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‘अस्थायी भर्ती’ देने के लिए लाई गयी अग्निवीर योजना की आड़ में 2019-21 तक चली सेना एवं एयरफोर्स की ‘स्थायी भर्ती प्रक्रिया’ को रद्द कर सरकार ने अनगिनत परिश्रमी एवं स्वप्नदर्शी युवाओं की मेहनत पर पानी फेर दिया।
दुखद है कि ‘सत्याग्रह की भूमि’ चम्पारण से लगभग 1100 कि.मी. पैदल चल कर… pic.twitter.com/IF43e3F2uR— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) December 26, 2023
अब जानिए क्या है अग्निपथ योजना?
‘अग्निपथ भर्ती योजना’ के तहत युवाओं को चार साल की अवधि के लिए सेना में शामिल होने का मौका मिलेगा। साढ़े 17 साल से 21 साल के युवा लड़के और लड़कियां इसके लिए पात्र होंगे। इसके लिए 10वीं से लेकर 12वीं तक के छात्र आवेदन कर सकेंगे। इसकी शुरुआत 90 दिन के भीतर हो जाएगी। इस साल 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। पहली भर्ती प्रक्रिया में युवाओं को छह महीने की ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग का समय भी चार साल में शामिल होगा।
अग्निवीरों को मिलेंगे नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के पूरे अवसर
अग्निवीरों के भविष्य और अग्निपथ स्कीम को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां सामने आ रही हैं, जिन्हें सरकारी सूत्रों ने नकारते हुए तथ्य जारी किए हैं। पढ़िए इनके बारे में।
1. भ्रांति: अग्निवीरों का भविष्य असुरक्षित है।
तथ्य:
- जो युवा उद्यमी बनने के इच्छुक हैं, उन्हें वित्तीय पैकेज व बैंक लोन मिलेंगे
- जो आगे पढ़ने के इच्छुक हैं, उन्हें 12वीं के समकक्ष प्रमाणपत्र देकर ब्रिज कोर्स करवाया जाएगा
- जो जॉब करना चाहते हैं, उन्हें केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों व राज्य पुलिस में प्राथमिकता मिलेगी
- कई अन्य सेक्टर भी इन अग्निवीरों के लिए खोले जाएंगे।
2. भ्रांति: अग्निपथ की वजह से युवाओं के लिए अवसर घटेंगे
तथ्य: युवाओं के लिए सशस्त्र सैन्य बलों में जाने के अवसर बढ़ेंगे। आज सशस्त्र सेनाओं में जितनी संख्या है, अग्निवीरों की भर्ती इससे तीन गुना होगी।
3. भ्रांति: रेजिमेंटल निष्ठा पर असर पड़ेगा
तथ्य: सरकार रेजिमेंटल प्रणाली में कोई बदलाव नहीं कर रही है। बल्कि यह प्रणाली और मजबूत बनेगी क्योंकि यहां श्रेष्ठ अग्निवीर चुनकर आएंगे, इससे सामंजस्य में और भी सुधार आएगा।
4. भ्रांति: इससे सशस्त्र सैन्य बलों की कार्यक्षमता को नुकसान होगा।
तथ्य: अधिकतर देशों में छोटी अवधि के लिए सैन्य भर्ती व्यवस्था है, यह युवा और चुस्त सेना के लिए अच्छी मानी जाती है। पहले साल में भर्ती होने वाले अग्निवीर कुल सशस्त्र सैन्य बल के 3% होंगे। उनका प्रदर्शन जांच कर चार साल बाद सेना में फिर शामिल किया जाएगा। इस प्रकार सेना को वरिष्ठ रैंक पर जांचे-परखे सैनिक मिलेंगे।
5. भ्रांति: सेना के लिए 21 साल के सैनिक अपरिपक्व और विश्वास के काबिल नहीं होंगे।
तथ्य: विश्व की अधिकतर सेनाएं युवाओं पर निर्भर हैं। किसी भी समय सेना में अनुभवी लोगों से युवाओं की संख्या ज्यादा नहीं होगी। बल्कि अग्निपथ योजना से भी धीरे-धीरे 50-50 प्रतिशत युवा व अनुभवी वरिष्ठ रैंक अधिकारियों का अनुपात कायम होगा।
6. भ्रांति: सेना के लिए खतरा, आतंकियों से मिल सकते हैं।
तथ्य: ऐसा सोचना सेना के मूल्यों और प्रतिष्ठा का अपमान है। जो युवा 4 साल सेना की यूनिफॉर्म पहनेंगे, वे देश के प्रति समर्पित रहेंगे। हजारों सैनिक रिटायर होते हैं, लेकिन ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया, जिसमें वे देश विरोधी ताकतों से मिल गए हों।
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