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विमल कुमार, सेंचुरियन. पहले टेस्ट मैच से ठीक दो दिन पहले के एल राहुल अपने नैट्स सत्र को पूरा करने के बाद साथी खिलाड़ियों के साथ आराम कर रहे थे. आम-तौर पर चेहरे पर शांत भाव रखने वाले राहुल खिलखिलाकर किसी बात पर जोर जोर से हंस रहे थे और उनके साथ श्रेयस अय्यर मुस्करा रहे थे. उसके बाद जब राहुल ड्रेसिंग रुम की तरफ लौट रहे थे तो एक भारतीय फैन ने धीरे से कहा कि बॉक्सिंग डे टेस्ट में पिछली बार आपने यहां शतक लगाया था, इस बार भी ऐसा ही होगा.
मुझे पता नहीं कि राहुल ने उनकी बात को पूरी तरह से सुना या नहीं लेकिन बस चिर-परिचित अंदाज़ में सहजतापूर्वक उन्होंने अभिवादन स्वीकार किया और आगे बढ़ गये. अगर राहुल सुनते भी तो शायद उन्हें बी इस भविष्याणी के सही होने का आभास नहीं होता क्योंकि सेंचुरियन के मैदान पर किसी भी विदेशी बल्लेबाज़ ने दो शतक नहीं जमाये थे. मैदान तो दूर की बात, साउथ अफ्रीका में सचिन तेंदुलकर (5) और विराट कोहली (2) को छोड़कर किसी भी दूसरे भारतीय बल्लेबाज़ ने दो शतक का मुंह नहीं देखा था. राहुल ने ना सिर्फ सेंचुरियन के महाशतकवीर बने हैं बल्कि उन्होंने एशिया के बाहर अपने अपने करियर का छठा शतक जड़ा जबकि उनके पूरे करियर में 8 शतक हैं.
दरअसल, के एल अपने आदर्श राहुल द्रविड़ की ही तरह विदेशी पिचों पर शानदार टेस्ट पारियां खेलने के मामले में एक अलग छवि बना रहे हैं. द्रविड़ की तरह भले ही वो तकनीकि तौर पर या डिफेंस के मामले में संपूर्णता के बेहद करीब ना हों लेकिन ये बात वो अपने शानदार स्ट्रोकप्ले से पूरा कर लेते हैं. यही वजह है कि जब ऐसा लग रहा था कि 89 के निजी स्कोर पर उनके लिए शतक बहुत दूर है क्योंकि आखिरी विकेट की साझेदारी चल रही थी तो राहुल ने पहले कगीसो रबादा की गेंद पर पहले एक झन्नाटेदार छक्का जड़ा और फिर कोट्ज़ी की गेंद पर एक और छक्का लगातकर अपना एक यादगार शतक पार किया.
दरअसल, राहुल के करियर की कहानी अपने आप में कई विराधोभासों से भरी पड़ी है. ये एक ऐसा बल्लेबाज़ है जो टेस्ट क्रिकेट में बेहद मुश्किल परिस्थितयों में ना सिर्फ पारी की शुरुआत किया करता था बल्कि काबिलेतारीफ शतक भी लगाया करता था. इंग्लैंड में टेस्ट क्रिकेट खेलते हुए अगर राहुल अपने पहले चौके के लिए 108 गेंदो तक का इंतज़ार कर सकते हैं तो सेंचुरियन में आते ही चौके-छक्के की बरसात कर देते हैं क्योंकि दूसरे छोर पर विकेटों के पतझड़ को देखते हुए उनके पास कोऊ विकल्प नहीं था.
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— BCCI (@BCCI) December 27, 2023
इत्तेफाक की बात ये भी है कि इस बल्लेबाज़ ने टी20 इंटरनेशनल में 14 गेंदों पर अर्धशतक भी बना डाला है. वन-डे क्रिकेट में भी ये खिलाड़ी मिड्ल ऑर्डर में एक बेहद आक्रामक बल्लेबाज़ की भूमिका निभाता है. एशिया कप से ठीक पहले कप्तान रोहित शर्मा और कोच राहुल द्रविड़ बेसब्री और बेकररारी से इंतज़ार कर रहे थे किसी भी तरह राहुल फिट हो जायें. उनके लिए चयन की तारीख तक को टाला गया. लेकिन, ये सब भरोसा सही साबित हुआ जब राहुल ने पहले पाकिस्तान के खिलाफ एशिया कप में और फिर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ वर्ल्ड कप के पहले मैच में संकटमोचक की भूमिका निभाई.
यही वजह है सेंचुरियन टेस्ट के पहले दिन के खेल के बाद जब बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौड़ प्रेस कांफ्रेस में आये तो उनसे मैंने राहुल के बारे में सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि अब तो ये आदत सी हो गयी है. राहुल हमारे संकटमोचक बन चुके हैं.
बहुत सारे लोग अब ये सवाल उठा रहें हैं कि राहुल का तब क्या होगा जब पंत पूरी तरह से फिट होकर टेस्ट टीम में आ जायेंगे? जब पंत फिट होकर वापस आ जायेंगे तो राहुल फिर से ओपनर बन सकते हैं या फिर मिड्ल ऑर्डर में बल्लेबाज़ी कर सकते हैं. राहुल इकौलते ऐसे बल्लेबाज़ है जो टीम इंडिया में ओपनर से लेकर मिड्ल ऑर्डर और विकेटकीपर बल्लेबाज़ जैसे तिहरी भूमिका भी निभा सकते हैं. इसलिए अब उनके टेस्ट करियर को लेकर आगे की राह किसी बी तरह से मुश्किल नहीं होनी चाहिए. फिलहाल राहुल का टेस्ट औसत 35 से भी कम का है और आने वाले सालों में राहुल अगर इसी अंदाज़ में बल्लेबाज़ी करते हैं तो वो निश्चित तौर पर 45 के करीब की औसत का लक्ष्य टेस्ट क्रिकेट में ज़रुर हासिल कर सकते हैं.
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Tags: India vs South Africa, KL Rahul
FIRST PUBLISHED : December 27, 2023, 21:08 IST
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