Home Breaking News Peace Accord: केंद्र और असम सरकार के साथ उल्फा गुट का शांति समझौता, बैठक में अमित शाह और सीएम सरमा रहे मौजूद

Peace Accord: केंद्र और असम सरकार के साथ उल्फा गुट का शांति समझौता, बैठक में अमित शाह और सीएम सरमा रहे मौजूद

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Peace Accord: केंद्र और असम सरकार के साथ उल्फा गुट का शांति समझौता, बैठक में अमित शाह और सीएम सरमा रहे मौजूद

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#WATCH | Delhi: United Liberation Front of Assam (ULFA)’s pro-talks faction signed a tripartite Memorandum of Settlement with the Centre and the Assam government in the presence of Union Home Minister Amit Shah. pic.twitter.com/NRouYpTbxV

— ANI (@ANI) December 29, 2023

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि असम के लिए ऐतिहासिक और सामाजिक-आर्थिक आशावाद का क्षण। उल्फा के साथ शांति एक पुनर्जीवित, शांतिपूर्ण और जीवंत असम के लिए ‘मोदी की गारंटी’ की पुष्टि करती है। यह समझौता न सिर्फ लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे का समाधान करता है, बल्कि असम को नए रास्ते तलाशने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान करने का अवसर भी प्रदान करता है। 

प्रतिनिधिमंडल में 16 उल्फा सदस्य और 14 लोग नागरिक समाज से शामिल हैं। इसके पहले केंद्र ने अप्रैल में वार्ता समर्थक गुट को प्रस्तावित समझौते का मसौदा भेजा था, जबकि अगस्त में नई दिल्ली में गुट के साथ चर्चा का एक और दौर आयोजित किया गया था। संगठन के महासचिव अनुप चेतिया ने कहा, शांति समझौते के लिए उल्फा के वार्ता समर्थक गुट का 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को दिल्ली पहुंच चुका है।

इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर कहा था, समझौते पर हस्ताक्षर शुक्रवार शाम पांच बजे गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किए जाएंगे।

1979 में हुआ था गठन

अलगाववादी संगठन उल्फा का गठन अप्रैल 1979 में बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) से आए बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों के खिलाफ आंदोलन के बाद हुआ था। फरवरी 2011 में यह दो समूहों में विभाजित हो गया था और अरबिंद राजखोवा के नेतृत्व वाले गुट ने हिंसा छोड़ दी थी। यह गुट बिना शर्त सरकार के साथ बातचीत के लिए सहमत है। दूसरे उल्फा गुट का नेतृत्व करने वाले परेश बरुआ बातचीत के खिलाफ हैं। वार्ता समर्थक गुट ने असम के मूल निवासियों की भूमि के अधिकार समेत उनकी पहचान और संसाधनों की सुरक्षा के लिए सुधारों की मांग की है।



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