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Covid-19: डॉक्टरों ने किया सावधान- इस वजह से अगले दो हफ्ते हैं काफी चुनौतीपूर्ण, बढ़ सकते हैं कोरोना के केस

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Covid-19: डॉक्टरों ने किया सावधान- इस वजह से अगले दो हफ्ते हैं काफी चुनौतीपूर्ण, बढ़ सकते हैं कोरोना के केस

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कोरोनावायरस के मामले चीन, सिंगापुर, अमेरिका और भारत सहित दुनिया के कई देशों में तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। ज्यादातर देशों में संक्रमण बढ़ने के लिए मुख्यरूप से नए वैरिएंट JN.1 को ही जिम्मेदार पाया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस वैरिएंट की संक्रामकता दर काफी अधिक देखी जा रही है, जिसके कारण किसी आबादी में यह कम समय में ही तेजी से बढ़ सकता है।

अमेरिका में संक्रमण के बढ़े हुए मामले इसका उदाहरण हैं, जहां नवंबर में JN.1 की प्रसार दर मात्र सात फीसदी थी जोकि जनवरी में बढ़कर 44 प्रतिशत से अधिक हो गई है। इस जोखिम को देखते हुए सभी लोगों को अलर्ट रहने और कोविड-19 से बचाव के लिए उपाय करते रहना बहुत जरूरी है।

भारत में भी JN.1 वैरिएंट के कारण संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 24 घंटे में यहां 702 नए लोगों को कोरोना संक्रमित पाया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगले कुछ हफ्ते कोरोना के प्रसार के नजरिए से काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। संक्रमण के बढ़ने की आशंका है, ऐसे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की जरूरत है। अगले 10-15 दिन काफी महत्वपूर्ण हैं। क्यों? आइए जानते हैं।

देश में बढ़ रही है संक्रमण की रफ्तार

कोरोना का ये नया वैरिएंट JN.1 देश के कई राज्यों में बढ़ता देखा जा रहा है। गुरुवार तक नौ राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में इसकी पुष्टि की जा चुकी थी। इस बीच जम्मू में लंबे समय के बाद संक्रमण का पहला मामला दर्ज किया गया है। मरीज को होम आइसोलेशन में रखा गया है और सैंपल को जीनोम टेस्टिंग के लिए भेजा गया है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि यह JN.1 वैरिंएट का केस है या नहीं।

वहीं दूसरी तरफ एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में नौ महीने से अधिक समय के बाद राज्य में कोरोना से मौत का पहला मामला दर्ज किया गया है। मृतक को हाल ही में कोरोना पॉजिटिव पाया गया था, उसे कई अन्य बीमारियां भी थीं। पश्चिम बंगाल में 26 मार्च को आखिरी कोविड मौत दर्ज की गई थी।

संक्रमण की रफ्तार बढ़ने का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो देश में फिलहाल संक्रमण की स्थिति नियंत्रित है, पर नए साल की पार्टियों में जब बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होंगे तो वहां से संक्रमण की रफ्तार बढ़ने का खतरा है।

 

नए साल से पहले, केंद्र और राज्य सरकारें सभी आवश्यक कदम उठाकर JN.1 पर सतर्क नजर रख रही हैं। सभी राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री अस्पतालों की तैयारियों का आकलन कर रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को राज्य में लोगों और संस्थानों को अगले 10 से 15 दिनों तक सतर्क रहने को कहा है। 28 दिसंबर तक देश में इस नए JN.1 वैरिएंट के कारण 157 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। 

अगले दो हफ्ते काफी चुनौतीपूर्ण

अमर उजाला से बातचीत में कोरोना रोगियों का इलाज कर रहे इंटेंसिव केयर यूनिट के डॉक्टर अरविंद पाण्डेय कहते हैं, अगले दो हफ्ते देश में कोरोना को देखते हुए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। जिस तरह की JN.1 वैरिएंट की प्रकृति है, ये आसानी से शरीर में बनी प्रतिरक्षा को चकमा देने में सफल हो रहा है, ऐसे में पार्टियों में होने वाली भीड़ में अगर एक-दो लोग भी संक्रमित होते हैं तो इससे बड़ी संख्या में संक्रमण बढ़ने का खतरा हो सकता है।

कोरोना के प्रसार के लिए भीड़-भाड़ वाली जगहें सबसे अनुकूल होती हैं, जिस तरह से लोग छुट्टियां मनाने के लिए बड़ी संख्या में जा रहे हैं और नए साल की पार्टियों में लोगों के इकट्ठा होने की आशंका है, ऐसे में डर है कि कोरोना के मामलों में उछाल आ सकती है। 

जरूरी है ये सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना से बचाव के लिए उपाय करते रहना सभी के लिए जरूरी है। भले ही आप बूस्टर डोज ले चुके हैं फिर भी कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहें। कई मामलों में तीन डोज ले चुके लोगों को भी संक्रमित पाया गया है, हालांकि ऐसे लोगों में बहुत हल्के लक्षण होते हैं। पर संक्रमित होने पर ये वाहक के तौर पर दूसरे कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में संक्रमण का प्रसार कर सकते हैं।

कोरोना के जोखिमों को देखते हुए जिन लोगों को कोमोरबिडीटी है या फिर आपमें सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण हैं तो भीड़-भाड़ या पार्टियों में जाने से बचना चाहिए। मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहना बहुत जरूरी उपाय है जिसका सभी को पालन करना चाहिए।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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