया था. 2009 में उन्हें पाकिस्तान के इमरान खान और जावेद मियांदाद (कुल 55 खिलाड़ी) के साथ आईसीसी के हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था.
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