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Jaishankar Russia Visit: हम जहां भी जाते हैं वहां की यादें हमारे साथ जुड़ जाती हैं. दोबारा जाने का मौका मिला तो पुरानी यादें मन-मस्तिष्क में तैरने लगती हैं. शायद विदेश मंत्री जयशंकर को भी इस समय रूस में ऐसा ही महसूस हो रहा है. जी हां, वह पांच दिन की यात्रा पर रूस गए हैं. अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव समेत कई नेताओं के साथ बातचीत करेंगे. कई द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होनी है. इन सबके बीच जयशंकर को अचानक 1962 का वो समय याद आ गया जब वह एक लेटर पर रेड स्क्वॉयर आए थे. हां अपनी एक ताजा तस्वीर के साथ उन्होंने सोशल मीडिया पर एक निमंत्रण पत्र भी साझा किया है. यह लेटर उन्हें 1962 में भेजा गया था. क्या था उस लेटर में, अब जयशंकर ने उसे क्यों शेयर किया? आपके मन में भी ये सवाल जरूर उठ रहे होंगे.
रेड स्क्वॉयर पर जयशंकर
पहले बात तस्वीर की. जयशंकर ने मॉस्को उतरते ही टोपी और सूट में अपनी तस्वीर ली. बैकग्राउंड में रूस का झंडा और वहां की पारंपरिक स्टाइल में बनी इमारतें दिखाई दे रही हैं. यह रेड स्क्वॉयर है. यह तस्वीर अपने आप में बताती है कि जयशंकर रूस में हैं. जयशंकर ने एक और तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘How it started and How it is going.’ दरअसल, अगली तस्वीर एक न्योते की है. अगर आप रूसी भाषा नहीं जानते हैं तो पहली नजर में आपको समझ में नहीं आएगा कि लिखा क्या है. जयशंकर ने दोनों तस्वीरों के जरिए समझाने की कोशिश की है कि वह पहली बार रेड स्क्वॉयर कब आए थे और अब वह फिर आए हैं.
How it started How it’s going pic.twitter.com/x70purbYzF
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) December 25, 2023
तब केवल 7 साल के थे जयशंकर
न्योते का ट्रांसलेशन करने पर साफ हो गया कि यह एक तरह का पास था, जो जयशंकर को 18 अगस्त 1962 के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भेजा गया था. उस दिन सोवियत संघ के अंतरिक्ष यात्रियों के अभियान का जश्न मनाने के लिए रेड स्क्वॉयर पर रैली और कार्यक्रम होना था. इसमें अंतरिक्ष यात्री निकोलेव ए. जी. और पोपोविच पी. आर. का नाम लिखा है. लेटर में लिखा था कि यह दुनिया का पहला ग्रुप है जिसने लंबी दूरी की स्पेस फ्लाइट पूरी की है. यह पास नंबर 6654 था. ऊपर बोल्ड में जयशंकर का नाम लिखा था. 1962 में जयशंकर जब रेड स्क्वॉयर गए थे तब उनकी उम्र केवल सात साल थी.
भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात काफी बढ़ गया है, जबकि कई पश्चिमी देशों में इसे लेकर बेचैनी है. भारत ने अभी तक यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा नहीं की है और वह कहता रहा है कि इस मुद्दे का समाधान कूटनीति और संवाद से किया जाना चाहिए. ऐसे में साफ है कि भारत और रूस की दोस्ती काफी मजबूत है और अब जयशंकर संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए मॉस्को गए हैं.
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