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राजस्थान सचिवालय, यहां से सरकार का शासन चलता है
– फोटो : social media
विस्तार
केंद्र सरकार की तरफ से राजस्थान को केंद्रीय करों की हिस्सेदारी के रूप में जो अतिरिक्त 4 हजार करोड़ रुपए मिलने वाले हैं उसे वित्त विभाग के अफसर अपने खोदे गड्ढों को भरने में ठिकाने लगा सकते हैं। वित्त विभाग की तरफ से शुक्रवार को निकाले गए आदेश में एक पेंच जानभूझ कर छोड़ दिया गया। इसमें टेंडरों के भुगतान पर तो रोक लगा दी, लेकिन बाकी भुगातानों पर किसी तरह की रोक नहीं है। ऐसे में वेतन, पेंशन, पानी, कोर्ट कंटेंप्ट के सिवा अन्य भुगतानों पर यदि रोक नहीं लगाई गई तो सरकार को जो 4 हजार करोड़ रुपए मिलने वाले हैं उसे ठिकाने लगने में देर नहीं लगेगी। सरकार में सोमवार से शुक्रवार तक पेमेंट डे होता है। शनिवार और रविवार को भुगतान नहीं होता। लेकिन, सरकार समय रहते नहीं चेती तो अफसर उसे बड़ी मुश्किल में डाल सकते हैं।
30 हजार करोड़ के बिल पेंडिंग
मौजूदा सरकार ने जब सत्ता संभाली तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति चौपट मिली। अफसरों ने पिछली सरकार को खुश करने के चक्कर में कर्ज पर कर्ज लिया। हालत यह है कि ट्रेजरीयों में 30 हजार करोड़ के बिल पेंडिंग चल रहे थे। इसके अलावा पिछली सरकार जो घोषणाएं करके गई है उसके बिल भी ट्रेजरी में आने बाकी हैं। इसके अलावा केंद्रीय योजनाओं के जो पैसे राजस्थान को भेजे गए उन्हें भी विभागों को नहीं दिया गया।
शुक्रवार को ये आदेश हुए थे जारी
राजस्थान में शुक्रवार को वित्त विभाग की तरफ से आदेश जारी कर सभी विभागों में टेंडरों से जुड़े समस्त भुगातनों पर रोक लगा दी गई। आदेश में कहा गया कि समस्त सरकारी कार्यादेशों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है। आदेशों में कहा गया है कि- जिन कार्यों के टेंडर वर्तमान में आमंत्रित नहीं किए गए हैं उन्हें आगामी निर्देशों तक आमंत्रित नहीं किया जाए। जिन टेंडरों मंजूर होने के बाद उनके कार्यादेश जारी नहीं हुए उनके कार्यादेश आगामी निर्देशों तक जारी नहीं किए जाएं। वहीं, जिनके कार्यादेश जारी हो चुके हैं और काम शुरू नहीं हुआ है उन्हें भी आगामी निर्देशों तक रोका जाएगा। किसी भी तरह की खरीद और सेवा टेंडर के लिए भी रोक के निर्देश लागू होंगे। इसके अलावा जिन कार्यों की पूर्व में प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है उनके काम भी तभी ही शुरू हो सकते हैं जब संबंधित विभागों के मंत्री और मुख्यमंत्री के संज्ञान में यह लाए जाएं। मुख्यमंत्री और मंत्री स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद ही कोई काम आगे बढ़ाया जाएगा।
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