[ad_1]
#WATCH | North 24 Parganas, West Bengal: A team of the Enforcement Directorate (ED) attacked during a raid in West Bengal’s Sandeshkhali.
More details are awaited pic.twitter.com/IBjnicU9qj— ANI (@ANI) January 5, 2024
क्या है राशन वितरण घोटाला?
कथित राशन वितरण घोटाले के सिलसिले में पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय के छापे महीनों से चल रहे हैं। ईडी ने पहले खुलासा किया था कि पश्चिम बंगाल में लाभार्थियों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) राशन का लगभग 30 प्रतिशत बाजार में भेज दिया गया था।
जांच एजेंसी ने कहा था कि राशन की चोरी कर मिलमालिकों और पीडीएस वितरकों के बीच बांट दिया था। उन्होंने कहा कि राइस मिलमालिकों ने कुछ सहकारी समितियों सहित कुछ लोगों के साथ मिलकर किसानों के फर्जी बैंक खाते खोले और धान उत्पादकों को दिए जाने वाले एमएसपी को हड़प लिया। प्रमुख संदिग्धों में से एक ने स्वीकार किया है कि चावल मिलों द्वारा अनाज के लिए लगभग 200 रुपये प्रति क्विंटल कमाए गए थे, जिसे सरकारी एजेंसियों द्वारा किसानों से एमएसपी पर खरीदा जाना था।
मंत्री ज्योति प्रियो मलिक गिरफ्तार
पिछले साल 14 अक्तूबर को जांच एजेंसी ने आटा और चावल मिल मालिक रहमान को गिरफ्तार किया था, जिसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। बाद में कई छापे मारे गए, जिसमें आपत्तिजनक सामग्री और 1.42 करोड़ रुपये जब्त किए गए थे। जांच एजेंसी ने घोटाले से जुड़े धनशोधन के एक मामले में पश्चिम बंगाल के मंत्री ज्योति प्रियो मलिक को गिरफ्तार किया था। उन्होंने 2011 से 2021 तक खाद्य आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया, जिस अवधि के दौरान राशन वितरण में अनियमितताएं हुईं। मलिक को एक स्थानीय अदालत ने छह नवंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया है।
[ad_2]
Source link