Home World Jaishankar Nepal Visit: नए साल में पहले विदेशी दौरे पर एस. जयंशकर, रिकंस्ट्रक्शन के लिए नेपाल को दिए 1 हजार करोड़

Jaishankar Nepal Visit: नए साल में पहले विदेशी दौरे पर एस. जयंशकर, रिकंस्ट्रक्शन के लिए नेपाल को दिए 1 हजार करोड़

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Jaishankar Nepal Visit: नए साल में पहले विदेशी दौरे पर एस. जयंशकर, रिकंस्ट्रक्शन के लिए नेपाल को दिए 1 हजार करोड़

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Jaishankar Nepal Visit Updates: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar Nepal Visit) इस साल के पहले विदेशी दौरे पर नेपाल पहुंच पहुंचे. वहां, जयशंकर ने नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल से मुलाकात की. इस दौरान भारत और नेपाल के सदियों पुराने रिश्तों पर बात हुई. भारत ने नेपाल के रीकंस्ट्रक्शन पर भी चर्चा की और मदद के तौर पर नेपाल को 1 हजार करोड़ नेपाली रुपये देने का ऐलान किया.

नेपाल का पुराना साथी है भारत

बता दें कि 2015 में आएं विनाशकारी भूकंप से नेपाल में काफी तबाही हुई थी. तब भारत ने नेपाल को करीब 83 अरब रुपये का अनुदान और कर्ज देने की घोषणा की थी. भारत अब और 1 हजार करोड़ रुपये की मदद नेपाल को देने जा रहा है. इस समझौते पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हस्ताक्षर कर दिए हैं.

मजबूत होगा भारत-नेपाल का रिश्ता

बता दें कि एस. जयशंकर गुरुवार को अपने दो दिन के दौरे पर नेपाल के काठमांडू पहुंचे. वहां, उन्होंने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल से शिष्टाचार मुलाकात की. इसके बाद अन्य तीन समझौते पर बात हुई. नेपाल में हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसके लिए भारत अपने पड़ोसी देश नेपाल की हर छोटी परियोजना के लिए 20 करोड़ नेपाली रुपये देगा.

नेपाल से बिजली लेगा भारत

भारत और नेपाल के बीच दूसरा समझौता लॉन्गटर्म बिजली व्यापार के लिए हुआ है, जिसमें नेपाल अगले 10 साल में 10,000 मेगावाट तक एनर्जी का एक्सपोर्ट होगा. इसी तरह, दोनों पक्षों ने नेपाल एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की तरफ से विकसित नैनो सैटेलाइट के लिए सर्विस एग्रीमेंट शुरू किया है. समझौते पर नेपाल एकेडमी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के बीच डील पर साइन हुए.

भारत-नेपाल का टारगेट क्या है?

गौरतलब है कि नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ पिछले साल 31 मई से तीन जून तक भारत के दौरे पर आए थे. उस वक्त दोनों पक्षों ने कई प्रमुख समझौतों पर साइन किए थे. इस मीटिंग में भारत के बिजली आयात को अगले 10 साल में मौजूदा 450 मेगावाट से बढ़ाकर 10,000 मेगावाट करने का समझौता हुआ था. इसके अलावा तमाम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे.

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